विपक्ष – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Tue, 08 Aug 2023 06:44:02 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 विपक्ष के नेताओं को खुद पर ही विश्वास नजर नहीं आ रहा है? https://samacharpacheesa.com/?p=7733 Tue, 08 Aug 2023 06:44:01 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7733 अब सबकी निगाहें 8 अगस्त को चर्चा की शुरुआत होने से ज्यादा इस बात पर टिकी होंगी कि सरकार के विरोध में सदन के अंदर तीखे भाषण देने वाले ये विपक्षी दल 10 अगस्त को सदन में अपने ही द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग करवा कर अपनी ताकत दिखाएंगे या नहीं ? केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ लोकसभा में विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में मंगलवार से चर्चा शुरू होनी है। मंगलवार यानी 8 अगस्त से अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत होगी। मंगलवार, बुधवार और गुरुवार यानी 10 अगस्त तक लोकसभा में सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी। 10 अगस्त को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अविश्वास प्रस्ताव पर हुई चर्चा का लोकसभा में जवाब देंगे। प्रधानमंत्री के जवाब के बाद अगर विपक्षी दल की तरफ से डिवीजन की मांग की जाएगी तो सदन में वोटिंग भी उसी दिन होगी। लोकसभा के सदस्य संख्या के आधार पर देखा जाए तो सरकार को विपक्ष द्वारा लाए गए इस अविश्वास प्रस्ताव के कारण फिलहाल कोई खतरा बिल्कुल नजर नहीं आ रहा है। लोकसभा में बीजेपी के पास अपने दम पर बहुमत है। भाजपा के पास 301 सांसद हैं जो विपक्षी दलों द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को गिराने के लिए काफी हैं। अगर इसमें एनडीए के सहयोगी दलों के सांसदों का आंकड़ा जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा 331 को भी पार कर जाता है। जैसा कि आप जानते हैं कि बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस- इन दोनों राजनीतिक दलों ने भी विपक्षी द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ मोदी सरकार का साथ देने का फैसला किया है। लोकसभा में बीजू जनता दल के फिलहाल 12 सांसद हैं वहीं वाईएसआर कांग्रेस के सांसदों की संख्या 22 है। बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस के सांसदों की संख्या मिलाने के बाद सरकार के समर्थक सांसदों का आंकड़ा बढ़कर 365 तक पहुंच जाता है और यह विपक्षी दलों की गोलबंदी की तुलना में कहीं ज्यादा है। ऐसे में पहला सवाल तो यही खड़ा हो रहा है की आंकड़ा पक्ष में नहीं होने के बावजूद विपक्षी दल मोदी सरकार के खिलाफ यह अविश्वास प्रस्ताव क्यों लेकर आए हैं ? विपक्षी दल एकजुट होकर आईएनडीआईए नाम से गठबंधन तो बना चुके हैं लेकिन नंबर के आधार पर जब इस गठबंधन की ताकत को दिखाने का असली समय आया तो विपक्षी दलों ने वोटिंग करवाने की बजाय वॉकआउट करना ज्यादा बेहतर समझा। दिल्ली सरकार के अधिकार को लेकर लोक सभा में बिल पास होने के दौरान विपक्षी दल चाहते तो डिवीजऩ की मांग कर सदन में वोटिंग करवा कर अपनी ताकत दिखा सकते थे लेकिन उन्होंने उस समय ऐसा नहीं किया।

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मोदी के बयान के लिए विपक्ष का हंगामा https://samacharpacheesa.com/?p=7630 Tue, 01 Aug 2023 07:20:36 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7630 मणिपुर में बीते कुछ समय से मैतेई और कुकी समुदाय के बीच एक भीषण हिंसक संघर्ष चल रहा है। यहाँ से हाल ही में दो महिलाओं के साथ यौन उत्पीडऩ का एक वीडियो हमारे सामने आया, जिसने पूरे देश का सिर शर्म से झुका दिया। इस वीडियो ने हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी व्यथित कर दिया और उन्होंने इस घटना को 140 करोड़ भारतवासियों को शर्मसार करने वाला बताया। साथ ही, यह भी आश्वस्त किया कि इस घटना के आरोपियों को किसी भी सूरत में बख़्शा नहीं