विधानसभा चुनाव – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Mon, 30 Oct 2023 10:41:24 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 Cg Election 2023 मुद्दा :- सड़कों के विकास ने बदल दी थी छत्तीसगढ़ की तस्वीर, पिछले 6 सालों में निर्माण की रफ्तार पर लगी ब्रेक, क्या हुआ सड़को का हाल देखें वीडियो https://samacharpacheesa.com/?p=8424 Mon, 30 Oct 2023 10:41:23 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=8424

रायपुर। छत्तीसगढ़ ने पिछले डेढ़ दशक में विकास के नये आयाम स्थापित कर विकसित राज्य की पहचान बनाई। राज्य में आए बदलाव से छत्तीसगढ़ बीमारू से विकसित प्रदेशों की पंक्ति में उदाहरण बन कर खड़ा हुआ। विकास की इस राह में सबसे ज्यादा योगदान प्रदेश की सड़कों और बीजेपी शासनकाल का रहा है। हालांकि जिस रफ्तार से पिछले डेढ़ दशकों में सड़कों का जाल बिछा, उस पर पिछले 5-6 सालों में उसकी गति पर ब्रेक लग गया। नए सड़कों के निर्माण की गति न सिर्फ कम हुई, बल्कि उसका मेंटनेंस नहीं होने के कारण वर्तमान में प्रदेश के सड़कों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। पिछले 6 सालों के दौरान प्रदेश में 11 साै किमी एनएच, 500 किमी राज्यमार्ग की सड़कें बनी 3 सौ किमी जिला मार्ग और 3 हजार किमी ग्रामीण की सड़कें बनाई गई है। जबकि पिछले डेढ़ दशक में इसकी रफ्तार काफी अधिक था।

1 नवंबर 2000 को जब मध्य प्रदेश का पुनर्गठन हुआ और छ्त्तीसगढ़ मध्य प्रदेश से अलग होकर भारत का 26वां राज्य बना तो प्रदेश में सड़कों की हालत बेहद ही बदहाल थी। सड़कें गड्डों में तब्दील हो चुकी थी। अच्छी सड़कें विकास की धुरी होती है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष 2000-01 में महज 35 हजार किलोमीटर सड़कें थीं, लेकिन पिछले डेढ़ दशक में छत्तीसगढ़ का परिदृश्य पूरी तरह से बदल गया।

इसमें भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व अटल बिहारी वाजपेयी का भी बड़ा हाथ था।पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के समय देश को आधुनिक विकसित सड़कों से जोड़ने वाले युग का शुभारंभ हुआ। ग्रामीण अंचल में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़कों ने एक तरह से ग्रामों की अर्थ-व्यवस्था को पूरी तरह से बदल दिया। छत्तीसगढ़ में भी सड़कों के निर्माण, उनके सुदृढ़ीकरण पर राज्य सरकार ने विशेष ध्यान दिया। सड़कें विकास की संवाहक है। भाजपा सरकार द्वारा सड़कों के माध्यम से विकास के रथ को गांव-गांव तक पहुंचाने का काम व्यापक दूरदृष्टि के साथ लगातार किया गया। इसकी वजह से प्रदेश में सड़कों की लंबाई 35 हजार से 36 हजार किमी पहुंच गई थी। 2000-01 में लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत सड़काें की कुल लंबाई 35 हजार 388 किमी थी। जिसमें 1827 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच), 2073 किमी राज्य मार्ग, 3094 किमी मुख्य जिला मार्ग, 28 हजार 392 किमी ग्रामीण सड़क थे। बीजेपी ने पहले पांच साल के शासनकाल में इसे एनएच 2227 किमी, राज्य मार्ग 3213 किमी, जिला मार्ग 4814 और ग्रामीण सड़कों को 25811 किमी तक पहुंचाया। फिर लगातार 2007 से 2016 तक प्रदेश में सड़कों की कुल लंबाई 32 हजार 843 किमी पहुंचाया। जिनमें 3073 किमी एनएच, 4462 राज्यमार्ग, 11258 किमी जिला मार्ग और 14050 किमी ग्रामीण सड़कों का जाल बिछाया। 2018 में छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन हुआ और सरकार कांग्रेस की आयी। वर्तमान में प्रदेश में सड़कों की स्थिति की बात करें तो कुल सड़कों की लंबाई 34765 किमी है। जिनमें 3526 किमी एनएच, 4137 किमी राज्य मार्ग, 11580 जिला मार्ग, 15522 किमी ग्रामीण सड़कें हैं। मतलब पिछले पांच सालों की बात करें तो केवल एनएच सड़कों का काम हुआ। 500 किमी राज्यमार्ग की सड़कें बनी 3 सौ किमी जिला मार्ग और 3 हजार किमी ग्रामीण की सड़कें बनाई गई है। बता दें कि राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने का काम केंद्र सरकार का होता है। राज्य सरकार राज्य और ग्रामीण सड़कें बनवाती है। ग्रामीण सड़कें भी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के जरिए केंद्र से ही पैसा मिलता है। बावजूद इसके पिछले पांच सालों में सड़कों को लेकर कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं हुआ।

