सरकार – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Tue, 19 Sep 2023 09:17:15 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 टीएस सिंहदेव ने केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर कसा तंज https://samacharpacheesa.com/?p=8051 Tue, 19 Sep 2023 09:14:35 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=8051 सरगुजा। छत्तीसगढ़ की सत्ता में वापसी के लिये कांग्रेस के गढ़ सरगुजा में भाजपा पूरी ताकत लगा रही है। सरगुजा संभाग में लगातार भाजपा के बड़े नेताओं का दौरा जारी हैं। भाजपा की परिवर्तन यात्रा भी सोमवार को बलरामपुर पहुंची। इस यात्रा में शामिल होने उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रयास मौर्य पहुंचे। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार बनाने का दावा किया है। जिस पर सिंहदेव ने करारा तंज कसते हुए इशारों इशारों में बड़ी बात कही।
डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने भाजपा नेताओं पर ली चुटकी- भाजपा के बड़े नेताओं के सरगुजा दौरे और छत्तीसगढ़ में सरकार बनाने के दावों पर डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने चुटकी ली है। सिंहदेव ने कहा, पिछले चुनाव में भाजपा का परफार्मेंस काफी निराशाजनक रहा है। ये कोई भी अनुमान नहीं लगा पा रहा था कि 15 सीटों में भाजपा यहां सिमट जाएगी। अब वो जी तोड़ प्रयास कर रहे हैं कि अपने परफार्मेंस को बढ़ाएं और हो सके तो सरकार में आयें। चुनाव के समय हर दल का अपना अपना प्रयास रहता है।
टीएस सिंहदेव ने कहा सरगुजा में एक भी सीट उनके पास नहीं है, इसलिए वो प्रयास कर रहे हैं। जो हम लोग सुन रहे, वो यही बात है कि जो इनके बड़े लीडर हैं। वो यह कह रहे हैं कि कम से कम 35-40 के पार आ जाओ, बाकी सरकार हम बनवा देंगे। तो कोशिश कर रहे हैं अच्छे से अच्छा करने का।
भाजपा सरकार की वापसी का किया था दावा- बलरामपुर में यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने छत्तीसगढ़ में भाजपा की वापसी का दावा किया था। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार की शानदार वापसी के लिये उत्तरप्रदेश की 25 करोड़ जनता की ओर से शुभकामना लेकर आया हूं। हम लोग पूरे विश्वास से कह सकते हैं कि 2023 के चुनाव में छत्तीसगढ़ की जनता डबल इंजन की सरकार बनाने के लिये तैयार है। भाजपा ही भविष्य है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत का डंका पूरे दुनिया के बज रहा है, तो छत्तीसगढ़ भी उसमे पीछे नहीं रहना चाहिये।
छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। जिसे लेकर सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। विपक्षी पार्टी भाजपा लगातार अपने बड़े नेताओं का छत्तीसगढ़ में दौरा करा रही है। ताकि प्रदेश में भाजपा के लिए माहौल तैयार किया जा सके। वहीं कांग्रेस भी भाजपा के आरोपों का जवाब देने में पीछे नहीं है।

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संविदा कर्मियों पर एस्मा का असर नहीं, उधर सुगबुगाहट सरकार कर सकती है नियमित.. https://samacharpacheesa.com/?p=7567 Thu, 27 Jul 2023 10:05:03 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7567 रायपुर। छत्तीसगढ़ के संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियमितीकरण को लेकर एक बार फिर से सुगबुगाहट शुरू हो गई है। सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों को आदेश जारी कर एक सप्ताह के भीतर ऐसे सभी कर्मचारियों की जानकारी मांगी है। शासन के इस आदेश के बाद विभागवार जानकारी संकलन का काम भी शुरू हो गया है।
