शराब – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Fri, 19 May 2023 08:22:32 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 असली शराब पीने से होने वाली मौतें https://samacharpacheesa.com/?p=6943 Fri, 19 May 2023 08:22:32 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6943 प्रदेश में शराब लगातार एक राजनीतिक विषय बना हुआ है, 2018 के पहले डॉ. रमन सरकार में शराब की समस्या पर विधानसभा में चर्चा होती थी। ऐसी रिपोर्ट आती रहीं जिसमें कहा गया छत्तीसगढ़ शराब पीने में अव्वल राज्य है। दूसरी ओर सरकार ने शराब की पूर्ण बंदी के स्थान पर आंशिक बंदी का रास्ता निकाला और पहले 500 की आबादी और उसके बाद 1000 की आबादी वाले गांवों में शराब की दुकानें बंद कर दी गई। इसका असर यह हुआ कि कोचिए गांव में जाकर शराब का अवैध कारोबार करने लगे। भारत माता वाहिनी का गठन किया गया, गुलाबी गैंग की महिलाओं ने शराबियों के खिलाफ हाथ में लाठी लेकर मोर्चा खोल दिया। कुल मिलाकर शराब की सामाजिक बुराई को देखते हुए इस पर अंकुश लगाने की मांग महिलाओं की ओर से आती रही क्योंकि वे ही इस नशे की सबसे ज्यादा भुक्तभोगी हैं। माहौल को देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणापत्र में पूर्ण शराबबंदी का वादा किया। सरकार बनी लेकिन चार साल के बाद शराबबंदी करने में सरकार हिचक रही है। एक तरफ एक समिति का गठन किया गया है जिसकी अब तक कोई रिपोर्ट नहीं मिल पाई है दूसरी ओर मुख्यमंत्री स्पष्ट यह कह रहे हैं कि प्रदेश में सरकार शराबबंदी नहीं करेगी। इसके लिए तर्क यह दिया जा रहा है कि शराबबंदी के बाद नशे के आदी नकली शराब पियेंगे और उनकी मौत होगी। इसका उदाहरण कोरोना काल में लॉकडाउन के समय शराब नहीं मिलने के कारण स्पिरिट या सेनेटाइजर पीने से हुई दो लोगों की मृत्यु को बताया जा रहा है। लेकिन शराब नहीं मिलने से कितने शराब के आदी इस नशे से दूर हो गए थे, इसकी कोई रिपोर्ट सरकार के पास नहीं होगी? इससे इतर जो अपराध और दुर्घटनाओं में मौतें असली शराब पीने के कारण हो रही है, क्या सरकार के पास उसका कोई रिकॉर्ड है? समाचार पत्र में शायद ही कोई दिन ऐसा हो जब शराब पीने के लिए पैसे के लिए, शराब पीने के बाद नशे में लड़ाई होने के कारण हत्याओं की खबरें नहीं छपती। एक बेटे ने अपने माता-पिता और दादी की हत्या शराब की लेट के चलते कर दी। क्या यह मौतें शराब के कारण नहीं हो रही हैं। सरकार पर 2000 करोड़ रूपए के शराब घोटाले के आरोप लग रहे हैं, ये आरोप राजनीतिक नहीं बल्कि प्रवर्तन निदेशालय ईडी की छानबीन के बाद कोर्ट में हलफनामा देते हुए हुए लगाए गए हैं। इस बात पर सरकार पीठ थपथपा सकती है कि शराब से आबकारी राजस्व बढ़ रहा है। लेकिन इस कमाई के पीछे कितने परिवार का दर्द छुपा है, उसका आंकलन कौन करेगा? सरकार को चाहिए कि शराबबंदी न सही, शराब के कारोबार, बिक्री की मात्रा को नियंत्रित तो करे।