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महापौर ढेबर को रायपुर दक्षिण से टिकट देने की मांग, हजारों की तादात में सड़क पर बैठे समर्थक https://samacharpacheesa.com/?p=8182 Fri, 20 Oct 2023 01:07:22 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=8182

छत्तीसगढ़ में चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद से राजनितिक हलचल तेज हो गई है। भाजपा ने 86 सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। तो वहीँ कांग्रेस ने 83 सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है।

वहीँ नामों के ऐलान के बाद से ही दोनों ही पार्टियों में विरोध भी देखने को मिल रहा है, रायपुर दक्षिण से महंत राम सुंदर दास टिकट मिला है, जिसके बाद से महापौर एजाज ढेबर को रायपुर दक्षिण से टिकट नहीं मिलने पर उनके समर्थकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है, हजारों की संख्या में समर्थक सुभाष स्टेडियम में एकत्रित हुए है।

उसके बाद समर्थक आकाशवाणी चौक में सड़क पर बैठकर विरोध जता रहे है और महापौर ढेबर को रायपुर दक्षिण से टिकट देने की मांग को लेकर अड़े हुए है।

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वादे करें, मगर निभाएँ भी ! https://samacharpacheesa.com/?p=8170 Tue, 17 Oct 2023 06:47:48 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=8170 विधानसभा चुनाव का समय है। पाँच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं। हर दल अपने-अपने तरीके से मतदाताओं को लुभाने के लिए वादे कर रहा है। करना भी चाहिए। वादों में कोई बुराई नहीं, लेकिन वादों के पीछे जो इरादे हैं, उस पर सवाल उठाते रहते हैं । हमने देखा है कि राजनीतिक दल के लोग हाथ में गंगाजल लेकर भी झूठी कसम खा लेते हैं । वादे करते हैं कि हम ऐसा करेंगे, वैसा करेंगे, मगर करते नहीं। बहुत पहले मैंने एक गज़़ल कही थी। इसके दो शेर हैं,
होठों पर मुस्कान हृदय में गहरा छल लेकर
लोग मिला करते हैं हमसे एक सुनहरा कल लेकर आश्वासन की अर्थी लादे घूम रही जनता
धोखेबाज कसम खा रहे गंगाजल लेकर ।
चार दशक पहले लिखी गई ये पंक्तियां राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में आज भी खरी उतरने के लिए पर्याप्त हैं। पता नहीं हमारे राजनीतिक दल वादे करने के पहले उन वादों पर गहन अध्ययन क्यों नहीं करते हैं । उनको यह विचार करना चाहिए कि हम जो वादे कर रहे हैं, वे वादे क्या सरकार बनने के बाद हम पूर्ण कर सकेंगे? क्या हम उन वादों को पूरा करने के लिए उतने वित्तीय संसाधन जुटा सकेंगे? लेकिन ऐसा होता नहीं है ।