जाएगा। आज यह एक जगजाहिर तथ्य है कि प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में मणिपुर, असम से लेकर त्रिपुरा जैसे पूर्वोत्तर क्षेत्र के सभी राज्यों ने विकास, शांति और समृद्धि के नये आयामों को हासिल किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने केन्द्रीय सत्ता में आते ही ‘एक्ट ईस्टÓ नीति को हमारे सामने लाया, जिसके माध्यम से उनका प्रयास भारत-प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ बेहतर राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को विकसित करना है। उनके इस प्रयास से कभी शेष भारत से बिल्कुल कटा हुआ महसूस करने वाले पूर्वोत्तर के राज्य आज हमारे विकास के ‘प्रवेश द्वारÓ और ‘अष्ट लक्ष्मीÓ के रूप में अपनी एक विशेष पहचान स्थापित कर चुके हैं। लेकिन, मणिपुर हिंसा जैसी घटनाओं से पूर्वोत्तर क्षेत्र में आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक विकास को लेकर हो रहे सभी प्रयासों पर निश्चित रूप से बेहद नकारात्मक असर पड़ेगा और ऐसी घटनाएं दोबारा न हो हमें यह सुनिश्चित करना होगा। हालांकि, इतने संवेदनशील मुद्दे को लेकर कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों ने जिस प्रकार का रवैया दिखाया है। वह वास्तव में बेहद दु:खद और खतरनाक है। उन्हें यह समझना होगा कि यह एक राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ मुद्दा है और इस पर किसी प्रकार की राजनीति कतई नहीं होनी चाहिए। विपक्ष के नेता प्रधानमंत्री मोदी पर लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं, कि उन्होंने आखऱि ढाई महीने से चल रहे मणिपुर हिंसा को लेकर कुछ कहा क्यों नहीं? वे क्षेत्र का दौरा करने क्यों नहीं गये? विपक्ष के ये सवाल वास्तव में उनकी अज्ञानता और राष्ट्र के प्रति उनकी अनिष्ठा को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह मणिपुर की स्थिति पर लगातार नजऱ बनाए हुए हैं और उनके दिशानिर्देशों पर शांति स्थापित करने के तमाम प्रयास किये जा रहे हैं। और, सवाल जहाँ तक प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी का है, तो आलोचक जरा स्वयं सोचें कि ऐसे समय में, जब भारत जी-20 की अध्यक्षता कर रहा है और हमारे सामने कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौते हैं, तो ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी के एक बयान से भारत को लेकर दुनिया में क्या संदेश जाएगा? विपक्ष को यह यथाशीघ्र समझने की आवश्यकता है कि यह पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है और इससे निपटने में हम सक्षम हैं। उन्हें दुनिया के सामने अपने ही देश को छोटा दिखाने का प्रयास बंद कर देना चाहिए।

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अविश्वास प्रस्ताव पर भाजपा का ईरानी दांव https://samacharpacheesa.com/?p=7557 Thu, 27 Jul 2023 06:53:00 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7557 मणिपुर हिंसा को लेकर लोकसभा में सरकार के खिलाफ विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने को मंजूरी मिल गई है। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों खेमे इसे अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं। यूं भी कह सकते हैं कि एनडीए और इंडिया, दोनों को इसमें अपना सियासी फायदा नजर आ रहा है। अविश्वास प्रस्ताव पर भाजपा को मोदी के ईरानी दांव पर भरोसा है, तो वहीं विपक्ष इस हार के सौदे में अपनी जीत मानकर चल रहा है। मणिपुर हिंसा पर, विपक्षी दल लंबे समय से प्रधानमंत्री द्वारा बयान देने की मांग कर रहे थे। सत्ता पक्ष ने प्रधानमंत्री की जगह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बयान दिलाने की बात कही, जिसके लिए विपक्ष तैयार नहीं हुआ। अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले कांग्रेस पार्टी के सांसद गौरव गोगोई कहते हैं, देखिये, ये हार जीत का सवाल नहीं है। यह विपक्ष का संवैधानिक