इधर शासन द्वारा एस्मा लगाये जाने के बाद भी हड़ताली संविदा कर्मी विरोध प्रदर्शन पर डटे हुए हैं। सेवा समाप्ति का भी उनमें डर नजर नहीं आ रहा है. हालांकि सरकार की ओर से बार बार प्रस्ताव दिया जा रहा है पहले हड़ताल खत्म कर काम पर लौटे। नियमितीकरण भी इतना आसान नहीं हैं कितना वित्तीय भार कोष पर पड़ेगा यह भी बड़ा सवाल है। विभाग के कामकाज पर भी असर दिखने लगा है क्योकि कई जगहों पर संविदा कर्मियों के भरोसे ही काम चल रहा है। कुल मिलाकर पेंच फंस गया है। यदि बड़े फैसले पर मुहर लगती है तो एक बड़ा चुनावी फायदा में चुनाव में मिलेगा।

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मध्यवर्ग से राजनीतिक पार्टियों की बेरूखी https://samacharpacheesa.com/?p=6997 Sat, 27 May 2023 08:34:51 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6997 देश की राजनीति में मध्यवर्ग का बड़ा योगदान माना जाता रहा है। मुल्क की सियासत का नैरेटिव तय करने और उसे दिशा देने में इस तबके को सबसे बड़ा फैक्टर माना जाता है। पहले कई मौकों पर मध्यवर्ग ने इसे साबित भी किया है। लेकिन पिछले कुछ अरसे से यह अपनी सियासी पूंजी गंवाता हुआ दिख रहा है। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, हाल के दिनों में मध्यवर्ग किसी की भी प्राथमिकता में नहीं दिख रही है। आखिर इस ट्रेंड के पीछे क्या वजह है? जानकार जल्दबाजी में इसे लेकर कोई राय नहीं बनाना चाहते, लेकिन इतना वे भी मानते हैं कि इधर राजनीतिक दलों की ओर से पेश किए जाने वाले सियासी मेन्यू में मध्यवर्ग के स्वाद का खयाल नहीं रखा जा रहा है। उदारीकरण के बाद नब्बे के दशक से मध्यवर्ग का राजनीति में दखल बढ़ा है। खासकर नैरेटिव बनाने में इस तबके की सबसे अहम भूमिका मानी जाने लगी थी। लेकिन यह बात भी सामने आई कि पिछले कुछ वर्षों में इस तबके को सरकार से अपेक्षा के मुताबिक सौगात नहीं मिली। वैसे इस बारे में सरकार का दावा है कि मध्यवर्गीय लोग उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहे हैं। लेकिन मध्यवर्गीय लोग शायद ही इससे इत्तेफाक रखें। सच यह भी है कि मध्यवर्ग की अनदेखी की वजह हालिया सियासी नतीजे भी हो सकते हैं। बजट से लेकर चुनावी वादों तक, हाल के दिनों में आए तमाम राजनीतिक परिणामों में यह बात समान रूप से दिखी कि राजनीतिक दल गरीब और किसानों पर अधिक फोकस करते रहे हैं। गांव की आबादी उनकी प्राथमिकता में रही है। इस तथ्य से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि चुनावों में गांव में रहने वाले लोग, गरीब और किसान राजनीतिक दिशा तय करने में कहीं अधिक भूमिका निभाते रहे हैं। 2014 के बाद मोदी सरकार ने इनके लिए कई योजनाएं लॉन्च कीं और इस तबके के बीच उनकी लोकप्रियता बढ़ी भी है। सरकार ने इन पर लगातार फोकस किया। केंद्र के अधिकतर संसाधन किसान सम्मान निधि और मुफ्त राशन जैसी योजनाओं के संचालन में गए। इसका सियासी लाभ भी उन्हें मिला। लेकिन इस हिसाब से मध्यवर्ग को सौगातें नहीं मिलीं। यह भी सही है कि सीमित आर्थिक संसाधनों में सरकार हर तबके को खुश नहीं रख सकती। वह भी तब, जब पिछले कुछ वर्षों से देश की आर्थिक दशा वैसी मजबूत नहीं रही। वैसे इसका एक और पहलू है। सत्ता पक्ष का यह तर्क है कि केंद्र सरकार ने हाल के वर्षों में कई ऐसे कदम उठाए, जिनका अप्रत्यक्ष लाभ मध्यवर्ग को मिला है। सरकार से जुड़े एक सीनियर नेता ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर पर बहुत काम किया गया। सड़क और रेल सेवा बेहतर की गई। इन तमाम चीजों