सनातन धर्म – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Tue, 05 Sep 2023 06:52:07 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 करुणानिधि से आगे बढ़े उदयनिधि https://samacharpacheesa.com/?p=7951 Tue, 05 Sep 2023 06:52:06 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7951 डीएमके के नेता और तमिलनाडु सरकार के मंत्री उदयनिधि स्टॅलिन ने रविवार को चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम में जिस तरीके की बयान बाजी सनातन धर्म को लेकर की इसका विरोध तमिलनाडु के अलावा देश के उत्तरी राज्यों में जमकर हो रहा है। लेकिन तमिलनाडु की सियासत को करीब से समझने वालों के लिए पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि के पोते और तमिलनाडु सरकार के मंत्री उदयनिधि स्टालिन का यह बयान कोई चौंकाने वाला नहीं है। तमिलनाडु में डीएमके के सियासी जमीन का बड़ा आधार ही हिंदू विरोधी और संस्कृत के विरोध के साथ-साथ हिंदू देवी देवताओं की मान्यताओं पर सवाल उठाने से मजबूत हुआ है। इसलिए उदयनिधि स्टालिन का बयान तमिलनाडु की सियासत के लिए उनको और उनकी पार्टी के नैरेटिव के लिहाज से तो सेट हो रहा है लेकिन नए बने गठबंधन के लिए उत्तर भारत के राज्यों में एक बड़ी मुसीबत भी खड़ा कर रहा है। जो लोग तमिलनाडु की सियासत से वाकिफ होंगे उनको उदयनिधि का यह बयान बिल्कुल चौंकाने वाला नहीं लग रहा होगा। तमिलनाडु की सियासत में डीएमके की मजबूती प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि के जमाने में हिंदू हिंदी संस्कृत और देवी देवताओं के अस्तित्व पर उठाए जाने सवाल के साथ ही होती रही। करुणानिधि ने मद्रास स्टेट में हिंदी विरोध को इतना ज्यादा तूल दिया कि उसको तमिल अस्मिता से जोड़ा जाने लगा। नतीजा हुआ कि समूचे तमिलनाडु में न सिर्फ हिंदी बल्कि हिंदू संस्कृति और देवी देवताओं की अस्मिता पर सवाल उठाए जाने को इतना समर्थन मिलना शुरू हुआ कि इसकी अगुवाई करने वाले करुणानिधि प्रदेश के बड़े नेता के तौर पर पहचाने जाने लगे। तमिलनाडु की सियासत में खुद को राजनीतिक तौर पर मजबूत करने और अपनी पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए करुणानिधि ने हिंदी विरोधी दिवस तक का आयोजन कर डाला था। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि अपनी पार्टी की हिंदू हिंदी संस्कृत और देवी देवताओं को न मानने वाली राजनीतिक विचारधारा को इतना मजबूती के साथ आगे बढ़ा रहे थे कि उनको इसमें हमेशा सियासी फायदा ही नजर आता था। एक बार तो सियासत में एम करुणानिधि ने भगवान राम पर ही सवाल उठाते हुए एक जनसभा में पूछ लिया था कि रामसेतु का निर्माण आखिर राम कैसे कर सकते थे। वह भगवान राम के अस्तित्व पर भी सवाल उठा चुके थे। साठ के आखिरी के दशक में करुणानिधि ने हिंदी का इस कदर तमिलनाडु में विरोध किया कि कांग्रेस को सत्ता से बेदखना होना पड़ा। तमिलनाडु में हालात इस कदर एम करुणानिधि के पक्ष में आए कि सरकारी स्कूलों से लेकर बैंक अस्पताल और सरकारी दफ्तर तक में हिंदी पूरी तरीके से प्रतिबंधित हो चुकी थी।

