विधानसभा – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Wed, 30 Aug 2023 06:52:04 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 कोई अपमान यूं ही नहीं भूल जाता, फिर ये तो बाबा हैं https://samacharpacheesa.com/?p=7914 Wed, 30 Aug 2023 06:52:03 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7914 सरगुजा के पूर्व महाराजा व वर्तमान में छतीसगढ़ के उप मुख्यमन्त्री टीएस सिंहदेव (बाबा साहेब) की पहचान ही अपनी सच्चाई ,बेबाक विचार शैली,व सीधी सपाट बयानबाजी की है। वे कभी भी अपनी विवेक का इस्तेमाल करते हुए हमेशा दिल से बोलते हैं। दिल में कुछ और जबान पर कुछ और यह उनकी मर्यादा के खिलाफ है। राजनीति में जितनी , जब जरूरत हो उतनी ही राजनैतिक भाषा का इस्तेमाल करते हैं। सदैव सीधी सपाट बात कहने की कोशिश उनकी रहती है। उन्हें अपने अस्तित्व व मर्यादा का हमेशा ख्याल रहता है। उसके लिये वो कुछ भी कर सकते हैं। चंद मिनटों में वे राजनीति को भी छोड़ सकते हैं। पद तो अहम तो कभी उनको छू भी नहीं पाता। महाराजा वाली आन- बान- शान, वे प्रजातंत्रिक जीवन में भी बना कर रखते हैं। उससे कोई समझौता उनकी फितरत में नहीं है। इसी आन-बान-शान को खण्डित करने का प्रयास बृहस्पति सिंह ने विधानसभा और विधान सभा के बाहर शिद्दत के साथ सोच समझ कर किया। कह दिया महाराजा है , मुझे कभी भी मरवा सकते हैं। मेरी हत्या करवा सकते हैं। राजनीति में छोटे मोटे आरोपों को तो सहन पड़ता है। लेकिन इतने बड़े आरोप के साथ चरित्र पर लांछन लगना , कोई मर्यादाशील व्यक्ति जो कभी एक महत्वपूर्ण स्टेट का महाराज रहा हो ,कैसे बर्दाश्त कर सकता है। इस आरोप की चर्चा विधान सभा में पहुंची और कांग्रेस के सदस्यों ने इस पर चुप्पी साधी तो इस प्रजातांत्रिक महाराजा को भी दिल पर ठेस पहुंची। बर्दाश्त नहीं हुआ। विधानसभा से यह कह कर उठ कर चले गए कि इस विधान सभा में इतने बड़े आरोप लगने के और माफी ना मांगने के बाद मेरे विधान सभा में बैठने का औचित्य ही क्या है। तत्काल निर्णय लेकर जो व्यक्ति विधानसभा का त्याग करने की सोच सकता है, वह उस घटना को इतनी जल्दी कैसे भूल सकता है। हालांकि गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने इस घटना के लिए विधानसभा में खेद व्यक्त जरूर किया लेकिन बृहस्पत सिंग पर कोई कार्यवाही की बात नहीं हुई। चोट पर चोट महाराजा बर्दाश्त नहीं कर पाए। बावजूद इसके शालीनता से पार्टी से जुड़े रहे। यह जरूर कि समय समय पर पत्रकारों द्वारा पूछे गए राजनैतिक सवालों के जवाब में यदा कदा उनका दर्द लोगों ने उनके शब्दों में महसूस जरूर किया। पहले ढाई-ढाई साल का नाटकिया अपमान,फिर आरोप प्रत्यारोप का दंश लंबे समय तक बर्दाश्त कर रहे महाराजा साहेब को उपमुख्यमंत्री का पद जब हाई कमान ने नवाजा,तब महाराजा को अपने दर्द का अहसास तेजी से हुआ। किसी पत्रकार ने पूछा तो उनका वह दर्द शब्दों के रूप में बाहर आ ही गया। उन्होंने कहा दिया कि 90 विधानसभाओं में एक विधानसभा ऐसी है जिसकी जिम्मेदारी मेरी नहीं होगी। यह बयान बृहस्पति सिंह के लिए बड़ा संकेत दे रहा है। इसीलिए तो बाबा ने ऐसा इशारा करते बयान दिया है, जिससे बृहस्पति सिंह की नींद उड़ी हुई है। जिन्होंने उसे बाबा पर बयानबाजी करने को तब उकसाया होगा वो भी अब उपमुख्यमंत्री की मंशा के विपरीत जाकर बेवजह पंगा लेंगें इसकी भी आशंका नहीं है। सोचना तो तब था जब आप गड्डे में गिरने तैयार हुए थे। अब उससे