समाजवादी पार्टी – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Sat, 18 Feb 2023 06:04:02 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 देश में जातिवादी राजनीति का नया दौर https://samacharpacheesa.com/?p=6333 Sat, 18 Feb 2023 06:04:02 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6333 सपा ने धर्म के खिलाफ जातियों को खड़ा करने का जो राजनितिक दांव चला था उसका परिणाम भी सामने आ गया जब बुधवार को अयोध्या के एक संत महंत राजूदास और और स्वामी प्रसाद मौर्य एक दूसरे से भिड़ गये। लखनऊ में एक निजी टीवी चैनल के कार्यक्रम में दोनों ने एक दूसरे से हाथापाई शुरु कर दी। स्वामी प्रसाद मौर्य ने जब रामचरित मानस की निंदा की थी तब महंत राजूदास ने स्वामी प्रसाद मौर्य को दंड देने का ऐलान किया था। वैसे तो दोनों जुबानी जमा खर्च कर रहे थे लेकिन जब दोनों का आमना सामना हुआ तो हाथापाई पर उतर आये। यही तो सपा की सारी योजना का हिस्सा था कि धर्म के खिलाफ जातीय नेता लड़ते हुए दिखें, और वैसा हो भी गया। समाजवादी पार्टी सत्ता से बाहर है। उसका यादव प्लस मुस्लिम वाला फार्मूला दो चुनाव से सफल नहीं हो पा रहा है। वह इसलिए क्योंकि भाजपा की हिन्दुत्ववादी राजनीति के कारण पिछड़े वर्ग की जातीय गोलबंदी भी कुछ हद तक टूटी है। ऐसे में सपा की रणनीति ये है कि अगर जातियों को धार्मिकता के खिलाफ खड़ा कर दिया जाए तो उसकी स्थिति मजबूत हो सकती है। इस मुहिम की शुरुआत यूपी में बसपा, भाजपा होते हुए सपा में पहुंचे स्वामी प्रसाद मौर्य ने की। उन्होंने हिन्दुओं के पवित्र ग्रंथ रामचरित मानस को जातीय वैमनस्य पैदा करनेवाला बताया। एक तरफ समाजवादी पार्टी ने स्वामी के बयान को निजी बताकर पल्ला झाड़ लिया, दूसरी ओर उन्हें खुली छूट दी गई कि वह रामचरित मानस की चौपाई के जरिए जातीय भेद को हवा देते रहें, ताकि गैर-यादव पिछड़े एवं गैर-जाटव दलित अस्मिता के नाम पर सपा से जुड़ें। वहीं भाजपा में भी जल्द ही सांगठनिक फेरबदल होने वाला है। यहां भी पिछड़े एवं दलितों को प्रमुखता दिये जाने की तैयारी है। भाजपा ने जाट समुदाय से आने वाले भूपेंद्र चौधरी को अध्यक्ष बनाकर पहले ही बिसात बिछा दी है। बीते चार लोकसभा चुनाव पर नजर डालें तो भाजपा ब्राह्मण अध्यक्ष के चेहरे के साथ मैदान में उतरती रही है, लेकिन इस बार पिछड़े पर दांव खेला है। ऐसा करने के एवज में अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य को राष्ट्रीय महासचिव बनाकर पुरस्कार भी दे दिया है। दूसरी तरफ, भाजपा अपनी किलेबंदी मजबूत करने के लिये पार्टी में होने वाले न्यूनतम बदलावों में पिछड़े एवं दलित वर्ग को प्रमुखता देने की तैयारी में है। इसी क्रम में सुभासपा को भी साथ लाने की तैयारी है। भाजपा नेतृत्व की बात ओम प्रकाश राजभर से चल रही है, जो विधानसभा चुनाव में खास रणनीति के तहत सपा गठबंधन में चले गये थे। संभावना है कि लोकसभा चुनाव से पहले ओम प्रकाश राजभर भाजपा खेमे में चले आयेंगे।
सपा भी भाजपा की रणनीति का जवाब देने के लिये मंडल के दौर के जातीय विभाजन को हवा दे रही है, जिसका नेतृत्व कर रहे हैं स्वामी प्रसाद मौर्य, जो नवबौद्ध बन चुके हैं। मौर्या अब हिंदू धर्म से दूर हो चुके हैं, लिहाजा सपा जरूरत पडऩे पर उन्हें बौद्ध बताकर किनारा करने का विकल्प भी खुला रखेगी। सपा के भविष्य की सियासत की झलक अखिलेश ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी गठन में ही जाहिर कर दी थी। राष्?ट्रीय कार्यकारिणी में पिछड़े-दलित एवं मुसलमानों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के साथ सवर्णों की संख्या सीमित कर अलिखेश ने नई रणनीति के संकेत दे दिये थे। यह अलग बात है कि कुछ दबावों के बाद ओमप्रकाश सिंह एवं अरविंद सिंह गोप को शामिल करना पड़ा।