चुनाव के समय घोषणा-पत्र में ऐसे-ऐसे वादे कर दिए जाते हैं, जिन्हें देखकर लगता है, अब हमारा प्रदेश स्वर्ग में तब्दील हो जाएगा। लेकिन चुनाव जीतने के बाद बड़े-बड़े वादे करने वाले दल जब शासन करने लगते हैं तो अपने वादों को, अपनी घोषणाओं को बिल्कुल राजा दुष्यंत की तरह भूल जाते हैं । वही राजा दुष्यंत जो अपनी प्रेयसी शकुंतला को भूल गए थे। बहुत बाद में उन्हें सब कुछ याद आया। हमारे नेताओं को भी सब कुछ उस समय याद आता है, जब सत्ता से बाहर हो जाते हैं। और बाहर इसलिए होते हैं क्योंकि जनता उनके झूठे वादों से नाराज हो जाती है। इसलिए राजनीतिक दलों को बहुत सोच-समझकर वादे करने चाहिए। इस मामले में मुझे छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी की बात बहुत पसंद आती है । जब वह जीवित थे,तो उन्होंने कांग्रेस से अलग हो कर अपनी नई पार्टी बनाई थी छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस। चुनाव लड़ते वक्त उन्होंने जो वादे किए थे, उन चुनावी वादों को स्टांप पेपर में हलफनामे के रूप में प्रस्तुत किया था। इसका मतलब यह था कि अगर मैं कोई वादा पूरा नहीं करता, तो जनता मुझ पर कानूनी कार्रवाई कर सकती है। होना यही चाहिए। हर दल को कानूनी हलफनामे के साथ अपना घोषणा-पत्र पेश करना चाहिए ताकि जनता को उनकी वादा खिलाफी के विरुद्ध है कानूनी कार्रवाई का अधिकार मिल सके। वादाखिलाफी के विरुद्ध उस पार्टी के मुखिया को दोषी ठहरना चाहिए । सभी राजनीतिक दलों को हिम्मत के साथ अपना कानूनी हलफनामा प्रस्तुत करना ही चाहिए, ताकि जनता को भरोसा हो सके कि उनके वादे पूरे होंगे । मतदाता हर दल के घोषणा पत्र को ध्यान से देखे और अपने विवेक से, जिसे चुनना हो उसे चुने। ऐसे कानूनी घोषणा-पत्र पर हर विजयी दल गंभीरतापूर्वक संज्ञान लेगा और जो वादे किए हैं, उन्हें पूरा करने की कोशिश करेगा। उसे यह फिल्मी गीत ध्यान रखना चाहिए, जो वादा किया है निभाना पड़ेगा। अभी तो जनता बेचारी यही गीत गाने पर मजबूर होती है, वादे पर तेरे मारा गया बंदा ये सीधा-साधा /वाद तेरा वादा। चुनाव जीतने के बाद यह बहाना बिल्कुल नहीं चलेगा कि हम ऐसा नहीं कर सकते। जैसा छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने किया। चुनाव के पहले वादा किया था कि हम शराबबंदी लागू करेंगे। फिर चुनाव जीतने के बाद उसने कहा कि हम इसे धीरे-धीरे लागू करेंगे और धीरे-धीरे करते पाँच साल बीत गए ।यह अपने आप में बड़ी वादाखिलाफी है । इसलिए अब समय आ गया है कि कोई भी राजनीतिक दल अगर अपने वादे से मुकरता है तो उसके मुखिया पर कानूनी कार्रवाई पर विचार होना चाहिए ।और यह विचार राष्ट्रीय स्तर पर फैलाने की जरूरत है, ताकि राजनीतिक दल अपने वादों को हल्के से न लें । दल अपने वादे चना-मुर्रे की तरह बांटने की कोशिश करते हैं कि हम आएंगे तो ऐसा कर देंगे, वैसा कर देंगे। यह मुफ्त में देंगे, वो मुफ्त में देंगे। लेकिन लोकतंत्र में लोक को ठगने की कोशिश करने वाले तंत्र पर अंकुश लगाना बहुत जरूरी है। और यह अंकुश कानून के द्वारा ही लगाया जा सकता है।