बाहर निकालने वाला कोई नहीं है। इसे ही तो कहते हैं कुल्हाड़ी पर खुद पैर मारना। एक तो टिकट मिलेगी नहीं, मिल गई तो, जीतना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो जाएगा। पहले बाबा को ये प्रिय थे। अब वतर्मान परिस्तिथि में यही कह सकते हैं कि ना खुदा ही मिला ना विसाले सनम ना इधर के रहे ना उधर के हो पाये, सही भी है कि कोई सामान्य इंसान भी अपने बेवजह के अपमान को यूं ही तो नही भूल जायेगा। फिर ये तो सच के महाराजा है। जो होगा वो तो अब हो के रहेगा। इसके साथ ही कांग्रेस के अंदरखाने की एक नई तस्वीर भी लोग इसके आईने में देखने का प्रयास जरूर करेंगें। यह राजनीति है , इसमें जंग और प्रेम की तरह अब सब कुछ जायज माना जाने लगा है।

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कांग्रेस के विधायकों के टिकट पर निर्भर नतीजे https://samacharpacheesa.com/?p=7887 Sat, 26 Aug 2023 06:55:45 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7887 अभी हाल ही में सी वोटर और एबीपी न्यूज की सर्वे रिपोर्ट आई है इसके बाद कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता थोड़े नर्वस हैं और यह कहते नजर आ रहे हैं कि कहीं 2013 वाली स्थिति न हो जाए। 2013 में कांग्रेस की सरकार आते-आते रह गई थी जबकि उस समय तमाम परिस्थितियां कांग्रेस के बिलकुल अनुकूल थी। मतगणना के दौरान एक समय लगने लगा था कि कांग्रेस की सरकार बन ही जायेगी लेकिन अति आत्मविश्वास के कारण कांग्रेस सत्ता में आते आते रह गई। पुराने और जमीनी कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मानना है कि उस समय सर्वे रिपोर्ट को अनदेखा किया गया था। जिन विधायकों के खिलाफ माहौल था और जिनका टिकट काटा जाना चाहिए था उनका टिकट नहीं काटा गया और अंतत: उनके कारण कांग्रेस प्रदेश में पिछड़ गई। बताया जाता है कि उस समय 17 विधायकों के खिलाफ एंटी इनकैंबम्सी की बात सर्वे रिपोर्ट में आई थी और इनके चेहरे बदलने का सुझाव दिया गया था लेकिन तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष इस बात पर अड़ गए थे कि सिटिंग विधायकों की टिकट नहीं कटना चाहिए। नतीजतन तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष समेत कई विधायकों की हार हो गई थी और तमाम अनुकूल परिस्थितियां भी कांग्रेस की सत्ता वापसी नहीं करा पाई थी। फिलहाल 2023 का दृश्य भी ऐसा ही दिख रहा है। प्रदेश में सरकार के खिलाफ कोई माहौल नहीं, गांव से लेकर शहर तक चुनाव को लेकर कोई उत्साह भी नहीं क्योंकि बदलाव की बात होती नहीं दिख रही है। प्रदेश में हो रहे अब तक के तमाम सर्वे रिपोर्ट भी यही बताते हैं कि फिर से कांग्रेस की सरकार आ सकती है लेकिन सीटें कम हो रही है। हालिया एक सर्वे में भी यह कहा गया कि सरकार की वापसी ज्यादा लोग चाहते हैं लेकिन काम से कम 36 विधायकों से नाराजगी है। कांग्रेस के आंतरिक सर्वे में भी 33 विधायकों के परफॉर्मेंस पर सवाल उठाया गया था और उनको क्षेत्र में स्थिति ठीक करने की हिदायत भी दी गई थी। बताया जाता है कि अभी भी 22 विधायक ऐसे हैं जिनपर हार का खतरा है, इसलिए यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि इनकी टिकट काटी जा सकती है। प्रदेश में 23 ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं जहां हर 5 साल के बाद स्थानीय लोगों ने विधायक बदल दिया है। इनमे से 17 विधानसभा क्षेत्र में 2003 से ही यह स्थिति है जबकि 6 विधानसभा क्षेत्र, जिनका निर्माण 2008 में हुआ है उनकी भी यही प्रवृति दिखाई देती है। किसी भी सिटिंग एमएलए का टिकट काटना किसी पार्टी के लिए आसान नहीं होता खासकर यदि वह पार्टी कांग्रेस हो। पार्टी को डर होता है कि कहीं वह बागी न बन जाए या चुनाव में अधिकृत प्रत्याशी को डैमेज न कर दे। अब कांग्रेस नेतृत्व 20 सिटिंग एमएलए का टिकट काटने का साहस कर पाएगी या नहीं यह तो समय बताएगा।