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आदिपुरुष फिल्म पर विवाद के मायने https://samacharpacheesa.com/?p=7116 Tue, 20 Jun 2023 07:49:26 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7116 अभी बॉलीवुड के साथ ग्रह नक्षत्रों की का तालमेल ठीक से मेल नहीं खा रहा है। एक तरफ एक के बाद एक फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो रही है तो दूसरी ओर फिल्म के दृश्यों, डायलॉग और कथानक को लेकर विवाद खड़े हो रहे हैं। अभी केरल स्टोरी का विवाद थमा नहीं था कि 500 करोड़ से अधिक के खर्च से बनी फिल्म आदिपुरूष को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। पिछले शुक्रवार को फिल्म परदे पर रिलीज़ हुई, और उसी दिन से प्रभु राम, हनुमान और सीता के चरित्र, पहनावे और डायलॉग का विरोध हो रहा है। टेलीविजन पर चर्चा हो रही है, इस मामले में कांग्रेस, भाजपा और वामदलों की राय लगभग एक जैसी है। बहुत सालों के बाद पूरा देश किसी मुद्दे पर एकजुट हुआ है जबकि इस फिल्म को लेकर विवाद को कुछ बढ़ा चढ़ा कर बताया जा रहा है। यह समझ में नहीं आया की रामायण की कथानक पर बनी फिल्म में प्रभु राम की कहानी को दर्शाया गया, इस फिल्म का भारतीय जनता पार्टी क्यों विरोध कर रही है? इसे सनातन धर्म के विरुद्ध क्यों प्रचारित किया जा रहा है? फिल्म की कहानी में नाटकीयता है, यह किसी भी कहानी पर फिल्म बनाने के लिए जरूरी है। कुछ लोगों को घटनाओं की श्रृंखला पर भी आपत्ति हो सकती है क्योंकि सीमित समय में पूरी कथा बताने के लिए निर्देशक की मजबूरी भी होती है। कुछ को कहानी की सत्यता पर भी संदेह है। प्रारंभ में ही निर्माता ने स्पष्ट कर दिया है कि फिल्म आदिपुरुष वाल्मीकि रचित रामायण पर आधारित है। समाज में रामकथा की लोकप्रियता तुलसीदास कृत रामचरित मानस के पाठन के कारण अधिक है। वातविकता यह है कि दोनों रचनाओं में घटनाएं और तथ्यों में बहुत अंतर है। टेलीविजन पर प्रसारित रामानंद सागर का धारावाहिक रामायण मुख्य रूप से रामचरित मानस पर आधारित था। लोगों के मानसपटल पर वही कथा है। अब आदिपुरुष की तुलना करने पर दर्शकों को अंतर लग सकता है। इससे ज्यादा आश्चर्य तो इस बात पर है की कांग्रेस पार्टी को यह फिल्म प्रभु राम के चरित्र के विरुद्ध लग रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तो इस फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने लगे हैं।कांग्रेस का राम के प्रति भक्ति को देखकर भाजपा भी परेशान है। फिल्म को देखने बाद ऐसा आपत्तिजनक कुछ भी नहीं लगा, अगर आप फिल्म देखने के मूड से जा रहे हैं। डायलॉग में कुछ वाक्यों में हल्कापन जरूर है लेकिन पूरे देश में भाषा को लेकर हल्कापन देखा जा रहा है, इसलिए बहुत अटपटा नहीं लगता। जब विरोध हो रहा है तो पटकथा लेखक ने डायलॉग को परिवर्तित करने की घोषणा भी की है।

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योगी आदित्यनाथ ने सनातन धर्म को बताया राष्ट्रीय धर्म https://samacharpacheesa.com/?p=5937 Sat, 28 Jan 2023 07:23:32 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5937 लखनऊ। आजकल राजनीतिज्ञ लोग धर्म पर बयान दे रहे हैं और धार्मिक लोग राजनीति पर बयान दे रहे हैं। धर्म और राजनीति के इस घालमेल ने बड़ी राजनीतिक महाभारत भी खड़ी कर दी है। इधर हाल ही में भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने और श्रीरामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की बढ़ती हुई मांग के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि हमारा सनातन धर्म ही भारत का राष्ट्रीय धर्म है। उनके इस बयान पर विवाद खड़ा हो गया है क्योंकि कांग्रेस ने पूछा है कि यदि सनातन धर्म ही राष्ट्रीय धर्म है तो फिर बाकी धर्मों की क्या स्थिति है?
हम आपको बता दें कि शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजस्थान के जालौर में एक कार्यक्रम को संबोधित करने पहुँचे थे। वहां उन्होंने अयोध्या में बन रहे भव्य श्रीराम मंदिर का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी काल खंड में यदि हमारे धार्मिक स्थलों को अपवित्र किया गया है, तो उनके पुर्नस्थापना के लिए अभियान चलना चाहिए। योगी आदित्यनाथ ने साथ ही कहा कि अब हमारा सनातन धर्म ही भारत का राष्ट्रीय धर्म है। हम आपको बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जालौर स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर के जीर्णोद्धार और मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी उपस्थित थे। योगी ने कहा कि सनातन धर्म सबको साथ लेकर चलने की सीख भी देता है।
उधर, मुख्यमंत्री के इस बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस नेता उदित राज ने पूछा है कि यदि सनातन धर्म भारत का राष्ट्रीय धर्म है तो क्या सिख, जैन, बौद्ध, निरंकार, ईसाई और इस्लाम धर्म ख़त्म हो गया है? उन्होंने पूछा है कि देश में इन धर्मों के क्या कोई मायने नहीं हैं?

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