विवाद – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Tue, 04 Apr 2023 08:16:18 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 विश्वविद्यालय के नए कुलपति https://samacharpacheesa.com/?p=6704 Tue, 04 Apr 2023 08:16:17 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6704 देश में उच्च शिक्षा के लिए विश्वविद्यालयों के स्थापना के बाद उसके प्रमुख को कुलपति शब्द से संबोधित किया जाने लगा। विश्वविद्यालय में कुलपति का अधिकार सर्वोच्च होता है, यहां तक कि प्रशासनिक अमला भी बिना कुलपति की अनुमति के विश्वविद्यालय परिसर में नहीं जा सकता था। समय के साथ परिस्थितियां बदली है और कुलपति पद, शब्द, और शुसोभित करने वालों व्यक्तियों के स्तर में गिरावट आई है। शायद उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता में गिरावट का यह एक मूल कारण है। भारतीय सेवा के अधिकारियों को अपने पद का दंभ होता है। वहीं विश्वविद्यालय के कुलपति को अपने प्राध्यापक होने का एक अभिमान भी होता है इसलिए दोनों अधिकारियों के बीच सामंजस्य कम ही बैठ पाता है। एक समय था यह विश्वविद्यालय के कुलपति का स्थान नौकरशाही में सचिव के पद से ऊंचा होता था। छत्तीसगढ़ में परिवर्तन करके अब विश्वविद्यालय के कुलपति के स्थान को उप सचिव के बराबर कर दिया गया है। दूसरी ओर छत्तीसगढ़ में कुलपति के नियुक्ति को लेकर पिछले चार वर्षों से विवाद चल रहा है। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है और राज्यपाल मोदी सरकार के द्वारा नियुक्त किए जाते है इसलिए नियुक्ति में आपसी सामंजस्य का अभाव देखा गया है। जिस विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति राज्य सरकार के मनमुताबिक न हो तो विश्वविद्यालय के काम-काज भी प्रभावित किए जाते है। अजीब सोच है शीर्ष लोगों के विवाद के चलते शैक्षणिक संस्था की प्रतिष्ठा धूमिल होती है और छात्रों का नुकसान होता है। राजधानी के सबसे पुराने पं. रविशंकर विश्वविद्यालय में डा. सच्चिदानंद शुक्ल नए कुलपति बनाए गए है। वे उत्तरप्रदेश के अयोध्या के है इसलिए स्थानीय कुलपति की मांग को लेकर उनकी नियुक्ति पर विवाद हुआ था। डॉ. शुक्ला ने पदभार ग्रहण कर लिया है और अपने भावी योजनाओं के बारे में भी बताया है। ऐसा होता है जब कोई नया कुलपति पद ग्रहण करतेे है तो बाते बड़ी-बड़ी की जाती है लेकिन विश्वविद्यालय के राजनीति और समस्याओ में ऐसे उलझतें है कि सारी योजनाएं फुर्र हो जाती है। डॉ. शुक्ला ने भी विश्वविद्यालय की छबी सुधारने और अकादमी कार्य को बेहतर करने अपनी भावनाएं व्यक्त की है। लेकिन उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में एक म्यूजियम बनाने की बात कही है जहां छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति को सहेजा जाएगा। वैसे तो यह कार्य खैरागढ़ स्थित इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय को करना चाहिए। दूसरी बात यह कार्य करने के लिए राजधानी में संस्कृति विभाग है और पुरखौती मुक्तांगन में म्यूजियम बनाकर ऐसा किया जा रहा है। रविशंकर विश्वविद्यालय में पढऩे वाले विद्यार्थी छत्तीसगढ़ के है जो अपनी संस्कृति से परिचित है। नए कुलपति डॉ. शुक्ला का ध्यान अकादमिक उन्नति करनें में होना चाहिए। पर क्या करें प्रदेश सरकार जब छत्तीसगढ़ी संस्कृति को बढ़ावा दे रही है तो कुलपति भला कहा पीछे रहने वाले।

