शीतकालीन सत्र – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Wed, 04 Jan 2023 05:56:27 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 विधानसभा में कामकाज ठप https://samacharpacheesa.com/?p=5624 Wed, 04 Jan 2023 05:56:27 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5624 संसदीय लोकतंत्र में विधानसभा का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतकालीन सत्र दो हिस्सों में बंट गया जिसका पहला हिस्सा विशेष सत्र के रुप में 2 दिसम्बर को आहूत किया गया। एक लंबे अवकाश के बाद सोमवार 2 जनवरी से पुन: प्रारंभ हुआ। 1 माह पूर्व विधानसभा में आरक्षण का विधेयक पारित किया गया था जिस पर राज्यपाल की अनुमति नहीं मिल पायी है। इस मुद्दे पर सदन में जमकर हंगामा हो रहा है। पहले और दूसरे दिन बमुश्किल प्रश्नकाल ही संपन्न हो सका, जबकि विधानसभा की कार्य सूची में अनेक महत्वपूर्ण राजकीय कार्य का उल्लेख किया गया था। मंगलवार को 2 विधेयक सदन के पटल पर रखा जाना था जिसमें छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध विधेयक और अनाधिकृत विकास का नियमितीकरण का संशोधन विधेयक था। आरक्षण विषय पर हंगामा होने के कारण विधेयक प्रस्तुत नहीं किए जा सके। ध्यानाकर्षण पर भी चर्चा नहीं हो सकी। प्रश्नोत्तरी शांतिपूर्ण आज संपन्न हुआ। विधानसभा में विभिन्न विषयों पर चर्चा की जाती। राज्य में अनेक ऐसे मुद्दे है जिस पर सदन में चर्चा होनी चाहिए। धर्मान्तरण को लेकर बस्तर जल रहा है। अगर इस पर फौरी तौर पर ध्यान नहीं दिया गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। इस विषय पर अगर विधानसभा में चर्चा हो तो इसके सुखद परिणाम निकल सकते है। वैसे तो विपक्ष ने प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर स्थगन लेकर आए थे लेकिन उसकी अनुमति विधानसभा अध्यक्ष द्वारा नहीं दी गई। इस विषय पर अगर स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा हो जाती तो समस्या की महत्वपूर्ण बिन्दु सामने आती। स्थगन पर जब चर्चा अस्वीकृत कर दी गई तब भाजपा के सदस्य गर्भगृह में आकर स्वमेव निलंबित हो गए। इन सब हंगामे के बीच में दिनभर के लिए सभा की कार्रवाई स्थगित कर दी गई। स्थगित तो इसलिए भी हो गयी क्योंकि कांग्रेस पार्टी का जन अधिकार रैली का आयोजन राजधानी में किया गया था, जिसमें कांग्रेस पार्टी के मंत्रियों और विधायकों को शामिल होना था। इस प्रकार जो चर्चा विधानसभा के सदन में हो सकती है उसे सार्वजनिक तौर पर रैली के माध्यम से करना विधानसभा के प्रति कम होती आस्था को दर्शाता है। विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान भी बार-बार विधानसभा अध्यक्ष की ओर से यह हिदायत मंत्रियों को दी जा रही है कि वे तैयारी कर सदन में आए। इसका मतलब है कि मंत्री विधानसभा की कार्रवाई को लेकर गंभीर नहीं है। संसदीय लोकतंत्र के मंदिर के प्रति निर्वाचित प्रतिनिधियों की आस्था कम होगी तो यह लोकतंत्र को कमजोर करेगा।