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विधानसभा में विपक्ष द्वारा प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से अस्वीकृत https://samacharpacheesa.com/?p=7478 Sat, 22 Jul 2023 07:36:29 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7478 रायपुर।  छत्तीसगढ़ विधानसभा में राज्य सरकार के खिलाफ विपक्ष की ओर से प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से अस्वीकृत कर दिया गया। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने अविश्वास प्रस्ताव के विरोध में चर्चा के दौरान जवाब में कहा कि जब हमारी सरकार बनी तो हमने ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़Ó की बात की और इसे साकार करने की दिशा में हमारी सरकार निरंतर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में कहा कि विपक्ष द्वारा प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव के मुद्दों में कोई तथ्य नहीं है। प्रजातंत्र में विपक्ष का अधिकार होता है कि वे अविश्वास करे। सत्ता पक्ष के पास भी मौका होता है कि अपनी बात रखें। इन्होंने 109 आरोप लगाए पर कोई तथ्य नहीं दिए। पहले जब अविश्वास प्रस्ताव आता था तब नक्सली समस्या पर पहले बात होती थी। इस बार सदस्यों ने नही की। ये हमारी उपलब्धि है।
आप इंद्रावती के उस पार गए क्या ये संभव था। ये इसलिए हुआ कि इस समस्या पर काम हुआ। अभी भेंट मुलाकात में बस्तर में रात रुका, सभी से मिला। जो सबसे बड़ा कमेंट मिला जिसने मेरे दिल को छू लिया। जैन समाज के लोगों से मैंने पूछा कि इन चार सालों में क्या फर्क आया। उन्होंने कहा कि रिश्ता करने में बस्तर में अब दिक्कत नहीं होती है। आसानी से लोग रिश्ता दे देते हैं क्योंकि बस्तर बदल गया है। पहले बस्तर में सड़कें काट दी जाती थी आज सड़के काटी नहीं जाती, ये परिवर्तन बस्तर में देखने को मिला है। पिछली सरकार ने जो स्कूल बंद करा दिए थे, उसे हमने आरम्भ कर दिया। राशन पहुंचाना भी पहले टेढ़ी खीर थी। अब कितना आसान हो गया है। ये बदलाव आया है। जब हमारी सरकार बनी तो हमने गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ की बात की। उन महापुरुषों को, कलाकारों और राजनीतिक दलों के लोगों को नमन करता हूँ जिन्होंने छत्तीसगढ़ निर्माण में अपना योगदान दिया। परिवर्तन केवल सत्ता के लिए नहीं होना चाहिए। यह लोगों के जीवन मे होना चाहिए इसलिए परिवर्तन की मशाल लेकर हमारे नेता परिवर्तन यात्रा में निकले थे। आज हमने किसानों की जिंदगी बदली है। बस्तर, सरगुजा में परिवर्तन हुआ है। महिलाओं के जीवन मे बदलाव आया है। जब बच्चे फर्राटेदार इंग्लिश में बोलते हैं तब संतोष होता है। आरडी तिवारी स्कूल में पहले 56 बच्चे पढ़ रहे थे। अब हजार बच्चे पढ़ रहे हैं। अब ऐसे स्कूल नहीं चल रहे जो गुणवत्ता नही देते, लोग स्वामी आत्मानंद स्कूल में अपने बच्चों को प्रवेश दिला रहे हैं। बस्तर के बच्चों को शिक्षित कर दीजिए, सुपोषित कर दीजिए, वे अपनी जिंदगी स्वयं संवार लेंगे। 