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राजनीति में शराब घोटाले की धमक https://samacharpacheesa.com/?p=6850 Tue, 09 May 2023 06:09:53 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6850 भारतीय जनता पार्टी पिछले एक साल से सत्तारुढ़ कांग्रेस सरकार पर ईडी और सीडी के आरोपों में फंसी होने के आरोप लगा रही है। इधर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पार्टी के प्रवक्ता प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के द्वारा पिछले दो वर्षों से की जा रही कार्यवाही को राजनीति से प्रेरित बता रहे है। एक बात समझने की है कि ईडी जांच करने वाली संस्था नहीं है। सीबीआई और आयकर विभाग छापा मारकर आर्थिक एवं अन्य अपराधों की जांच करते है और इस दौरान संबंधित दस्तावेज जप्त करते है। इन जप्त दस्तावेजों में विदेशों में धन के अवैध लेन-देन की कोई बात हो तब ईडी अपना काम शुरु करता है। प्रदेश में कोयला के परिवहन में अवैध कमाई और उस कमाई की अफरा-तफरी को लेकर ईडी ने उच्च अधिकारियों, कारोबारियों सहित बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार कर रखा है। अब पिछले कुछ दिनों से शराब के अवैध कारोबार से जुड़े लोगों को गिरफ्तार कर रहा है। इस सिलसिले में रायपुर नगर निगम के महापौर के भाई अनवर ढेबर को जब ईडी ने गिरफ्तार कर न्यायालय में 14 दिन की रिमांड मांगने के लिए जो आवेदन प्रस्तुत किया और उसके बाद विज्ञप्ति जारी की उससे शराब के अवैध धंधों से 2 हजार करोड़़ रुपए से अधिक की गड़बड़ी का दावा किया गया है। ईडी ने बकायदा किस प्रकार तीन तरह से शराब के कारोबार में अवैध वसूली और कारोबार का सिंडीकेट बनाकर पैसे की लूट की गई, इसकी जानकारी विज्ञप्ति में दी गई है। इस प्रकरण के बाद राजनीति गरमा गई है। भाजपा सरकार पर हमलावर है तो सरकार 2 हजार करोड़ रुपए के घोटाले को तथ्यहीन बता रही है। वैसे तो कांग्रेस की ओर से जो तर्क दिए जा रहे है वे ज्यादा गंभीर नहीं लगते। लेकिन इस बात के कयास लगने शुरु गए है कि ईडी की कार्यवाही से जो घोटाले सामने आ रहे है उनका चुनाव पर क्या असर होगा? एक बात देखने में आती है कि चुनाव में विकास और भ्रष्टाचार तब तक कोई मुद्दा नहीं बनते जब तक वह जनता के जीवन को प्रभावित न करें। इसलिए कोयला मामले में ईडी का कार्यवाही का उतना असर नहीं होगा लेकिन शराब के घोटाले को लेकर जो तथ्य सामने आए है वे चुनाव को अवश्य प्रभावित करेंगे। वह इसलिए क्योंकि मामला शराब से जुड़ा हुआ है और प्रदेश में शराबबंदी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में शराबबंदी का वादा किया था लेकिन अब तक शराबबंदी नहीं की जा सकी। सरकार यह निर्णय नहीं लेने के पीछे तर्क दे रही है कि अचानक शराबबंदी से लोगों को तकलीफ हो सकती है। इधर जो तथ्य ईडी के द्वारा सामने रखे गए है उससे लगता है कि जो कमाई शराब के कारोबार से हो रही थी उसे बनाए रखने के लिए शराबबंदी का निर्णय नहीं लिया गया। दूसरी ओर बिना आबकारी कर पटाए शराब के अवैध कारोबार से भी सैकड़ों करोड़ रुपए कमाए गए। इससे शराब पीने वाले और शराबबंदी की मांग करने वाले दोनों पक्ष नाराज होंगे। यह नाराजगी अगले चुनाव में कांग्रेस सरकार पर भारी पड़ सकती है।