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समय से पहले ही खत्म हुआ संसद का शीतकालीन सत्र https://samacharpacheesa.com/?p=5400 Fri, 23 Dec 2022 07:34:36 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5400 नईदिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया है। हालांकि, संसद का शीतकालीन सत्र पहले 29 दिसंबर तक प्रस्तावित था। लेकिन आज 23 दिसंबर शुक्रवार को ही संसद का शीतकालीन सत्र स्थगित कर दिया गया। दोनों सदनों में इस शीतकालीन सत्र के दौरान कई बड़े काम हुए हैं। हालांकि, हो-हल्ला की भी स्थिति उत्पन्न हुई थी। लोकसभा की बात करें तो इसकी कार्य उत्पादकता लगभग 97% रही। लोकसभा की 13 बैठकों में 68 घंटे 42 मिनट तक कामकाज हुआ है। वहीं, राज्यसभा में 102% कामकाज हुआ। अपने संबोधन में राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान उच्च सदन में 63 घंटे 20 मिनट का कामकाज निर्धारित हुआ था जबकि यह 64 घंटे 50 मिनट तक चला है। दोनों ही सदनों में महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा की गई और कई को पारित किया गया।
हालांकि, संसद के शीतकालीन सत्र में चीन के मुद्दे को लेकर विपक्ष जबरदस्त तरीके से सरकार पर हमलावर रहा। तवांग में 9 दिसंबर को चीन के साथ हुई थी। झड़प को लेकर विपक्ष लगातार चर्चा की मांग कर रहा था। हालांकि, चर्चा नहीं हो सकी। दूसरी ओर संसद के दोनों सदनों में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन के मुद्दे पर साफ तौर पर कहा था कि चीनी सेना एलएसी पर एकतरफा स्थिति को बदलने की कोशिश कर रही थी। भारतीय सेना ने उन्हें खदेड़ भेजा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने निचले सदन में कहा कि 17वीं लोकसभा का 10वां सत्र समाप्त हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सत्र में नव निर्वाचित सदस्य के रूप में समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव ने शपथ ली।
इस दौरान लोकसभा ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए 3.25 लाख करोड़ रुपये की अनुदान की अनुपूरक मांगों और 2019-20 के लिए अनुदान की अतिरिक्त मांगों को मंजूरी दी। इस पर 10 घंटे 53 मिनट चर्चा हुई। सत्र के दौरान 9 सरकारी विधेयक पेश किये गए और सात विधेयक को सदन ने पारित किया। इसके अलावा, सदस्यों ने शून्यकाल के दौरान लोक महत्व के 374 विषय उठाये। साथ ही नियम 377 के तहत सदस्यों ने 298 मुद्दे उठाये। सत्र में स्थायी समितियों के 36 प्रतिवेदन रखे गए और मंत्रियों ने महत्वपूर्ण विषयों पर 23 वक्तव्य रखे। अध्यक्ष ने कहा कि शीतकालीन सत्र के दौरान 56 तारांकित प्रश्नों के उत्तर दिये गए। लोकसभा में तमिलनाडु की दो जनजातियों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में डालने के प्रावधान वाले ‘संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2022’ को मंजूरी दी गई। इसमें तमिलनाडु की नारीकोरवन और कुरुविक्करन पहाड़ी जनजातियों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने का प्रावधान है। ‘संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (तीसरा संशोधन) विधेयक, 2022’को भी सदन ने मंजूरी दे दी, जिसमें हिमाचल प्रदेश के हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की श्रेणी में शामिल करने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, सदन ने ‘संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (पांचवां संशोधन) विधेयक, 2022’ को मंजूरी दी जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य से संबंधित 12 समुदायों को जनजातीय सूची में शामिल करने का प्रावधान है। साथ ही,‘संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (चौथा संशोधन) विधेयक, 2022’ को मंजूरी मिली जिसमें कर्नाटक की दो आदिवासी जातियों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की श्रेणी में लाने का प्रावधान है। निचले सदन ने समुद्री मार्ग पर जहाजों को लूटने वाले दस्युओं पर शिकंजा कसने और महासागरों के माध्यम से व्यापार को प्रभावी एवं सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से प्रस्तुत ‘समुद्री जलदस्युता रोधी विधेयक 2022’ को भी मंजूरी दी।
राज्यसभा के कामकाज
सदन में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को चर्चा कर पारित किया गया और कई जरूरी मामलों पर सदन में चर्चा हुई। सत्र के दौरान धनखड़ ने बतौर सभापति पहली बार सदन की कार्यवाही का संचालन किया। राज्यसभा में तमिलनाडु तथा कुछ अन्य राज्यों की विभिन्न जातियों को अनुसूचित जनजाति में डालने संबंधी विधेयकों, समुद्री मार्ग पर जहाजों को लूटने वाले दस्युओं पर शिकंजा कसने और महासागरों के माध्यम से व्यापार को प्रभावी एवं सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से प्रस्तुत ‘समुद्री जलदस्युता रोधी विधेयक 2022’ को भी मंजूरी दी गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प के मुद्दे पर तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया ने कोविड महामारी के संबंध में बयान दिया। सत्र के दौरान उच्च सदन ने वर्तमान वित्त वर्ष के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों को चर्चा कर लोकसभा को लौटा दिया। लोकसभा इन्हें पहले ही पारित कर चुकी थी।

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बिहार में नीतीश सरकार को घेरने की तैयारी में भाजपा, कानून-व्यवस्था और रोजगार को बनाया बड़ा मुद्दा https://samacharpacheesa.com/?p=5184 Tue, 13 Dec 2022 09:18:08 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5184 पटना। बिहार विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो रहा है। भाजपा और उसके सहयोगी दल बिहार विधानसभा में महागठबंधन की सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। भाजपा जबरदस्त तरीके से कानून व्यवस्था का मुद्दा उठा रही है। इसके अलावा 10 लाख नौकरी के मुद्दे पर भी नीतीश कुमार के सरकार को घेरने की तैयारी में है। शीतकालीन सत्र के पहले दिन राज्य विधानसभा के बाहर कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर भाजपा विधायकों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान बेरोजगारी को भी बड़ा मुद्दा बनाया गया। पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने साफ तौर पर कहा है कि महागठबंधन की सरकार ने बिहार की जनता से जो भी वादा किया है, उसे हर हाल में पूरा किया जाना चाहिए।
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि महागठबंधन सरकार के आगमन के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरीके से चरमरा गई है। उन्होंने कहा कि लोग महागठबंधन की सरकार से काफी ज्यादा निराश हैं और उन्हें एनडीए से उम्मीद भी है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था की स्थिति को सरकार सुलझाएं नहीं तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। कुल मिलाकर देखे तो बिहार विधानसभा में विपक्ष सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है। कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ जबरदस्त तरीके से विपक्ष का हंगामा भी जारी है।
बिहार भाजपा ने ट्वीट कर लिखा कि एनडीए काल में निकाली गई 1.15 लाख शिक्षक अभ्यर्थी की नियुक्तियां तत्काल पूर्ण करो। एनडीए की 2.34 लाख सरकारी बहालियों को पूर्ण करो। क्चञ्जश्वञ्ज-ष्टञ्जश्वञ्ज शिक्षक अभ्यार्थियों की बहाली तुरंत करो! इसके साथ ही बिहार भाजपा ने ट्वीट में लिखा कि शिक्षक अभ्यर्थियों की रोककर बहाली, नीतीश बाबू बिना शिक्षकों के ही स्कूल चलाएंगे! सुपौल जिले के 93 उत्क्रमित उच्च विद्यालय में एक भी शिक्षक नहीं। इन विद्यालयों से हर वर्ष करीब 9000 छात्र-छात्राएं भरते हैं मैट्रिक का फॉर्म।

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