20 हजार करोड़ रुपये की इनपुट सब्सिडी हमने किसानों को दी। हमारे प्रदेश का किसान आज बहुत खुशहाल है।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि अब मैं डीएमएफ के बारे में जानकारी देता हूं। मुख्यमंत्री बनने के बाद मैंने मीटिंग ली। सभी खदान आदिवासी अंचल में थी। मैंने पूछा कि आदिवासियों के जीवन मे क्या परिवर्तन आया। उन्होंने कहा कि नहीं आया। हमने कहा कि यह होना चाहिए। हमने कहा कि इससे स्कूल बनाओ, सड़क बनाओ। डीएमएफ का तभी सही उपयोग होगा। मलेरिया में हमने बड़ा काम किया और यह काफी घट गया। उल्टी दस्त का एक भी प्रश्न विधानसभा में बस्तर से नहीं लगा। बस्तर में आज डॉक्टर है, नर्स हैं। ब्लड बैंक बनवाये गए हैं।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ का संकल्प लेकर जब हम निकले, कितनी बाधा आई। कोरोना आया। सबकी मदद से हमने अपना संकल्प पूरा किया। सबने इसके लिए सहयोग किया। पांच साल में आये परिवर्तन के बारे में उन्होंने बताया। आज जिले 33 हो गए। तहसील भी बढ़ गए। प्रति व्यक्ति आय बढ़ गई। धान खरीदी 56 लाख से 110 लाख मीट्रिक टन हो गई। रकबा भी बढ़ गया। धान खरीदी केंद्र 2400 हो गए। राजीव गांधी न्याय योजना, भूमिहीन ग्रामीण श्रमिक योजना, गोधन न्याय योजना हमने आरम्भ की। 10 हजार से अधिक गौठान बनाये। उर्जिकृत पंप 4 लाख हो गए। एकल बत्ती कनेक्शन 15 लाख से 17 लाख हो गए। आपके समय तो 105 करोड रुपए का ऋण माफ हुआ था, हमने तो 9500 सौ करोड़ का ऋण माफ किया है। केसीसी आपके समय में 14 लाख दिए गए। वह अब बढ़कर 21 लाख हो गए हैं। 245 करोड़ का गोबर खरीदा और 291 करोड़ की सामग्री बेचा, यह घाटे का सौदा नहीं है। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि यह कबीर की भूमि है। बाबा गुरु घासीदास की भूमि है। शांति का टापू है। अपनी संस्कृति के लिए हम काम कर रहे हैं।

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रायपुर में विकास कार्य के मुद्दे पर बवाल, मंत्री डहरिया और बृजमोहन अग्रवाल के बीच सदन में तीखी बहस https://samacharpacheesa.com/?p=7444 Thu, 20 Jul 2023 10:01:48 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7444 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा मानसून सत्र के तीसरे दिन भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने रायपुर में विकास कार्य के मुद्दे पर सवाल पूछे। भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने पूछा कि रायपुर में केंद्र सरकार ने कितना पैसा दिया और कितना शहर के विकास में खर्च हुआ? मंत्री शिव डहरिया ने बृजमोहन अग्रवाल के सवाल का जवाब दिया, जिसके बाद सदन में तीखी बहस हुई।
मंत्री डहरिया ने दिया ये जवाब- भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल के रायपुर में विकास कार्य के सवाल पर मंत्री डहरिया ने जवाब दिया कि 1327 करोड़ 49 लाख रुपए 32 हजार रुपए की राशि मिली है। कुल 9615 कार्य स्वीकृत हुए हैं। ज्यादातर काम पूरे हो गए हैं। प्रधानमंत्री आवास का काम बाकी है। इसका सर्वे बीजेपी शासनकाल में हुआ। सर्वे में गलती थी, इसलिए प्रधानमंत्री आवास का काम बाकी है। इसके अलावा ज्यादातर काम शुरू हो गए हैं और ज्यादातर काम पूरे भी हो गए हैं।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि राजधानी रायपुर की पिछले साढ़े चार साल में बुरी हालत हो गई है। अग्रवाल ने कहा कि राजधानी की स्थिति खराब है। यहां मुगलिया शासन चल रहा है और सिर्फ भ्रष्टाचार हो रहा है। बृजमोहन ने यह सवाल भी पूछा कि तेलीबांधा रोड पर सौंदर्यीकरण किसने किया? मंत्री डहरिया ने कहा, हमें नहीं पता।