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छग-मप्र के उम्मीदवारों का एलान https://samacharpacheesa.com/?p=7841 Fri, 18 Aug 2023 06:52:29 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7841 मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। मध्य प्रदेश की 39 और छत्तीसगढ़ की 21 विधानसभा सीटों पर पार्टी ने प्रत्याशी घोषित कर दिए गए है। केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के एक दिन बाद ही सूची जारी कर भाजपा ने इन विधानसभा चुनाव में बढ़त बनाने की कोशिश की है। पार्टी ने उन सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए हैं जहां कांग्रेस के कद्दावर नेताओं का कब्जा है। इसमें भी ज्यादातर वो सीटें हैं, जहां भाजपा लगातार दो या तीन बार चुनाव हार रही है। ऐसा पहली बार हुआ है कि भाजपा ने चुनाव की घोषणा से पहले ही उम्मीदवारों का एलान किया है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की ये सभी वो सीटें हैं जहां वर्तमान में कांग्रेस का कब्जा है। आंतरिक सर्वे में भी इन सीटों पर पार्टी की स्थिति ठीक नहीं पाई गई थी। पार्टी की कोशिश है कि उम्मीदवारों के नामों का एलान पहले करने से उन्हें तैयारी करने का मौका मिलेगा। इससे इन सीटों पर जीतने की संभावना बढ़ सकती है। कांग्रेस के गढ़ कहे जाने वाली इन सीटों को भाजपा ने आकांक्षी सीट नाम दिया है। मध्य प्रदेश की पहली सूची में 2018 में चुनाव हारे 14 चेहरे को फिर से मौका दिया गया है। इनमें चार मंत्री ललिता यादव, लालसिंह आर्य, ओम प्रकाश धुर्वे और नाना भाऊ मोहोड़ शामिल है। एमपी की पहली सूची में सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर एक पूर्व विधायक रणवीर जाटव का टिकट कट गया है। जाटव 2018 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते थे। उपचुनाव में वे भाजपा से चुनाव लड़े थे। लेकिन वे हार गए थे। छत्तीसगढ़ की 21 सीटों में 10 सीटें अनुसूचित जनजाति की है। एक सीट अनुसूचित जाति वर्ग को दी गई है। पाटन सीट से सांसद विजय सिंह बघेल को मैदान में उतारा गया है। इस सीट से प्रदेश के सीएम भूपेश बघेल विधायक है। दोनों नेताओं के बीच भतीजे-काका का रिश्ता है। पार्टी ने अपनी पहली सूची में पांच महिला उम्मीदवारों को मौका दिया है। मध्य प्रदेश में कुल 103 आकांक्षी सीटें हैं जहां पिछली बार बीजेपी चुनाव हार गई थी। इसके अलावा 22 ऐसी सीटें हैं, जिस पर पार्टी का जीत का मार्जिन एक हजार से कम था। जबकि छत्तीसगढ़ की 25 आकांक्षी सीट है। जहां कांग्रेस की स्थिति मजबूत है। इन सीटों पर हर बार भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ता है। चर्चा में पार्टी के वरिष्ठ नेता कहा कि, इन हारी हुई सीटों को जीतने के लिए भाजपा ने फरवरी माह से रणनीति बनाना शुरु कर दिया था। संगठन ने इन सीटों पर हारे हुए बूथों को जीतने से लेकर प्रत्याशियों के चयन की एक्सरसाइज पूरे छह माह तक की। फिर इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई। इसमें क्षेत्रीय और जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार चयन किया गया। दोनों राज्यों के संगठनों ने यह अपनी अपनी रिपोर्ट बुधवार को केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में रखी थी। इसके बाद यह पहली सूची गुरुवार को जारी की गई।
आकांक्षी सीटों पर जीत के लिए ये है प्लान
दोनों राज्यों में कांग्रेस के प्रभाव वाली सीटों को जीतने के लिए बीजेपी गुजरात फॉर्मूला यानी हर बूथ पर 51 फीसदी वोट शेयर प्राप्त करने और उत्तर प्रदेश के फॉर्मूले और योजनाओं के जरिए जनता से कनेक्ट होने पर काम कर रही है, जिससे इन सीटों पर बीजेपी को जीत मिल सके। जिस तरीके से साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने अमेठी में राहुल गांधी को हराया था। उसी तर्ज पर अब मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की आकांक्षी सीटों पर बीजेपी कुछ कांग्रेस के दिग्गजों को हराने की रणनीति पर काम कर रही है। इन सीटों पर बीजेपी कई दिग्गज नेता उतारकर कांग्रेस को टक्कर देने के लिए माहौल तैयार करेगी। साथ ही, कांग्रेस नेताओं ने विकास के लिए क्या काम किए हैं, इस तरह के विषय पर स्पेशल कैंपेन चलाएगी।