दायित्व है। ये इंसाफ की लड़ाई है। विपक्षी दलों का गठबंधन इंडिया चाहता है लोकतंत्र जीवित रहे। दरअसल, मणिपुर को लेकर अविश्वास प्रस्ताव की स्क्रिप्ट कई दिनों से लिखी जा रही थी। सत्ताधारी पार्टी यह बात जानती थी कि विपक्ष, सदन में प्रधानमंत्री से बयान दिलवाने की जिद से पीछे नहीं हटेगा। मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में मणिपुर को लेकर बहुत कुछ क्लीयर कर दिया था। उसमें भाजपा सांसदों को यह संदेश दिया गया था कि वे मणिपुर हिंसा पर विपक्ष को करारा जवाब दें। उसी बैठक में पीएम की तरफ से ऐसा इशारा भी हुआ था कि जल्द ही विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है। भाजपा सांसदों से कहा गया कि अपने अपने क्षेत्रों में लोगों को मणिपुर का सच बताएं। बैठक में मौजूद हरियाणा के एक सांसद का कहना था। अविश्वास प्रस्ताव से भाजपा को डरने की कोई जरूरत नहीं है। पहलवानी में कई तरह के दांव होते हैं। उसमें से एक ईरानी दांव भी होता है, जिसमें बड़े कद काठी वाले पहलवान को फायदा मिलता है। वजह, बड़े कद वाला पहलवान, हल्के पहलवान को आसानी से उठा सकता है। अगर सामने वाले पहलवान का वजन भी कुछ कम है, तो उसे उठाकर पीठ के बल पटका जा सकता है। इससे बड़े कद वाला पहलवान जीत जाता है। पीएम मोदी के साथ भी कुछ वैसा ही है। अविश्वास प्रस्ताव पर हार से विपक्ष के दो मकसद पूरे होंगे। एक तो इंडिया की एकता का टेस्ट होगा और दूसरा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मणिपुर हिंसा पर बोलने के लिए बाध्य करने के बाद लोगों को बताया जाएगा कि ये विपक्षी दलों की जीत है। अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा में पीएम मोदी भाग लेते हैं तो इसे विपक्षी खेमा अपने लिए एक मजबूत कदम के तौर पर देख रहा है। दूसरा, विपक्षी दलों को यह शिकायत रही है कि उन्हें सदन में बोलने का पर्याप्त समय नहीं मिलता।

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विधानसभा में विपक्ष द्वारा प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से अस्वीकृत https://samacharpacheesa.com/?p=7478 Sat, 22 Jul 2023 07:36:29 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7478 रायपुर।  छत्तीसगढ़ विधानसभा में राज्य सरकार के खिलाफ विपक्ष की ओर से प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से अस्वीकृत कर दिया गया। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने अविश्वास प्रस्ताव के विरोध में चर्चा के दौरान जवाब में कहा कि जब हमारी सरकार बनी तो हमने ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़Ó की बात की और इसे साकार करने की दिशा में हमारी सरकार निरंतर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में कहा कि विपक्ष द्वारा प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव के मुद्दों में कोई तथ्य नहीं है। प्रजातंत्र में विपक्ष का अधिकार होता है कि वे अविश्वास करे। सत्ता पक्ष के पास भी मौका होता है कि अपनी बात रखें। इन्होंने 109 आरोप लगाए पर कोई तथ्य नहीं दिए। पहले जब अविश्वास प्रस्ताव आता था तब नक्सली समस्या पर पहले बात होती थी। इस बार सदस्यों ने नही की। ये हमारी उपलब्धि है।
आप इंद्रावती के उस पार गए क्या ये संभव था। ये इसलिए हुआ कि इस समस्या पर काम हुआ। अभी भेंट मुलाकात में बस्तर में रात रुका, सभी से मिला। जो सबसे बड़ा कमेंट मिला जिसने मेरे दिल को छू लिया। जैन समाज के लोगों से मैंने पूछा कि इन चार सालों में क्या फर्क आया। उन्होंने कहा कि रिश्ता करने में बस्तर में अब दिक्कत नहीं होती है। आसानी से लोग रिश्ता दे देते हैं क्योंकि बस्तर बदल गया है। पहले बस्तर में सड़कें काट दी जाती थी आज सड़के काटी नहीं जाती, ये परिवर्तन बस्तर में देखने को मिला है। पिछली सरकार ने जो स्कूल बंद करा दिए थे, उसे हमने आरम्भ कर दिया। राशन पहुंचाना भी पहले टेढ़ी खीर थी। अब कितना आसान हो गया है। ये बदलाव