से सबसे अधिक लाभ मध्यवर्गीय आबादी को ही होता है। उनका तर्क था कि मिडल क्लास को सीधा लाभ देने से बेहतर है उसे बेहतर संसाधन उपलब्ध कराना। सरकार ऐसा कर रही है और उसका लाभ भी इस वर्ग को मिल रहा है। उधर, विपक्ष ने भी गरीब और गांव में रहने वालों पर ही फोकस किया और उन्हें चुनावों में मुफ्त की चीजें देने का एलान किया। इसका लाभ भी उसे मिला। ऐसे में संदेश यह भी गया कि दोनों पक्ष इस सोच के साथ आगे बढ़े कि मध्यवर्ग और शहरी आबादी को कुछ समय के लिए नाराज करने का राजनीतिक जोखिम लिया जा सकता है।

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विधानसभा में सवाल जवाब का स्तर https://samacharpacheesa.com/?p=6548 Thu, 16 Mar 2023 05:47:01 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6548 छत्तीसगढ़ की निर्वाचित पंचम विधानसभा का सोलहवां सत्र, बजट सत्र चल रहा है। लोकतंत्र में जितनी जिम्मेदारी सरकार की है, उतनी ही विपक्ष की भी है। लेकिन विधानसभा में प्रश्न पूछने का अधिकार सत्ता और विपक्ष दोनों के विधायकों का होता है। वैसे तो कहा जाता है कि जैसे-जैसे कोई संस्था पुरानी होती जाती है। उसकी कार्यप्रणाली बेहतर होती है और परिपक्वता आती है। लेकिन संसदीय संस्थाओं के साथ समस्या यह है कि हर पांच साल में चुनाव होता है और जनता के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि विधानसभा में आते हैं। इन निर्वाचितों में कुछ अनुभवी पुराने भी होते हैं, तो कुछ नए होते हैं। इसलिए विधानसभा का अनुभव उसके निर्वाचित प्रतिनिधियों की वरिष्ठता और गंभीरता से तय होती है। दूसरी ओर सरकार में जो मंत्री नियुक्त होते हैं, वे तो ज्यादातर अनुभवी ही होते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के पांचवें विधानसभा की बात करें तो प्रश्नकाल के दौरान सदन के सदस्यों के प्रश्न की बात हो या मंत्रियों के उत्तर की बात हो। गुणवत्ता कम होती दिखाई देती है। एक बात तो तय है कि कांग्रेस पार्टी के निर्वाचित 71 विधायकों में 75 प्रतिशत एकदम नए प्रतिनिधि जिनका बहुत अधिक संसदीय अनुभव नहीं है। दूसरी ओर विपक्ष के सदस्य भले ही संख्या में कम हो लेकिन ज्यादातर बेहद अनुभवी है। उनके अनुभव के सामने सरकार के मंत्रियों का अनुभव बहुत कम है। लेकिन मंत्रियों को प्रश्नकाल के दौरान पूछे गए प्रश्नों की जानकारी देने की जिम्मेदारी अधिकारियों की होती है। पिछले कई सत्रों से लगातार विधायकों के प्रश्नों का ठीक-ठीक उत्तर देने में मंत्री नाकाम रहे हैं। इस बात को लेकर विधानसभा अध्यक्ष हिदायत भी दे चुके हैं कि मंत्री तैयारी के साथ आया करें। दूसरी ओर गंभीर विषयों से जुड़े सवाल जिनका जनता से सीधा से सरोकार है, प्रदेश के हित से जुड़ा है ऐसे प्रश्न पर भी मंत्री गंभीर नजर नहीं आते। आदिम जाति कल्याण मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम एक प्रश्न का उत्तर नहीं दे पाए और इसके लिए आधे घंटे की चर्चा निश्चित की गई , इसी प्रकार कुपेबेड़ा में किडनी खराब होने की घटना को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब नहीं आने पर विपक्ष के विधायकों ने बहिर्गमन किया। विधानसभा में जनता के विषय पर चर्चा हो प्रश्नोत्तरी के माध्यम से तथ्य लोगों के सामने आए और इसके जरिए व्यवस्था में सुधार हो। यही संसदीय प्रणाली का मुख्य लक्ष्य होता है।