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ईडी की कार्रवाई से हड़कंप https://samacharpacheesa.com/?p=6677 Thu, 30 Mar 2023 05:45:01 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6677 छत्तीसगढ़ में कोयला, शराब, धान के कारोबार में अफरा तफरी में संलिप्त होने की आशंका के मद्देनजर प्रवर्तन निदेशालय (ईड़ी) लगातार छापामारी कर रहा है। यह सिलसिला प्रति टन 25 रु. की दर से कोयले के कारोबार में अवैध वसूली करने के आरोपियों पर कार्रवाई करने से शुरु हुआ था। घोटाले का एक सिरा का क्या मिला, उस सिरे को लेकर ईडी पूरे प्रदेश में अधिकारी, राजनेता, कारोबारी, जमीन दलाल, यहां तक छोटे-छोटे कर्मचारियों तक पहुंच चुका है। अभी तक एक आईएएस अधिकारी समीर बिश्नोई मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ रहीं सौम्य चौरसिया सहित आधा दर्जन से अधिक जेलों में बंद हैं। जमानत के आवेदन तो लगाए जा रहे हैं लेकिन जमानत मिल नहीं रही है। ऐसा सुनने में आ रहा है कि जो सबूत ईडी ने इकट्ठे किए हैं, उनका परीक्षण गिरफ्तार संदेहियों से किया जा रहा है और इससे ही नए-नए नाम और ठिकाने निकलकर सामने आ रहे हैं। विधानसभा चुनाव को अब मात्र 6 महीने रह गए हैं। ऐसी स्थिति में ईडी की निरंतर कार्रवाई से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है। ऐसी लग रहा है कि मानो एक फाइल के खुलते ही दूसरी फाईलों के राज पर्दाफाश हो रहे हैं। कोयले के गोरखधंधे से शुरु हुई कार्रवाई अब शराब के कारोबार तक पहुंच चुकी हैं। संभव है इस बीच धान की मिलिंग और चावल को लेकर भी गड़बड़ी की शिकायत हो रही है। संभव है ईडी की जांच उन क्षेत्रों तक भी पहुंच जाए। प्रदेश में एक और महत्वपूर्ण मामला है, जो हाईप्रोफाइल भी है और उसकी चर्चा बहुत अधिक नहीं हो रही है वह मामला महादेव एप से जुड़ा हुआ है। चर्चा तो यह भी है कि ईडी की जांच महादेव एप तक भी पहुंच सकती है। रोचक बात यह है कि ईडी जिन-जिन लोगों कार्रवाई कर रही है, उनमें हर तबके से जुड़े लोग शामिल हैं। इसी बात को लेकर मुख्यमंत्री ने टिप्पणी भी की है कि वैसे तो कांग्रेस पार्टी शुरु से ही ईडी की कार्रवाई को भाजपा द्वारा प्रायोजित बात रही है, साथ ही कांग्रेस पार्टी के स्थानीय नेता ईडी जहां छापा मारता है वहां विरोध प्रदर्शन भी कर रहे हैं। इसका मतलब है कि कांग्रेस पार्टी ईडी के मुद्दे को चुनाव में मुद्दा बनाने का प्रयास कर रही है। सवाल यह है कि कांग्रेस अगर ईडी के छापों को मुद्दा बनाती है तो इससे चुनाव में फायदा होगा या नुकसान? यह बात तो स्पष्ट है कि ईडी जिन मामलों को उठा रहा है, उसमें गड़बडिय़ों के सबूत भी मिल रहे हैं। करोड़ों-अरबों रुपये की हेराफेरी की गई है। ठीक है कि भ्रष्टाचार करने वाले किसी पार्टी विशेष के लोग ही नहीं है इसलिए भाजपा के नेताओं पर ईडी की कार्रवाई नहीं होना संशय पैदा तो करता है, लेकिन जिनके खिलाफ कार्रवाई हो रही है क्या वे दूध के धुले हैं? जो भी है वह तो जांच के बाद न्यायालय में तय होगा।

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