आया है। जब हमारी सरकार बनी तो हमने गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ की बात की। उन महापुरुषों को, कलाकारों और राजनीतिक दलों के लोगों को नमन करता हूँ जिन्होंने छत्तीसगढ़ निर्माण में अपना योगदान दिया। परिवर्तन केवल सत्ता के लिए नहीं होना चाहिए। यह लोगों के जीवन मे होना चाहिए इसलिए परिवर्तन की मशाल लेकर हमारे नेता परिवर्तन यात्रा में निकले थे। आज हमने किसानों की जिंदगी बदली है। बस्तर, सरगुजा में परिवर्तन हुआ है। महिलाओं के जीवन मे बदलाव आया है। जब बच्चे फर्राटेदार इंग्लिश में बोलते हैं तब संतोष होता है। आरडी तिवारी स्कूल में पहले 56 बच्चे पढ़ रहे थे। अब हजार बच्चे पढ़ रहे हैं। अब ऐसे स्कूल नहीं चल रहे जो गुणवत्ता नही देते, लोग स्वामी आत्मानंद स्कूल में अपने बच्चों को प्रवेश दिला रहे हैं। बस्तर के बच्चों को शिक्षित कर दीजिए, सुपोषित कर दीजिए, वे अपनी जिंदगी स्वयं संवार लेंगे। 20 हजार करोड़ रुपये की इनपुट सब्सिडी हमने किसानों को दी। हमारे प्रदेश का किसान आज बहुत खुशहाल है।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि अब मैं डीएमएफ के बारे में जानकारी देता हूं। मुख्यमंत्री बनने के बाद मैंने मीटिंग ली। सभी खदान आदिवासी अंचल में थी। मैंने पूछा कि आदिवासियों के जीवन मे क्या परिवर्तन आया। उन्होंने कहा कि नहीं आया। हमने कहा कि यह होना चाहिए। हमने कहा कि इससे स्कूल बनाओ, सड़क बनाओ। डीएमएफ का तभी सही उपयोग होगा। मलेरिया में हमने बड़ा काम किया और यह काफी घट गया। उल्टी दस्त का एक भी प्रश्न विधानसभा में बस्तर से नहीं लगा। बस्तर में आज डॉक्टर है, नर्स हैं। ब्लड बैंक बनवाये गए हैं।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ का संकल्प लेकर जब हम निकले, कितनी बाधा आई। कोरोना आया। सबकी मदद से हमने अपना संकल्प पूरा किया। सबने इसके लिए सहयोग किया। पांच साल में आये परिवर्तन के बारे में उन्होंने बताया। आज जिले 33 हो गए। तहसील भी बढ़ गए। प्रति व्यक्ति आय बढ़ गई। धान खरीदी 56 लाख से 110 लाख मीट्रिक टन हो गई। रकबा भी बढ़ गया। धान खरीदी केंद्र 2400 हो गए। राजीव गांधी न्याय योजना, भूमिहीन ग्रामीण श्रमिक योजना, गोधन न्याय योजना हमने आरम्भ की। 10 हजार से अधिक गौठान बनाये। उर्जिकृत पंप 4 लाख हो गए। एकल बत्ती कनेक्शन 15 लाख से 17 लाख हो गए। आपके समय तो 105 करोड रुपए का ऋण माफ हुआ था, हमने तो 9500 सौ करोड़ का ऋण माफ किया है। केसीसी आपके समय में 14 लाख दिए गए। वह अब बढ़कर 21 लाख हो गए हैं। 245 करोड़ का गोबर खरीदा और 291 करोड़ की सामग्री बेचा, यह घाटे का सौदा नहीं है। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि यह कबीर की भूमि है। बाबा गुरु घासीदास की भूमि है। शांति का टापू है। अपनी संस्कृति के लिए हम काम कर रहे हैं।

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विधानसभा का मानसून सत्र आज से, 3 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट लाएगी सरकार https://samacharpacheesa.com/?p=7392 Tue, 18 Jul 2023 07:51:27 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7392 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र आज से शुरू हो रहा है। पांचवीं विधानसभा का आखिरी सत्र 18 से 21 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान विपक्ष सत्तापक्ष से सवाल कर उन्हें घेरने का काम करेगा। इस सत्र में राज्य सरकार 3 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट लाएगी। सदन के पहले पहले दिन बीजेपी विधायक विद्यारतन भसीन और अविभाजित मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री भानुप्रताप सिंह को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद सदन की कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित रहेगी। इसके बाद तीन दिन हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही चलेगी।