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त्रिपुरा में जरूरी है डबल इंजन की सरकार : माणिक साहा https://samacharpacheesa.com/?p=6254 Mon, 13 Feb 2023 07:19:57 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6254 अगरतला। त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अपने आखिरी चरण में है। सत्तारूढ़ भाजपा के अलावा विपक्षी दल भी लगातार चुनाव प्रचार में अपना दम दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। दोबारा सत्ता में वापसी के लिए भाजपा पूरी मेहनत भी कर रही है। इन सब के बीच त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने न्बातचीत में बताया है कि आखिर राज्य में डबल इंजन की सरकार की जरूरत क्यों है। अपने बयान में माणिक साहा ने कहा कि अगर एक ही पार्टी की सरकार होती है तो कुछ भी चीज़ मांगने में आसानी हो जाती है।
इसके साथ ही साहा ने कहा कि मैंने पहले भी देखा था कि केंद्रीय मंत्रियों से मिलने में बहुत मुश्किल होती थी। अगर एक ही सरकार होगी तो समय भी तुरंत मिल जाता है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं था और जनता इसको समझती भी है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट (सरकार) को लोकतांत्रिक तरीके से हटाना भारत के इतिहास में ऐसा शायद पहली बार हुआ है। इस वजह से भी त्रिपुरा जरूरी है। इतने लोगों को अपने जीवन का बलिदान देना पड़ा और ऐसा फिर से न हो इसलिए हमारे पार्टी के नेता भी चिंतित रहते हैं।
ग्रेटर टिपरालैंड को लेकर पूछे गए सवाल पर भी उन्होंने बड़ी बात कही है। त्रिपुरा के ष्टरू ने कहा कि मैंने बार-बार कहा कि ग्रेटर टिपरालैंड की सीमा कहां है? कभी बोलते हैं कि यह बांग्लादेश में है, कभी बोलते हैं कि असम, मिज़ोरम में कुछ हिस्सा है। अगर हम इसपर बात करना चाहते हैं तो कहा जाता है कि यह भाषाई और सांस्कृतिक पर है। वे ठीक से इसको परिभाषित नहीं कर पा रहे हैं। विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि यह लोग (कांग्रेस, वाम दल) पारंपरिक राजनीति कर रहे हैं लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरी राजनीति ही बदल दी है। किन लोगों के साथ रहने से कितने मतदान मिलेंगे यह लोग उसी में लगे हैं, लेकिन क्चछ्वक्क सबके लिए काम करती है।

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सरकार और न्यायपालिका को एकसाथ आना चाहिए : किरन रिजिजू https://samacharpacheesa.com/?p=5873 Tue, 24 Jan 2023 09:09:51 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5873 नई दिल्ली। केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि आज कुल लंबित मामलों की संख्या 4.90 करोड़ है। न्याय में देरी का मतलब न्याय से इंकार करना है। मामलों की इस देरी को कम करने का एकमात्र तरीका सरकार और न्यायपालिका का एक साथ आना है। तकनीक इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। न्याय विभाग, कानून व न्याय मंत्रालय की ई-कोर्ट परियोजनाओं के पुरस्कार समारोह में केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि नेशनल ई-गवर्नेंस आवर्ड के गोल्ड कैटेगरी में हमें इस साल जजमेंट और सर्च पोर्टल के लिए पुरस्कार मिला है। हमारे विभाग को प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला है इसलिए मैं खुश हूं।
जजों की नियुक्ति प्रशासनिक मामला है, न्यायिक मामला नहीं। सीजेआई ने सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी का नेतृत्व जारी रखने पर सहमति जताई है। वह सर्वोच्च न्यायालय की सभी समितियों के मुख्य संरक्षक हैं। इससे पहले केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा था कि हालांकि न्यायाधीशों को चुनाव या सार्वजनिक जांच का सामना नहीं करना पड़ता है, फिर भी वे जनता की नजर में होते हैं। उन्होंने कहा, “लोग आपको देख रहे हैं..आप जो जजमेंट देते हैं, आप कैसे काम करते हैं..सोशल मीडिया के इस युग में आप कुछ भी नहीं छिपा सकते।