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यूपी विधान परिषद चुनाव में भाजपा ने जीतीं 5 में से 4 सीटें, सपा को लगा बड़ा झटका https://samacharpacheesa.com/?p=6057 Fri, 03 Feb 2023 07:56:23 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6057 लखनऊ। यूपी एमएलसी चुनाव 2023 के नतीजे आ चुके हैं। सामने आए नतीजों मे जहां भाजपा का डंका बजा है वहीं समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। भाजपा के प्रत्याशियों ने 4 सीटों पर जीत दर्ज की है। जबकि एक सीट निर्दलीय के खाते में गया है। उल्लेखनीय बात है कि समाजवादी पार्टी के खाते में एक भी सीट नहीं गई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा प्रत्याशियों को जीत की बधाई दी है।
भाजपा ने स्नातक कोटे की गोरखपुर-फैजाबाद, बरेली-मुरादाबाद, कानपुर-उन्नाव सीट और शिक्षक कोटे की झांसी-इलाहाबाद सीट पर जीत दर्ज की है। जबकि कानपुर-उन्नाव शिक्षक कोटे की एमएलसी सीट पर निर्दलीय राज बहादुर सिंह चंदेल विजयी हुए। वहीं, इन चुनावों में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी का खाता भी नहीं खुला।
स्नातक कोटे की गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर भाजपा के देवेंद्र प्रताप सिंह ने जीत दर्ज की है। बरेली-मुरादाबाद सीट भी भाजपा के कब्जे में आई। यहां पर जयपाल सिंह व्यस्त ने तीसरी बार जीत दर्ज की है। वहीं भाजपा ने यह सीट लगातार आठवीं बार जीती है। कानपुर-उन्नाव सीट पर भाजपा के अरुण पाठक ने जीत हासिल की। रिपोर्ट के मुताबिक, यह तीनों एमएलसी सीटें पहले भी भाजपा के ही पास थीं।

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आगामी चुनावों को हिंदू-मुस्लिम उन्माद पर पोलराइज करने के लिए सपा-भाजपा की मिलीभगत : मायावती https://samacharpacheesa.com/?p=5951 Mon, 30 Jan 2023 06:50:56 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5951 लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय महासचिव स्‍वामी प्रसाद मौर्य के श्रीरामचरितमानस पर विवादित बयान को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आक्रामक रुख के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सोमवार को भाजपा और सपा पर निशाना साधा। मायावती ने कहा कि भाजपा की प्रतिक्रिया के बावजूद सपा नेतृत्व की चुप्पी से स्पष्ट है कि इसमें दोनों पार्टियों की मिलीभगत है, ताकि आगामी चुनावों में हिंदू-मुस्लिम उन्माद पर ध्रुवीकरण किया जा सके। बसपा प्रमुख ने सोमवार को ट्वीट किया, “संकीर्ण राजनीति और चुनावी स्वार्थ के लिए नए-नए विवाद खड़े करने, जातीय-धार्मिक द्वेष फैलाने, उन्माद पैदा करने तथा धर्मांतरण का सहारा लेने की भाजपा की राजनीतिक पहचान सर्वविदित है, लेकिन रामचरितमानस की आड़ में सपा का ऐसा ही राजनीतिक रंग-रूप दुखद एवं दुर्भाग्यपूर्ण है।”
उन्होंने आगे कहा, “रामचरितमानस के खिलाफ सपा नेता की टिप्पणी पर उठे विवाद और फिर उसे लेकर भाजपा की प्रतिक्रियाओं के बावजूद सपा नेतृत्व की चुप्पी से स्पष्ट है कि इसमें दोनों पार्टियों की मिलीभगत है, ताकि आगामी चुनावों को जनता के ज्वलंत मुद्दों के बजाय हिंदू-मुस्लिम उन्माद पर ‘पोलराइज’ किया जा सके।” एक अन्य ट्वीट में मायावती ने कहा, “उत्तर प्रदेश में हुए पिछले विधानसभा चुनावों को भी सपा-भाजपा ने षड्यंत्र के तहत मिलीभगत करके धार्मिक उन्माद के जरिये घोर सांप्रदायिक बनाकर एक-दूसरे के पूरक के रूप में काम किया। इसी की वजह से भाजपा दोबारा यहां सत्ता में आ गई। ऐसी घृणित राजनीति का शिकार होने से बचना जरूरी है।”
स्वामी प्रसाद मौर्य ने 22 जनवरी को एक बयान में श्रीरामचरितमानस की एक चौपाई का जिक्र करते हुए इसे महिलाओं तथा पिछड़ों के प्रति अपमानजनक करार दिया था और इस पर पाबंदी लगाने की मांग की थी। उनके इस बयान पर खासा विवाद उत्पन्न हो गया था। संत समाज और हिन्दूवादी संगठनों ने भी इसका कड़ा विरोध किया था। इस मामले में मौर्य के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ है। सपा ने रविवार को अपनी 62 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा की थी, जिसमें स्‍वामी प्रसाद मौर्य को राष्‍ट्रीय महासचिव का दायित्व सौंपा गया। इसके बाद भाजपा का रुख और आक्रामक हो गया है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी समेत कई प्रमुख नेताओं ने सपा प्रमुख पर हिंदुओं की आस्था का अपमान करने का आरोप लगाया है।

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