सत्र के अंतिम दिन सरकार को विपक्ष के अविश्वास का सामना करना पड़ेगा। इस बार का सत्र काफी हंगामेदार होने वाला है। क्योंकि महालेखाकार की रिपोर्ट पेश किए जाने पर हंगामा होना तय माना जा रहा है। दूसरी ओर टीएस सिंहदेव के डिप्टी सीएम और पूर्व पीसीसी चीफ मोहन मरकाम के मंत्री बनाए जाने से सदन में बैठक व्यवस्था में भी बदलाव देखने को मिलेगी। टीएस बाबा सीएम भूपेश बघेल के नजदीक ही बैठ सकते हैं। वहीं मरकाम को विधायक वाली बैठक व्यवस्था से अलग हटकर मंत्रियों के बीच दिखेंगे। बता दें कि पूर्व मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम के इस्तीफे के बाद उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है, लेकिन उनकी बैठक व्यवस्था में भी बदलाव देखने को मिलेगा। वहीं बीजेपी विधायक विद्यारतन भसीन के निधन के बाद विपक्ष की बैठक व्यवस्था में भी बदलाव दिखेगा।
550 सवालों का सामना करेगा कैबिनेट
इस सत्र में विधायकों ने 550 सवाल लगाए हैं। इन सवालों का सामना कैबिनेट को करना पड़ेगा। वहीं सरकार की ओर से 2022-23 के लिए महालेखाकार की रिपोर्ट पेश किए जाने की जानकारी है। बात विधेयकों की करें, तो छत्तीसगढ़ मंडी शुल्क संशोधन, निजी विश्वविद्यालय स्थापना, भारतीय स्टाम्प अधिनियम संशोधन विधेयक और विधानसभा सदस्यता संशोधन विधेयक शामिल हैं। इसमें लाभ के दो पद संबंधी एक संशोधन का प्रस्ताव भी है, जिसमें राज्य योजना मंडल की जगह आयोग प्रतिस्थापित किया जाना है।
अविश्वास प्रस्ताव लाएगी बीजेपी
सत्र में विपक्ष की ओर से सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की सूचना दी जाएगी। इस पर 21 जुलाई को आधी रात तक चर्चा चलने के संकेत हैं। पांचवीं विधानसभा के कार्यकाल में दूसरी बार ये प्रस्ताव लाया जाएगी। हालांकि बीजेपी के 13 विधायकों के होने से इसमें विपक्ष की हार तय मानी जा रही है, फिर भी बीजेपी राज्य सरकार की कमियों और घोटालों के आरोपों को लेकर घेरने का काम करेगी।

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विधानसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष में तकरार https://samacharpacheesa.com/?p=6537 Sat, 04 Mar 2023 05:52:59 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6537 किसी शायर ने खूब लिखा है –
‘दुश्मनी जमकर करो, लेकिन यह गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएं तो शर्मिंदा ना हो।Ó
यह बात संसदीय लोकतंत्र में बहुत फीट बैठती है। संसद या विधानसभा के भीतर हो या बाहर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोंक-झोंक होती है विपक्ष की जिम्मेदारी होती है कि वह सत्तापक्ष को घेरे और उसे नियंत्रित करें। छत्तीसगढ़ विधानसभा में भी राज्य बनने के बाद से सत्तापक्ष और विपक्ष एक दूसरे के खिलाफ सदन के भीतर बोलते हैं लेकिन सदन के बाहर वे अच्छे मित्र जैसा व्यवहार भी करते हैं। ऐसा व्यवहार होना भी चाहिए क्योंकि विधायक एक जनप्रतिनिधि के तौर पर जनता की समस्याओं, देशहित और जनकल्याण के विषय को सदन में उठाता है, वह सरकार के खिलाफ में मुखर होता है, तो मुख्यमंत्री और मंत्री के प्रति दुराग्रह नहीं होता है, वह केवल जनता की भावना से सदन को अवगत कराता है। यही भारतीय लोकतंत्र की खूबी भी है। लोकसभा या राज्यसभा में कांग्रेस पार्टी के नेता जमकर हमला करते हंैं लेकिन जब कोई दावत हो तो एक ही टेबल पर बैठकर हंसते-खिलखिलाते भोजन भी करते हैं। यह व्यवहार जब तक बना है, लोकतांत्रिक परंपरा मजबूत है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में पिछले कुछ सत्रों के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच व्यवहार में जो तल्खी नजर आ रही है, वह स्वस्थ नजर नहीं आती। बजट सत्र विपक्ष के विधायकों के खिलाफ सत्तापक्ष के मंत्री और विधायक जिस प्रकार टीका-टिप्पणी करते हैं वह उचित नहीं है। चूंकि चुनाव के पहले यह आखिरी लंबा सत्र इसलिए मुख्य विपक्ष दल भारतीय जनता पार्टी सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोडऩा चाहती, वहीं कांग्रेस पार्टी भी विपक्ष के इन दांवपेंच का मुकाबल जोर-शोर से करती है। इसके बावजूद सदन में पिछली बार हाथापाई की नौबत आ गई, अभी विपक्ष गर्भगृह में जाकर नारेबाजी करने लगा तो उस पर टिप्पणियां की गई। इसके बाद जो हंगामा देखने को मिल रहा है, उससे छत्तीसगढ़ की संसदीय परंपरा प्रभावित हो रही है।