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प्रदेश में आरक्षण पर गैरजरुरी विवाद https://samacharpacheesa.com/?p=5317 Tue, 20 Dec 2022 06:33:58 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5317 छत्तीसगढ़ में पिछले तीन महिनों से आरक्षण को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है। वैसे तो इसकी शुरुआत 2019 से हो गयी थी,जब भूपेश सरकार ने अन्य पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण का कोटा 27 प्रतिशत बढ़ाते हुए एक अध्यादेश जारी किया था। इस अध्यादेश को उच्च न्यायालय ने रद्द कर विस्तृत आंकड़ों सहित आरक्षण संबंधी कानून बनाने की बात कही थी। इधर सितम्बर महिने में 2011 से जारी अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 32 प्रतिशत आरक्षण सहित कुल 58 प्रतिशत आरक्षण के कोटे को उच्च न्यायाय ने खारिज कर दिया। इसके बाद दोष सरकार पर आ गया कि चूंकि मामले को न्यायालय में सही ढंग से प्रस्तुत नहीं किया गया इसलिए जनजाति वर्ग के लिए आरक्षण का प्रतिशत वापस 32 से कम होकर 20 प्रतिशत हो गया। प्रदेश भर में आंदोलन होने लगा। इससे परेशान प्रदेश सरकार ने विशेष अधिवेशन बुलाकर विधानसभा में एक विधेयक पारित किया और इस विधेयक अनुसूचित जनजाति वर्ग को 32 प्रतिशत का कोटा बहाल करते हुए पिछड़े वर्ग को भी 27 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया। इस कारण प्रदेश में कुल आरक्षण का प्रतिशत बढ़कर 76 प्रतिशत हो गया। विधेयक पारित होने के बाद भी आरक्षण को लेकर बहस खत्म नहीं हो रही। राज्यपाल ने इस विधेयक पर अभी हस्ताक्षर नहीं किए हैं और उन्होंने सरकार से कुछ सवाल भी पूछे हैं। आरक्षण को लेकर कांग्रेस पार्टी राज्यपाल पर भी राजनीति करने का आरोप लगाने लगी है। इन तमाम परिस्थिति के लिए अहम सवाल है यह है कि विधानसभा में पारित विधेयक का हश्र क्या होगा? अगर राज्यपाल विधेयक पर हस्ताक्षर कर भी देती है तो क्या यह मामला न्यायालय में नहीं जाएगा? और जब पूर्व में 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण को जब न्यायालय ने खारिज किया है तो फिर 76 प्रतिशत को अनुमति कैसे मिलेगी। यह सवाल महत्वपूर्ण है और इसलिए युवाओं की चिंता जायज है जो आरक्षण की बहस के चलते परेशान है। परेशान इसलिए है क्योंकि उन्हें शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। परेशान इसलिए है क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया थम गई है, नई भर्तियां नहीं हो रही है। एक अहम बात यह है कि जब संवैधानिक व्यवस्था में यह स्पष्ट है कि 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं किया जा सकता तो फिर सरकार न्यायालय में इसे कैसे स्थापित करेगी। कुल मिलाकर प्रदेश में आरक्षण को लेकर जो बहस चल रही है उसमें समाज के वंचित वर्ग को लाभ पहुंचाने की मंशा कम और चुनाव में लाभ लेने की मंशा अधिक दिखाई दे रही है।

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विवाद और चीन से आता फंड, अमित शाह ने कांग्रेस की दुखती रग पर रखा हाथ https://samacharpacheesa.com/?p=5178 Tue, 13 Dec 2022 09:12:47 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5178 नईदिल्ली। भारत-चीन के बीच तनाव का दौर जारी है। दोनों देशों के बीच 1962 में एक बार जंग हो चुकी है। वहीं 1965 और 1975 में भी दोनों देशों के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं। इन तारीख़ों के बाद एक बार फिर से अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में चीनी घुसपैठ के बाद दोनों देशों के बीच तनाव के हालात हैं। ऐसे वक्त में जब सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर चीन से मुकाबला करना चाहिए। लेकिन कांग्रेस पार्टी लगातार भारत की सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमलावर है। संसद का सत्र भी चल रहा है और विपक्ष की तरफ से चीनी घुसपैठ पर जबरदस्त हंगामा भी देखने को मिल रहा है। गृह मंत्री अमित शाह ने चीन के मुद्दे को लेकर एक बयान दिया जिसको लेकर हंगामा मच गया है। उन्होंने अपने बयान में राजीव गांधी फाउंडेशन का जिक्र किया है।
क्या कहा अमित शाह ने
गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में साफ किया कि भारत की 1 इंच भूमि पर भी कब्जा नहीं किया गया है। झड़प के वक्त भारतीय जवानों ने काफी वीरता दिखाई। कुछ ही समय में चीनी सैनिकों को वापस खदेड़ दिया। शाह ने आगे कहा कि चीन से 2005-2006 और 2006-2007 के बीच राजीव गांधी फाउंडेशन ने एक करोड़ 35 लाख रुपए लिए। फाउंडेशन का कहना है कि वह सामाजिक और रिसर्च वर्क के लिए पैसे देते थे, लेकिन इन पैसों का इस्तेमाल भारत-चीन संबंधों को मजबूत करने में किया गया। अगर कोई रिसर्च हुआ होता तो उसके रिपोर्ट दी गई होती।
राजीव गांधी फाउंडेशन क्या है
बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए 21 जून 1991 को सोनिया गांधी ने इस फाउंडेशन की नींव रखी थी। ये फाउंडेशन एजुकेशन, साइंस एंड टेक्नोलॉजी के प्रमोशन, शोषित (अंडरप्रिवलेज्ड) और दिव्यांगों के एम्पावरमेंट के लिए काम करता है। डोनेशन और इन्वेस्टमेंट पर मिलने वाले रिटर्न से इसका काम चलता है।
कांग्रेस को आ रहा चीनी दूतावास से फंड
भारतीय जनता पार्टी ने इसे पहले भी आरोप लगाया था कि पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की सरकार और भारत में चीनी दूतावास ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व वाले राजीव गांधी फाउंडेशन (आरजीएफ) को फंड किया है। सोनिया गांधी फाउंडेशन की अध्यक्ष हैं और इसके बोर्ड में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी शामिल हैं। राजीव गांधी फाउंडेशन की सालाना रिपोर्ट के अनुसार साल 2005-06 में राजीव गांधी फाउंडेशन को पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की सरकार और चीनी दूतावास से दो अलग-अलग दानकर्ताओं के रूप में डोनेशन प्राप्त हुआ था।

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