सपा – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Wed, 08 Feb 2023 07:57:27 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 स्वामी की सांसद पुत्री संघमित्रा भी कर सकती हैं साइकिल की सवारी https://samacharpacheesa.com/?p=6155 Wed, 08 Feb 2023 07:57:27 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6155 लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी की सांसद और विवादित नेता स्वामी प्रसाद मौर्या की पुत्री संघमित्रा मौर्य का ‘पिता प्रेम’ उनकी सियासत पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। पिछले वर्ष विधान सभा चुनाव के समय बीजेपी की पार्टी लाइन से हटकर सपा नेता और अपने पिता स्वामी प्रसाद मार्या का समर्थन करना और अब स्वामी की रामचरितमानस पर विवादित टिप्पणी का साथ देना भाजपा आलाकमान को रास नहीं आ रहा है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने स्वामी की विवादित टिप्पणी पर पिता का समर्थन करने वाली संघमित्रा को साफ कह दिया है कि अब उन्हें तय करना होगा कि भविष्य में वह किसके साथ खड़ी होंगी। एक निजी चैनल से बात करते हुए चौधरी ने कहा कि संघमित्रा बीजेपी की सांसद हैं और 2019 में जनता ने उन्हें सांसद चुना है। हमारी पार्टी का हिस्सा हैं लेकिन अब आगे उन्हें तय करना है कि आगे उनकी लाइन क्या होगी। वहीं राजनीति के जानकार कहते हैं कि संघमित्रा को पता है कि अबकी बार उनको टिकट मिलना मुश्किल है, इसलिए वह नई राह तलाश रही हैं।
बता दें कि पिछले दिनों जब स्वामी प्रसाद मौर्या अपनी विवादित टिप्पणी के कारण चौतरफा घिरे थे तो उनकी बेटी और भाजपा सांसद संघ मित्रा ने पिता का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि पिता को पूरे ग्रंथ से नहीं बल्कि कुछ चौपाइंयों पर एतराज है, क्योंकि उन्होंने इसका अध्ययन किया है। गौरतलब हो संघ मित्रा ने पिता स्वामी प्रसाद मौर्य की टिप्पणी पर कहा था कि उनकी बातों पर विचार किया जाना चाहिए न कि विवाद खड़ा करना चाहिए। संघमित्रा ने अपने बयान में कहा था कि यदि किसी को इस लाइन पर संदेह है तो उस पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि यह विषय विवाद या मीडिया में बैठकर बहस का नहीं बल्कि इस पर विद्वानों को विचार करना चाहिए। ताकि यह साफ हो सके कि चौपाई का वास्तविक अर्थ क्या है। हालांकि बाद में वह इस विवाद पर किनारा करती नजर आईं थी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्वामी मौर्य ने पिछले दिनों रामचरित मानस की कुछ पंक्तियों पर आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे प्रतिबंधित करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि जो भी विवादित अंश इस ग्रंथ में संकलित हैं, उन्हें निकाला जाना चाहिए। तुलसीदास रचित श्रीरामचरितमानस की एक चौपाई- ‘ढोल-गंवार शूद्र पशु नारी, सकल ताड़ना के अधिकारी’ का जिक्र करते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा था कि इस तरह की पुस्तक को जब्त किया जाना चाहिए। महिलाएं सभी वर्ग की हैं, क्या उनकी भावनाएं आहत नहीं हो रहीं हैं। लब्बोलुआब यह है कि संघमित्रा को अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में टिकट कटने का अहसास हो गया है। इसीलिए वह पार्टी की लाइन से हटकर बयानबाजी कर रही हैं। हो सकता है कि संघमित्रा अगला लोकसभा चुनाव साइकिल पर चढ़कर लड़े, इसके लिए वह अभी से भूमिका तैयार करने में लगी हैं।