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प्रदेश में बढ़ता अपराध https://samacharpacheesa.com/?p=5554 Sat, 31 Dec 2022 06:05:55 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5554 जब भी विपक्ष सत्ता पक्ष पर प्रदेश में बढ़ते अपराध को लेकर आरोप लगाता है तो सत्ता पक्ष उसे नकारता है और पिछले वर्षों के आंकड़े दिखाकर अपराध कम होने के दावा करता है। आंकड़े अपनी जगह है लेकिन समाचार पत्रों और अन्य माध्यमों से जो समाचार मिलते है उससे आम आदमी जब भयभीत होने लगे तो समझ लेना चाहिए कि अपराध का ग्राफ बढ़ रहा है। एक परिपाटी है कि साल के अंत आते-आते सभी जिला केंद्रों पर पुलिस विभाग अपराधिक आंकड़े जारी करता है। राजधानी रायपुर में 1 जनवरी से 30 नवम्बर तक के आंकड़े जारी किए गए। इस अवधि में राजधानी में ही 70 हत्याएं हुई है याने हर पांचवें दिन एक हत्या प्रदेश में हो रही है। यह हत्याएं आवेश में आकर होने वाली घटनाएं नहीं है बल्कि योजनाबद्ध तरीके से लूटपाट करने के लिए की जाने वाली हत्याएं है। इसी के साथ एक दूसरा महत्वपूर्ण आंकड़ा है हत्या के प्रयास। हत्या के प्रयास के 115 घटनाएं 11 महीनों में हुई, जबकि लूट की 98 घटनाएं इसी दौरान घटी है। यह 3 ऐसे अपराध है जो आम जनता को भयभीत करते है। किसी राज्य में कल्याण और विकास से भी पहले नागरिकों को सुरक्षा सरकार की प्रमुख जिम्मेदारी है। इसे मौलिक अधिकार प्राप्त है। कानून बनाकर अपराध को नहीं रोका जा सकता है। अपराध को रोकने के दो ही तरीके हो सकते है- एक पुलिस की सतर्कता और उसकी कठोरता इतनी हो कि अपराध करने से पहले व्यक्ति बार-बार सोचे और दूसरा तरीका यह हो सकता है कि समाज में ऐसे कारणों का पता लगाकर समाधान किए जाएं जो अपराध के लिए प्रेरित करते है। हाल-फिलहाल जो हत्या, लूट की वारदातें हो रही है उसके पीछे आपसी रंजिश और बेरोजगारी मुख्य कारण हो सकते है। किसी निजी कंपनी के आंकड़े को आधार मानकर सरकार भले दावा करे कि प्रदेश में 0.1 प्रतिशत बेरोजगारी है लेकिन गांव से लेकर शहर तक गली चौराहों पर बेरोजगार युवकों की भीड़ नजर आती है। पढ़े-लिखे युवा जब व्हाट्एप और फेसबुक पर दूसरों की प्रगति देखते है तो उन्हें मानसिक पीड़ा होती है। धीरे-धीरे उनके मन में समाज और व्यवस्था के प्रति आक्रोश पनपता है। भारत के पास युवाओं की फौज है, इनकी ऊर्जा को देश और समाज के लिए उपयोगी बनाई जाए तो यह वर्ग चमत्कार कर सकता है। जो योग्य है वे अपने बलबूते अपना लक्ष्य हासिल कर लेते है। समाज और व्यवस्था को उन पर विशेष ध्यान देना चाहिए जिनमें शिक्षा और कौशल का अभाव है। यही वर्ग अपराध की ओर कदम बढ़ाता है।

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प्रधानमंत्री मोदी की मां के निधन पर सत्ता पक्ष, विपक्ष के नेताओं ने जताया शोक https://samacharpacheesa.com/?p=5538 Fri, 30 Dec 2022 08:05:50 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5538 लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां हीराबेन मोदी के निधन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भारतीय जनता पार्टी के तथा विपक्षी दलों के विभिन्न नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री के दुख के साथ स्वयं को संबद्ध करते हुए शुक्रवार को एक ट्वीट में कहा एक पुत्र के लिए माँ पूरी दुनिया होती है। माँ का निधन पुत्र के लिए असहनीय और अपूरणीय क्षति होती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पूज्य माता जी का निधन अत्यंत दुःखद है। प्रभु श्री राम दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करें। ॐ शांति!