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इधर वसुंधरा और उधर पायलट दरकिनार https://samacharpacheesa.com/?p=7773 Thu, 10 Aug 2023 06:36:25 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7773 वसुंधरा राजे प्रतीक्षा में हैं और सचिन पायलट शांत। दोनों धुरंधर, दोनों का जनाधार और दोनों ही दमदार। राजस्थान में चुनावी बिसात बिछ गई है, लेकिन फिर भी दोनों अपने अपने दलों में दरकिनार। विधानसभा चुनाव सर पर हैं और सबकी नजर इन्हीं दोनों नेताओं पर है। कांग्रेस में पायलट के रणनीतिक मौन के मायने तलाशे जा रहे हैं, और बीजेपी में राजे की राजनीतिक उम्मीदों के अवसान पर मंथन चल रहा है। जैसा कि साफ दिख रहा है, राजस्थान का विधानसभा चुनाव मोदी बनाम गहलोत होता जा रहा है, और बीजेपी में सभी नेताओं को भरोसा है कि उनकी सरकार हर हाल में बन जाएगी। शायद, इसीलिए बीजेपी की सबसे बड़ी नेता वसुंधरा राजे को कहीं कोई बहुत भाव मिलता नहीं लग रहा, तो कांग्रेस में भी पायलट के पलटवार करते करते तलवार को म्यान में धर देने के बाद लगभग दो महीने से मौन धारण करने से राजनीति में कई तरह की नई संभावनाओं की सुगबुगाहट होने लगी है। बीजेपी में वसुंधरा की अतिरिक्त सक्रियता और कांग्रेस में पायलट की परेशान कर देनेवाली निष्क्रियता राजस्थान की राजनीति को हैरान कर रही है। आलम यह है कि दोनों को अपनी अपनी पार्टियों में कोई खास महत्व नहीं मिल रहा। गहलोत को लग रहा है कि वे चुनाव जीत रहे हैं। इसके विपरीत, कांग्रेस में ही उनका विरोधी खेमा, पायलट समर्थक अपने ही मुख्यमंत्री गहलोत के हर दांव को खोखला बताते हुए पायलट की अगुवाई में चुनाव न होने के कारण कांग्रेस की बहुत बुरी हार का दावा कर रहा है। खुद पायलट भी निष्क्रिय बैठे हैं और आखिर कर क्या कर रहे हैं, कोई नहीं जानता। उधर, बीजेपी के लिए यह केवल विधानसभा का चुनाव नहीं, बल्कि अप्रैल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव का पूर्वाभ्यास भी है। फिलहाल राजस्थान की 25 में से 24 लोकसभा सीटें बीजेपी के खाते में हैं, और एक सीट उसके गठबंधन में हनुमान बेनीवाल ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी से जीती थी। इनके अलावा, राजस्थान में लगभग 7 से 8 प्रतिशत राजपूत वोटों पर कब्जा करने के लिए बीजेपी में विपक्ष के नेता राजेंद्र राठौड़, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और सांसद दीया कुमारी के अलावा कुछ और राजपूत नेता हैं। लेकिन राजस्थान की जनता इनमें से किसी को गहलोत या वसुंधरा की बराबरी का नेता मानती नहीं। इधर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व और उसके इशारे पर प्रदेश नेतृत्व वसुंधरा राजे को किनारे करने में लगे हुए हैं। हाल ही में कांग्रेस सरकार के खिलाफ राज्य स्तरीय विरोध प्रदर्शन हुआ, तो उसके प्रचार अभियान में भी वसुंधरा राजे पोस्टर, बैनर और होर्डिंग्स से भी गायब कर दी गईं। माना कि वसुंधरा राजे राजस्थान में बीजेपी की सबसे बड़ी नेता हैं, लेकिन पार्टी आलाकमान को उनकी स्वच्छंदता कतई पसंद नहीं और वसुंधरा को आलाकमान का अंकुश स्वीकार्य नहीं। फिर लगता है कि दोनों ही झुकने को तैयार नहीं।