बृजमोहन ने पूछा आठ साल में कितने पत्र लिखे बता दीजिए, सड़क चौड़ीकरण का मसला है। ये चला चली की बेला है। मंत्री ने जवाब दिया कि तात्यापारा की सड़क पीडब्ल्यूडी से बन रही है। बृजमोहन अग्रवाल ने यह तक कहा कि मंत्रीगण ज्ञान की परीक्षा ना लें, किस मद से पैसे खर्च किए, यह बताएं ? सीएम भूपेश ने जो दस करोड़ की घोषणा की, वो क्या है ?
बृजमोहन अग्रवाल ने यह भी कहा कि आप केवल यह बता दीजिए 9615 काम स्वीकृत किए, इसमें कितने काम पूरे हैं और कितने अधूरे हैं। केवल घोषणा कर देने से कुछ नहीं होता है। शारदा चौक से तात्यापारा के चौड़ीकरण की मांग की गई है, लेकिन अब तक पूरा नहीं हुआ। मुख्यमंत्री ने नगरीय प्रशासन विभाग में 10 करोड़ की घोषणा की है, वह किस बजट से किए हैं, वह भी बता दें।
बृजमोहन अग्रवाल ने यह भी कहा कि रायपुर की स्थिति बहुत खराब है और मंत्री जी की रायपुर में कुछ नहीं चलती। मंत्री ने कहा कि वहां स्थिति यह है कि छह करोड़ का काम है और 80 करोड़ देना है। मंत्री डहरिया ने कहा कि तात्या पारा की सड़क का बजट पीडब्ल्यूडी में शामिल हो गया है।
अग्रवाल ने कहा कि वह काम पीडब्ल्यूडी को नहीं नगर निगम को करना है। उस सड़क के लिए 40 करोड़ चाहिए लेकिन सीएम ने केवल 10 करोड़ की घोषणा की है तो सड़क कैसे बनेगी? अग्रवाल ने आरोप लगाया कि रायपुर से सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। डहरिया ने कहा कि हमने रायपुर ही नहीं पूरे प्रदेश के शहरों को संवारा है। पीएम आवास में सबसे बड़ा पुरस्कार हमें मिला है। हम काम अच्छा कर रहे हैं।

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छत्तीसगढ़ विधानसभा में नानघाट से बलौदा बाजार सड़क निर्माण की लागत पर चर्चा https://samacharpacheesa.com/?p=7437 Thu, 20 Jul 2023 07:54:46 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7437 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में तीसरे दिन की कार्यवाही शुरू हो चुकी है। लोक निर्माण मंत्री ताम्रध्वज साहू ने छत्तीसगढ़ रोड एंड इंफ्रॉस्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड की वार्षिक रिपोर्ट सदन में रखी। जिस पर चर्चा चल रही है। भारतीय जनता पार्टी के विधायक शिवरतन शर्मा ने नानघाट से बलौदा बाजार सड़क निर्माण की लागत का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि इस 5वीं विधानसभा में चौथी बार ये प्रश्न लगाया है। इस सड़क में 13 से 14 किलोमीटर की सड़क बैठ गई है। लोक निर्माण मंत्री ताम्र ध्वज साहू ने कहा कि सड़क की स्थिति संतोषजनक है। इस पर विधायक ने आपत्ति जताई।
नानघाट से बलौदा बाजार सड़क निर्माण की लागत पर चर्चा- शिवरतन ने पूछा कि केंद्रीय सड़क अनुसंधान केंद्र को कार्यवाही करने का अधिकार है क्या।मंत्री ने कहा कि कार्यवाही करने की जरूरत नहीं है। कुछ जगह सुधार के लिए कहा गया है। शर्मा ने कहा की केंद्र ने जब अनियमितता की बात कही है तो आप कार्यवाही क्यों नहीं कर रहे हैं। इस पर मंत्री ने कहा कि हम ठेकेदार के खर्च पर सुधार करवा रहे हैं। शर्मा ने आरोप लगाया कि ठेकेदार को बचाने की कोशिश की जा रही है। नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने कहा कि प्रदेश में सड़कों की स्थिति दयनीय है। इस सड़क की वीडियोग्राफी कर जांच कराने की मांग की। मंत्री ने कहा कि हम दिखवा लेंगे।