किरेन रिजिजू ने कहा कि मैंने सीजेआई को एक पत्र लिखा, जिसके बारे में किसी को नहीं पता था। पता नहीं किसे कहां से पता चला और खबर बना दी कि क़ानून मंत्री ने सीजेआई को पत्र लिखा कि कॉलेजियम में सरकार का प्रतिनिधि होना चाहिए। इस बात का कोई सर पैर नहीं। मैं कहां से उस प्रणाली में एक और व्यक्ति डाल दूंगा। भारत में लोकतंत्र सिर्फ जीवित ही नहीं बल्कि मजबूती से आगे चले उसके लिए एक मज़बूत और आज़ाद न्यायपालिका का होना जरूरी है। न्यायपालिका की आज़ादी को कमज़ोर या उसके अधिकार, सम्मान और गरिमा को कम करेंगे तो लोकतंत्र सफल नहीं हो।

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कोरोना पर सरकार ने उठाए उचित कदम, कांग्रेस क्यों कर रही है विरोध : अुनराग ठाकुर https://samacharpacheesa.com/?p=5403 Fri, 23 Dec 2022 07:42:44 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5403 नईदिल्ली। दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस का खतरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। इन सब के बीच भारत सरकार भी सक्रिय हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कोरोनावायरस की वर्तमान स्थिति को लेकर एक बड़ी समीक्षा बैठक की थी। हालांकि, कोरोना वायरस को लेकर देश में राजनीति भी जमकर हो रही है। कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा पर सत्तारूढ़ भाजपा जबरदस्त तरीके से हमलावर है। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने राहुल गांधी और कांग्रेस को पत्र लिखकर कहा कि कोरोना के मद्देनजर भारत जोड़ो यात्रा को स्थगित कर दें। हालांकि, कांग्रेस का दावा है कि भाजपा भारत जोड़ो यात्रा से डर गई है और इसलिए इस यात्रा को रोकने के लिए अलग-अलग बहाने ढूंढ रही है। कांग्रेस का दावा है कि भारत जोड़ो यात्रा जारी रहने वाला है।
इन सब के बीच केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए पूछा है कि भारत सरकार जो फैसले ले रही है उसका पार्टी विरोध क्यों कर रही हैं? अपने बयान में अनुराग ठाकुर ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा एक महीने से ज्यादा समय से चल रही थी। कौन इससे जुड़ रहा था इससे हमें कोई मतलब नहीं था। उन्होंने कहा कि अगर एक बार फिर दुनियाभर में कोविड का संकट आया है और भारत सरकार ने उचित कदम उठाए हैं तो इसका कांग्रेस पार्टी विरोध क्यों कर रही है? केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि क्या जनता और देश के हित में किसी निर्णय को कांग्रेस कभी स्वीकार नहीं करेगी? क्या गांधी परिवार की जिद्द के आगे पूरा देश नतमस्तक हो जाएगा।
163 नए मामले
भारत में एक दिन में कोरोना वायरस संक्रमण के 163 नए मामले सामने आने के बाद देश में अभी तक संक्रमित हुए लोगों की संख्या बढ़कर 4,46,76,678 पर पहुंच गई है, जबकि उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 3,380 रह गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से शुक्रवार सुबह आठ बजे जारी अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में संक्रमण से दो, जबकि दिल्ली में एक और मरीज की मौत के बाद मृतक संख्या बढ़कर 5,30,690 हो गई है। वहीं, संक्रमण से मौत के आंकड़ों का पुन:मिलान करते हुए केरल ने वैश्विक महामारी से जान गंवाने वाले मरीजों की सूची में छह नाम और जोड़े हैं।

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