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छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए बसपा ने नौ उम्मीदवारों की सूची जारी की https://samacharpacheesa.com/?p=7761 Wed, 09 Aug 2023 09:17:46 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7761 रायपुर। मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने आगामी छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए दो मौजूदा विधायकों समेत नौ उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की है। पार्टी के एक पदाधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। छत्तीसगढ़ में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य में 2018 से कांग्रेस का शासन है। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत पोयाम ने बताया कि बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के निर्देश पर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए नौ उम्मीदवारों की सूची मंगलवार देर रात जारी की गई, जिसमें एक महिला विधायक समेत दो मौजूदा विधायक शामिल हैं।
पोयाम ने बताया कि वर्तमान विधायक केशव प्रसाद चंद्रा जो जैजैपुर (सक्ती जिला) और इंदु बंजारे जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित पामगढ़ (जांजगीर-चांपा जिला) विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं, उन्हें उनके संबंधित क्षेत्रों से चुनाव मैदान में उतारा गया है। सूची के अनुसार वरिष्ठ नेता दाऊराम रत्नाकर (मस्तूरी सीट-अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित), ओमप्रकाश बाचपेयी (नवागढ़- अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित), राधेश्याम सूर्यवंशी (जांजगीर-चांपा), डॉक्टर विनोद शर्मा (अकलतरा), श्याम टंडन (बिलाईगढ़- अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित), रामकुमार सूर्यवंशी (बेलतरा) और आनंद तिग्गा (सामरी-अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित) को पार्टी ने चुनाव मैदान में उतारने का फैसला किया है।
2018 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था। पिछले चुनाव में बसपा ने 4.27 प्रतिशत वोट प्राप्त किया था तथा दो सीटें- जैजैपुर और पामगढ़ में जीत हासिल की थी, जबकि उसके गठबंधन सहयोगी जेसीसी (जे) को 7.6 प्रतिशत वोट मिले थे। पार्टी ने पांच सीटें हासिल की थीं। इस बार के चुनाव में इनमें से किसी भी दल ने अब तक गठबंधन की घोषणा नहीं की है।