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विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर आज चर्चा होगी https://samacharpacheesa.com/?p=7435 Thu, 20 Jul 2023 07:39:04 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7435 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन गुरुवार को विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी। विधानसभा अध्यक्ष डा. चरणदास महंत ने विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 20 जुलाई को शासकीय कार्य खत्म होने के बाद शाम 5.30 बजे तक और 21 जुलाई को शासकीय कार्य खत्म होने के बाद शाम 5.30 बजे तक समय निर्धारित की है।
उन्होंने बताया कि सदन को मंत्रिमंडल के प्रति दो अविश्वास प्रस्ताव की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। इनमें पहली सूचना नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल व अन्य सदस्यों की है। दूसरी सूचना सदस्य धर्मजीत सिंह व प्रमोद कुमार शर्मा से प्राप्त हुई है। पहली सूचना में दशांश सदस्य खड़े होने की स्थित में दूसरी सूचना नहीं ली जाएगी।

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छह हजार 31 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश करेंगे सीएम बघेल https://samacharpacheesa.com/?p=7417 Wed, 19 Jul 2023 07:49:43 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7417 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का समापन आज बुधवार को हो सकता है। विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी कार्यसूची के अनुसार, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल छह हजार 31 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश करेंगे। इस पर चर्चा के लिए तीन घंटे का समय तय किया गया है। इसी तरह भाजपा के अविश्वास प्रस्ताव को भी कार्यसूची में शामिल किया गया है। उच्च प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो विधेयक और अन्य शासकीय कार्य पूरा करने के बाद सदन की कार्यवाही समाप्त हो सकती है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में मानसून सत्र दो दिन में खत्म हो गया था।

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छत्तीसगढ़ विधानसभा के समिति कक्ष में हुई कार्य मंत्रणा समिति की बैठक https://samacharpacheesa.com/?p=7395 Tue, 18 Jul 2023 07:58:37 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7395 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत की अध्यक्षता में आज मंगलवार को कार्य मंत्रणा समिति की बैठक आयोजित की गई। विधानसभा के समिति कक्ष में कार्य मंत्रणा समिति की बैठक रखी गई। इसमें सीएम भूपेश बघेल, डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव, नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल सहित समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
विधानसभा के मानसून सत्र के प्रथम दिन विधानसभा अध्यक्ष डॉ.चरणदास महंत, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव कार्य समिति की बैठक में भाग लेने विधानसभा परिसर स्थित समित कक्ष की ओर रवाना हो गए।