समाजवादी पार्टी (सपा) ने भी अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट कर प्रधानमंत्री की माता के निधन पर दुख व्यक्त किया है। ट्वीट में कहा गया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माताजी श्रीमती हीराबेन मोदी जी का देहावसान, अत्यंत दुखद! ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें। शोक संतप्त परिवार के प्रति गहन संवेदना। भावभीनी श्रद्धांजलि! बहुजन समाजवादी पार्टी की मुखिया मायावती ने ट्वीट के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी की माता के निधन पर संवेदना प्रकट की। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की माता जी श्रीमती हीराबेन के निधन की खबर अति-दुःखद। उनके पूरे परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदना। कुदरत उन्हें एवं उनके सभी चाहने वालों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे।
कांग्रेस महासचिव और पार्टी की उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी ट्वीट किया। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की माता जी के निधन का दुखद समाचार मिला। ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को श्रीचरणों में स्थान दें एवं मोदी जी और उनके परिवार के समस्त सदस्यों को पीड़ा के इन क्षणों में साहस दें। ॐ शांति! गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मां हीराबेन का शुक्रवार को तड़के अहमदाबाद के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 99 वर्ष की थीं। हीराबेन को स्वास्थ्य संबंधी कुछ परेशानियों के चलते बुधवार को सुबह अहमदाबाद के ‘यू एन मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर’ में भर्ती कराया गया था।
अस्पताल ने अपने बुलेटिन में बताया, ‘‘ हीराबेन मोदी का यू एन मेहता हार्ट हॉस्पिटल में इलाज के दौरान 30 दिसंबर 2012 को तड़के करीब साढ़े तीन बजे निधन हो गया। ’’ प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी मां को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, ‘‘शानदार शताब्दी का ईश्वर चरणों में विराम… मां में मैंने हमेशा उस त्रिमूर्ति की अनुभूति की है, जिसमें एक तपस्वी की यात्रा, निष्काम कर्मयोगी का प्रतीक और मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध जीवन समाहित रहा है।

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तवांग झड़प पर राज्यसभा से विपक्ष का वॉकआउट, कहा- चीन ने किया भारतीय जमीन पर कब्जा, चर्चा की मांग https://samacharpacheesa.com/?p=5299 Mon, 19 Dec 2022 08:33:44 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5299 नईदिल्ली। तवांग में भारत और चीनी सैनिकों के बीच झड़प को लेकर विपक्ष सड़क से लेकर संसद तक सरकार हमलावर है. अरुणाचल प्रदेश के तवांग में चीनी अतिक्रमण और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर वस्तुस्थिति के बारे में कार्यस्थगन नोटिस के जरिए चर्चा कराने की मांग को लेकर विपक्ष ने राज्यसभा से वॉकआउट किया.
चीनी झड़प पर चर्चा को आसन ने किया खारिज, विपक्ष का हंगामा
विपक्ष की ओर से राज्यसभा में लगातार भारत-चीनी सैनिकों के बीच झड़प और भारतीय जमीन पर कब्जा को लेकर चर्चा की मांग होती रही. हालांकि विपक्ष की मांग आसन द्वारा खारिज कर दिया गया. जिसके बाद विपक्षी दल के सदस्य विरोध करते हुए सदन से बाहर चले गये. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, चीन हमारी जमीन पर कब्जा कर रहा है. इस मुद्दे पर हम चर्चा नहीं करेंगे तो और क्या चर्चा करेंगे? हम सदन में इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं.