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छत्तीसगढ़ में सिरिवेला प्रसाद कांग्रेस के चुनाव पर्यवेक्षक, हफ्तेभर में बदली जिम्मेदारी https://samacharpacheesa.com/?p=7721 Mon, 07 Aug 2023 10:17:34 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7721 नई दिल्ली/रायपुर। रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बड़ा फैसला लिया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने मीनाक्षी नटराजन और सिरिवेला प्रसाद की जिम्मेदारियों में बदलाव किया है। मीनाक्षी नटराजन को तेलंगाना और सिरिवेला प्रसाद को छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है।
एक हफ्ते में ही किया फेरबदल- पिछले हफ्ते ही नटराजन को छत्तीसगढ़ के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था। जबकि प्रसाद को तेलंगाना के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था। लेकिन एक हफ्ते के भीतर ही दोनों नेताओं की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ के लिए सीनियर ऑब्जर्वर प्रीतम सिंह को बनाया गया है।
कांग्रेस के स्क्रीनिंग कमिटी का ऐलान- छत्तीसगढ़ सहित 5 राज्यों में साल के अंत में विधानसभा चुनाव होना है। चुनाव को लेकर सभी पार्टियां खुद को मजबूत करने में जुट गई है। 2 अगस्त को छत्तीसगढ़ के लिए कांग्रेस ने स्क्रीनिंग कमिटी का ऐलान किया था। अजय माकन को छत्तीसगढ़ स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरमैन बनाया गया।यह स्क्रीनिंग कमेटी प्रत्याशी चयन में अहम भूमिका निभाएंगी।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में जुलाई माह से ही बड़े स्तर पर सत्ता और संगठन में बदलाव देखा गया। जिसमें सबसे बड़ा बदलाव पीसीसी प्रमुख की जिम्मेदारी में बदलाव रहा। मोहन मरकाम को भूपेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। वहीं मरकाम की जगह पर बस्तर सांसद दीपक बैज को छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी का प्रमुख नियुक्त किया गया था। साथ ही सभी लोकसभा संसदीय क्षेत्रवार प्रभारियों की नियुक्ति की गई थी।

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टिकट के लिए नाम तय करने कांग्रेस ने बनायी स्क्रीनिंग कमेटी, जिम्मा अजय माकन को https://samacharpacheesa.com/?p=7669 Thu, 03 Aug 2023 09:06:19 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7669 रायपुर। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने विधानसभा चुनाव के लिए चुनावी राज्यों में स्क्रीनिंग कमेटी का ऐलान किया है। छत्तीसगढ़ के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय माकन को कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। डॉ. एल हनुमंथैया और नेटा डिसूजा को सदस्य बनाया गया। इसके अलावा छत्तीसगढ़ से पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, एआईसीसी महासचिव और प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा., उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और एआईसीसी के सचिवों को पदेन सदस्य बनाया गया है।
जैसे कि माालूम हो कांग्रेस जिन राज्यों में चुनाव होता है। उन सभी राज्यों में कांग्रेस एक स्क्रीनिंग कमेटी तैयार करती है। इस कमेटी की प्रत्याशियों के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कौन प्रत्याशई होगा, कौन नहीं, ये स्क्रीनिंग कमेटी ही तय करती है एआईसीसी ने जिस स्क्रीनिंग कमेटी की घोषणा की है। वहीं कमेटी हर विधानसभा क्षेत्र से 3-3 नामों की सूची सर्वे,परफॉर्मेंस और अन्य समीकरणों के आधार पर तैयार करके एआईसीसी यानी केन्द्रीय चुनाव समिति के पास भेजेगी और फिर अंतिम सूची तैयार की जाएगी। स्क्रीनिंग कमेटी में ज्यादातर प्रदेश के बाहर के ही नेताओं को जगह दी जाती है, ताकि फैसला लेने में पारदर्शिता रहे और किसी भी व्यक्ति विशेष के प्रभाव में फैसले ना लिए जाए।