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प्रदेश में आरक्षण कोटे पर भ्रम https://samacharpacheesa.com/?p=6759 Tue, 18 Apr 2023 08:42:39 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6759 मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार ने प्रदेश में विभिन्न वर्गों को जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देने के लिए विधानसभा में एक विधेयक पारित कराया है। इस विधेयक के अनुसार अनुसूचित जनजाति वर्ग को 32 प्रतिशत, ओबीसी को 27, अनुसूचित जाति को 13 और ईडब्ल्यूएस को 4 प्रतिशत देने का प्रावधान किया गया है। यह विधेयक अभी राज भवन से अनुमति की प्रतीक्षा में अटका हुआ है। इधर मुख्यमंत्री ने सोमवार को एक पत्र लिखकर प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा पारित आरक्षण संशोधन विधेयक को संविधान की 9वीं अनुसुची में शामिल किया जाए। इस प्रश्न के बाद आरक्षण कोटे को लेकर भ्रम और गहरा गया है। एक बात तो तय है कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव को 8 महीने का समय भी नहीं बचा है। ऐसी स्थिति में आरक्षण कोटे में बढोत्तरी का लाभ कांग्रेस पार्टी को चाहिए तो किसी हाल में विधेयक को स्वीकृत कराकर लागू कराना होगा। कांग्रेस को इस बात का भी भय है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो चुनाव में नुकसान हो सकता है। गत वर्ष सितंबर में प्रदेश में लागू 58 प्रतिशत आरक्षण कोटा और तृतीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती के लिए अनुसुचित क्षेत्रों में जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण के प्रावधान को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था। इस बात से प्रदेश के जनजातिय युवाओं में खासी नाराजगी हुई थी। यह नाराजगी कोटा नहीं बढऩे के कारण चुनाव में बरकरार रह सकती है। वैसे अभी पिछले छ: महीनों से नई भर्ती के लिए विज्ञापन शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश परीक्षा और अनेक संपन्न हुई परीक्षाओं के परिणाम पर रोक लगी हुई है। इस वजह से भी युवा परेशान और नाराज है। राज्यपाल आरक्षण विधेयक पर कोई निर्णय लेने से पहले सर्वोच्च न्यायालय में लंबित इस मामले की सुनवाई और निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे है। दूसरी ओर विधानसभा ने भी पारित आरक्षण कोटा कानून को संविधान की 9वीं अनुसुची में डालने का अशासकीय संकल्प पारित किया है। अब मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री को इस बारे में पत्र लिखना समझ से परे है। कुछ दिन पूर्व मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री से मिलने दिल्ली गए थे और बताया गया कि दोनों के बीच अनेक विषयों पर बात भी हुई लेकिन प्रधान मंत्री से बात करते हुए क्या मुख्यमंत्री ने प्रदेश के आरक्षण विधेयक के संबंध में कोई चर्चा की थी क्या? देशभर में किसी भी राज्य को आरक्षण कोटा 50 प्रतिशत से अधिक करने की अनुमति नहीं है। मुख्यमंत्री ने पत्र में ईडब्ल्यूएस वर्ग को 10 प्रतिशत का कोटा देने के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को आधार बनाकर प्रधानमंत्री से प्रदेश में कोटा बढ़ाने का अनुरोध किया है,जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने ईडब्ल्यूएस के 10 प्रतिशत कोटा को सामान्य वर्ग के अधीन रखा है। प्रदेश में अगर गरीबी बहुत ज्यादा है तो यह राज्य द्वारा गठित क्वंटीफायबल डेटा आयोग की रिपोर्ट में भी प्रकट हुई होगी, अगर ऐसा है तो पारित विधेयक में ईडब्ल्यूएस का कोटा केवल 4 प्रतिशत क्यों रखा गया? उसे 10 प्रतिशत किया जाना था। कुल मिलाकर प्रदेश में आरक्षण कोटे को लेकर राजनीति हो रही है और इससे युवा बेरोजगार भ्रम की स्थिति में है। इस भ्रम को दूर करना जरूरी है नहीं तो इसका खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ सकता हैं।