सभापति जगदीप धनखड़ ने विपक्ष की मांग को नियम के अनुरूप नहीं बताया
सुबह उच्च सदन की कार्यवाही शुरू होने पर सभापति जगदीप धनखड़ ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए. उन्होंने कहा कि नौ सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए नियम 267 के तहत नोटिस दिए हैं. उन्होंने कहा कि इनमें से कोई भी नोटिस नियमों के अनुरूप नहीं है. धनखड़ ने कहा कि उन्होंने आठ दिसंबर को सदस्यों से कहा था कि कामकाज के निलंबन के लिए वह अपने नोटिस में आवश्यक नियम का उल्लेख करें लेकिन किसी भी नोटिस में नियम का कोई उल्लेख नहीं है. उन्होंने कहा कि इसके बावजूद 13, 15 और 16 दिसंबर को इसी प्रकार के नोटिस के जरिए कार्यस्थगन के तहत चर्चा कराने की मांग को लेकर हंगामा किया गया जिससे करदाताओं के पैसे और सदन के कीमती समय की बर्बादी हुई.
समाजवादी पार्टी के जावेद अली खान ने व्यवस्था पर उठाया सवाल
समाजवादी पार्टी के जावेद अली खान ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि पिछले सत्र में उनके द्वारा पूछे गए 10 प्रश्न हटा दिए गए और इस बार भी बगैर किसी कारण के तीन प्रश्न हटाए गए हैं. उन्होंने सभापति से इस मामले में संरक्षण का अनुरोध किया.

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तवांग में हुई झड़प को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार से मांगा स्पष्टीकरण, सदन से किया वॉकआउट https://samacharpacheesa.com/?p=5181 Tue, 13 Dec 2022 09:15:11 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5181 नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश के तवांग क्षेत्र में हुई भारत-चीन की झड़प को लेकर विपक्ष ने मंगलवार को केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने सदन से वॉक आउट भी किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने कहा, हमें सदन के नेता और राज्यसभा के उपसभापति ने कहा कि हमें स्पष्टीकरण का एक मौका दिया जाएगा लेकिन उन्होंने नहीं दिया और हमारी बात सुनने को तैयार नहीं थे। यह देश के लिए अच्छा नहीं है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने कहा, जब उन्होंने हमें स्पष्टीकरण नहीं दिया तो विपक्षी दलों के सभी नेताओं ने वॉकआउट करने का फैसला किया। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, हम अपने देश की एकता और अखंडता के लिए एक साथ खड़े हैं, हम अपने सैनिकों के साथ हैं। खडग़े ने कहा, उन्होंने (रक्षा मंत्री) अपना बयान पढ़ा और बाहर चले गए। वह किसी स्पष्टीकरण या चर्चा के लिए तैयार नहीं थे। इसका (राजीव गांधी फाउंडेशन एफसीआरए लाइसेंस रद्द करने का मुद्दा) कोई संबंध नहीं है।
वहीं इस मुद्दे पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) पार्टी के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सीधे प्रधानमंत्री मोदी पर सवाल किया। उन्होंने कहा, पीएम राजनीतिक नेतृत्व दिखाने में नाकाम रहे हैं। झड़प 9 दिसंबर को हुई थी और आप आज बयान दे रहे हैं। अगर मीडिया ने रिपोर्ट नहीं की होती, तो आप नहीं बोलते। सभी पक्षों को संघर्ष स्थल पर ले जाएं। एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा, पीएम चीन का नाम लेने से डर रहे हैं, उनकी सरकार चीन के बारे में बोलने से डर रही है।
इससे पहले तवांग क्षेत्र में हुए भारतीय सेना और पीएलए के बीच झड़प को लेकर केंद्र सरकार की तरफ से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में भारतीय सैनिकों के साथ आमना-सामना के दौरान चीन द्वारा भारत की एक इंच जमीन पर भी कब्जा नहीं किया गया है। भारतीय सैनिकों ने झड़प के दौरान अपार बहादुरी दिखाई और कुछ ही देर में चीनी सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब दिया।

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