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नए चेहरों पर दांव: राष्ट्रीय कार्यकारिणी से अखिलेश ने साधे सियासी समीकरण https://samacharpacheesa.com/?p=5961 Mon, 30 Jan 2023 07:12:42 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5961  लखनऊ। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी के जरिए सियासी समीकरण साधने की कोशिश की है। जाति, उम्र, समाज का पूरा ध्यान रखा गया है। पुराने चेहरों को तवज्जो देते हुए सक्रिय भूमिका निभाने वालों को पदोन्नति दी है। विभिन्न दलों से आए उन्हीं नेताओं को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जगह दी गई है, जो वोटबैंक जोड़ने के लिहाज से अहम हैं।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल 63 चेहरों में 10 यादव, आठ मुस्लिम, पांच कुर्मी, चार ब्राह्मण, सात दलित चेहरे और 16 अति पिछड़े वर्ग के लोगों को शामिल किया गया है। जबकि पिछली बार की 55 सदस्यीय कार्यकारिणी में सात यादव, आठ मुस्लिम, तीन ब्राह्मण, तीन कुर्मी, पांच दलित और 11 अन्य पिछड़े वर्ग के लोग थे।
कार्यकारिणी में पवन पांडेय, हाजी इरफान अंसारी जैसे चेहरों को शामिल करके युवाओं को जोड़े रखने की कवायद की गई है। कार्यकारिणी की घोषणा विधान परिषद शिक्षक एवं स्नातक खंड की पांच सीटों के मतदान के ठीक एक दिन पहले की गई है। ऐसे में सपा ने चुनाव से ठीक पहले कार्यकारिणी में हर वर्ग की भागीदारी का सबूत देकर इस चुनाव में भी बढ़त लेने की कोशिश की है।
परिवार को तवज्जो, महिलाओं को भी भागीदारी
राष्ट्रीय कार्यकारिणी में परिवार के सदस्यों को तवज्जो दी गई है। अभी तक अखिलेश यादव के बाद प्रो. रामगोपाल यादव और उनके बेटे अक्षय यादव शामिल थे। लेकिन अब शिवपाल सिंह यादव, तेज प्रताप यादव और धर्मेंद्र यादव को भी शामिल किया गया है। इस तरह 10 यादवों में छह तो परिवार के ही सदस्य हैं।
सैफई परिवार के तीनों युवा चेहरों को कार्यकारिणी सदस्य बनाकर सामंजस्य बनाए रखने का भी प्रयास किया गया है। कार्यकारिणी में पहले की तरह ही पांच महिलाओं को भी शामिल किया गया है। जूही सिंह के स्थान पर महिला सभा की निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष लीलावती कुशवाहा को जगह दी गई है, अनु टंडन को राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी दी गई है।

लेकिन शिवपाल के साथियों को जगह नहीं
सपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शिवपाल को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है, लेकिन उनके साथियों को तवज्जो नहीं मिली है। सपा से अलग होते समय शिवपाल के साथ जाने वालों को राष्ट्रीय कार्यकारिणी से दूर रखा गया है। अब सभी की निगाहें प्रदेश कार्यकारिणी पर टिकी हैं, क्योंकि शिवपाल बार-बार यही दुहाई देते रहे हैं कि उनके साथ जुड़े लोगों को भी सपा में समायोजित किया जाएगा।
कितनी कारगर होगी दलित राजनीति
सपा अभी तक जातीय तौर पर अल्पसंख्यकों और पिछड़े वर्ग की राजनीति करती रही है। अखिलेश यादव विधानसभा चुनाव 2022 से लगातार अंबेडकरवादियों और लोहियावादियों को एक मंच पर लाने की दुहाई देते रहे हैं। अब राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पार्टी में वर्षोर्ं से कार्य कर रहे दलित नेताओं को तवज्जो देने के बजाय बसपा पृष्ठभूमि से निकले नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में अहम सवाल यह भी उठ रहा है कि यह कदम पार्टी के लिए कितना फायदेमंद होगा।
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