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वनवासी या आदिवासी विकास तो हो https://samacharpacheesa.com/?p=6618 Thu, 23 Mar 2023 06:09:28 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6618 विधानसभा में जनजातीय विकास से जुड़े कुछ मामले चर्चा में आए। पहला विषय तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलने वाले लाभ से संबंधित था। भारतीय जनता पार्टी ने एक स्थगन प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसमें वन क्षेत्रों में तेंदूपत्ता तोडऩे वाले श्रमिकों को समय पर मजदूरी नहीं मिलने का मुद्दा उठाया गया। इस मामले में यह भी जानकारी आई कि वर्तमान भूपेश सरकार ने तेंदूपत्ता तोड़ाई का पारिश्रमिक 2500 रुपए प्रति मानक बोरा से बढ़ाकर 4000 रुपए कर दिया है। लेकिन उससे तेंदूपत्ता तोडऩे वालों को जो लाभ मिलता था, वह कम हो गया है। विधानसभा में डॉ. रमन सिंह ने बताया कि 2017 में 17 लाख मानक बोरे तेंदूपत्ता का संग्रहण होता था और पारिश्रमिक व बोनस को मिलाकर 2017 में एक हजार 117 करोड़ रुपए का भुगतान हुआ, वहीं भूपेश सरकार ने वर्ष 2021 में 13 लाख मानक बोरा का संग्रहण किया और पारिश्रमिक व बोनस मिलाकर कुल 630 करोड़ रुपए का भुगतान किया। इस हिसाब से पारिश्रमिक बढ़ाने के बावजूद तेंदूपत्ता तोडऩे वालों को ज्यादा पैसा नहीं मिल रहा है। पिछले 4 वर्षों से प्रदेश की अर्थव्यवस्था की दूरी जनता के जेबों में अधिकाधिक पैसा डालने पर टिकी हुई है। भूपेश सरकार मानती है कि प्रति क्विंटल धान का पैसा राजीव गांधी न्याय योजना के तहत किसानों की जेब में जा रहा है, गोबर खरीदने का पैसा भी गांव के लोगों की जेब में जा रहा है, यह पैसा प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी है। दुनिया के एक बड़े अर्थशास्त्री थे कीन्स जिन्होंने लोगों के हाथों पैसा पहुंचाकर अर्थव्यवस्था बढ़ाने का सिद्धांत 1920 के दशक में दिया था। अब 2020 के दशक में यह सिद्धांत छत्तीसगढ़ में लागू हो रहा है। सवाल उठता है कि तेंदूपत्ता तोडऩे वालों की जेब में ज्यादा पैसा क्यों नहीं जा रहा है। विधानसभा में चर्चा के दौरान मंत्री कवासी लखमा ने इस बात पर आपत्ति की कि जनजातीय समुदाय के लिए वनवासी शब्द का प्रयोग किया जा रहा है। हालांकि विधायक धर्मजीत सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार ने अपने जवाब में भी वनवासी शब्द का उल्लेख कर रही है। यह विषय जनजातीय समाज के बीच में बहुत तेजी से चर्चा में है कि उनके लिए वनवासी शब्द का प्रयोग न किया जाए। यही प्रश्न संविधान सभा में भी चर्चा के दौरान उठा था और आखिर में यह तय हुआ कि अनुसूचित जनजातीय शब्द का प्रयोग किया जाएगा। तब से लेकर आज तक शब्द भले ही बदल गए हों, लेकिन वन क्षेत्रों में रहने वाले वनवासी हो या आदिवासी या जनजातीय इनकी आर्थिक स्थिति सुधर नहीं पाई है। शब्द बदल लेने से आर्थिक और सामाजिक स्थिति नहीं बदलती उस समाज को मुख्यधारा में जोडऩे के लिए संबंधित प्रयास की आवश्यकता है।

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