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कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में लोकसभावार ऑब्जर्वर किया नियुक्त https://samacharpacheesa.com/?p=7643 Tue, 01 Aug 2023 10:14:45 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7643 रायपुर। छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने चुनावी तैयारी तेज कर दी है। छत्तीसगढ़ में प्रदेश कांग्रेस ऑब्जर्वर की नियुक्ति के बाद राज्य के सभी 11 लोकसभा सीटों में भी ऑब्जर्वर नियुक्त किये गए हैं। ये सभी ऑब्जर्वर अपने अपने लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विधानसभा सीटों में चुनाव की तैयारियों, चुनाव प्रचार, विस सीट पर पार्टी की स्थिति पर नजर रखेंगे। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के जनरल सेक्रेटरी केसी वेणुगोपाल द्वारा इसके आदेश जारी किये गये हैं।
प्रदेश में लोकसभावार ऑब्जर्वर की सूची-
पेंटारामा तलांडी- बस्तर। डॉ. अजय उपाध्याय- बिलासपुर। इन्द्रदत्त लखनपाल- विधायक दुर्ग। सुरेश कुमार- विधायक जांजगीर-चांपा। डॉ. नामदेव उसेंडी- कांकेरद्ध। जयशंकर पाठक- कोरबा। मनमोहन कटोच- महासमुंद। जयवीर वाल्मिकी- विधायक रायगढ़। बाबा सिद्दीकी- रायपुर। चन्द्र शेखर-विधायक राजनंदगांव। अमित कुमार टुन्ना- सरगुजा।
सीनियर ऑब्जर्वर और ऑब्जर्वर की नियुक्ति- 11 लोकसभा सीटों में ऑब्जर्वर की नियुक्ति से एक दिन पहले ही कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए सीनियर ऑब्जर्वर और ऑब्जर्वर की नियुक्ति की थी। इसमें छत्तीसगढ़ के लिए प्रीतम सिंह सीनियर ऑब्जर्वर और मीनाक्षी नटराजन को ऑब्जर्वर बनाया गया है।
प्रदेश कांग्रेस में बदलाव का दौरा जारी- छत्तीसगढ़ कांग्रेस में बड़े स्तर पर बदलाव की प्रकिया जारी है। सबसे पहले प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव को उप मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया। जिसके बाद बस्तर सांसद दीपक बैज को छत्तीसगढ़ पीसीसी चीफ की जिम्मेदारी सौपी गई। वहीं पूर्व पीसीसी चीफ मोहन मरकाम को भूपेश सरकार में बतौर कैबिनेट मंत्री शामिल किया गया। कुछ दिनों पहले ही केसी वेणुगोपाल ने 22 सदस्यीय प्रदेश चुनाव समिति की घोषणा भी की थी। जिसमें पीसीसी चीफ दीपक बैज को चुनाव समिति का चेयरमैन बनाया गया है। दीपक बैज पूरे चुनाव की जिम्मेदारी संभालेंगे। चुनाव समिति में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत, उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव सहित आठ मंत्रियों को शामिल किया गया है।

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खरगे 11 अगस्त को कर सकते हैं जांजगीर-चांपा से चुनावी आगाज https://samacharpacheesa.com/?p=7610 Mon, 31 Jul 2023 09:11:02 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7610 रायपुर। कांग्रेस के विधानसभा चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत जांजगीर-चांपा से हो सकती है। 11 अगस्त को मिनीमाता की पुण्यतिथि के अवसर पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे छत्तीसगढ़ आ सकते हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा के साथ बैठक में कहा था कि राष्ट्रीय अध्यक्ष खरगे और राहुल गांधी की सभा कराई जाए।
इसके बाद यह संकेत मिल रहा है कि खरगे जांजगीर आ सकते हैं। विधानसभा चुनाव की दृष्टि से अविभाजित जांजगीर जिले की छह में सिर्फ दो सीट पर कांग्रेस विधायक हैं। बाकी दो सीट पर भाजपा और दो सीट पर बसपा विधायक हैं। ऐसे में कांग्रेस खरगे से चुनाव प्रचार अभियान की जांजगीर से शुरुआत करके अनुसूचित जाति बहुल विधानसभा क्षेत्र के वोटरों को साधने की फिराक में है।
प्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए दस विधानसभा सीट आरक्षित है। वर्तमान में सात पर कांग्रेस, दो पर भाजपा और एक सीट पर बसपा के विधायक हैं। कांग्रेस ने एससी वोटरों को साधने के लिए हर ब्लाक में जैतखाम बनाने की घोषणा की है। इसके साथ ही एससी वर्ग के लिए कई योजनाएं भी शुरू की है। उधर, एससी वोटरों को साधने के लिए भाजपा भी अनुसूचित जाति मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक छत्तीसगढ़ में करने जा रही है। इसमें मोर्चा के शीर्ष 80 नेता शामिल होंगे।

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