सुप्रीम कोर्ट – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Wed, 03 May 2023 08:50:03 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 आरक्षण पर सर्वोच्च न्यायालय का आदेश https://samacharpacheesa.com/?p=6822 Wed, 03 May 2023 08:50:00 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6822 प्रदेश में आरक्षण को लेकर भ्रम का वातावरण है, उस पर सुप्रीम कोर्ट के एक ऑर्डर को लेकर मीडिया से राजनीति तक जिस प्रकार से प्रचारित किया गया, उससे भ्रम और बढ़ गया है। सोमवार को इस तरह की खबर आई कि प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट ने 58 प्रतिशत आरक्षण को जारी रखने का फैसला दे दिया है। मतलब उच्च न्यायालय ने सितंबर में प्रदेश में लागू 58 प्रतिशत आरक्षण को खारिज कर दिया था उसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस खबर के बाद सरकार ने भी बैठक कर भर्ती परीक्षा कराने का निर्णय लिया ऐसी खबर आई। आज जब सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर की कॉपी मिली तो पता चला कि सुप्रीम कोर्ट ने 58 प्रतिशत को लेकर कोई आदेश नहीं दिया है। कोर्ट ने केवल प्रदेश में भर्ती और पदोन्नति की प्रक्रिया को जारी रखने के लिए कहा है। इस आदेश में न तो उच्च न्यायालय के निर्णय का उल्लेख है और न ही आरक्षण कोटा को लेकर कोई आंकड़ा। ऑर्डर में तो यह भी लिखा है कि प्रदेश में जो भी निर्णय लिया जाएगा वह कोर्ट के अंतिम निर्णय से प्रभावित होगा। अब सवाल यह भाई कि जब सुप्रीम कोर्ट ने 58 प्रतिशत के बारे में कुछ कहा ही नहीं तो मीडिया से लेकर सरकार तक में इसकी चर्चा कैसे हुई? इसका दोषी कौन है? पहली बात तो सरकार के पक्ष रखने वाले वकीलों ने मीडिया और सरकार को जो बताया होगा वही बात सार्वजनिक हुई होगी, इसका मतलब इस भ्रम को फैलाने के दोषी वकील हैं? या मीडिया ने बिना जानकारी लिए आधे अधूरे तथ्य के आधार पर समाचार परोस दिया? अगर ऐसा है भी तो सरकार को तो आदेश की कॉपी मिलने तक इंतजार कर लेना था, इसका श्रेय लेने की हड़बड़ी में शासन ने भी लापरवाही की। कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संकट और गहरा गया है। हालांकि सरकार की जिद है कि 76 प्रतिशत पर ही भार्ती करनी है वरना देश भर में 50 प्रतिशत आरक्षण कोटा के आधार पर भर्ती परीक्षाओं के परिणाम घोषित कर सकती है और नई परीक्षाएं भी ले सकती है। जब निर्णय आएगा तब नई व्यवस्था लागू की जा सकती है। सरकार को विषय की गंभीरता समझनी चाहिए, छात्र परेशान हैं, महाविद्यालयों में प्रवेश बाधित होंगी। पीढ़ी का नुकसान है, ऐसे में सरकार को युवाओं को समझते हुए आगे बढऩा चाहिए। लेकिन चुनाव करीब है और वोटबैंक का सवाल है इसलिए कुछ निर्णय होगा इसकी संभावना कम है। वैसे भी आरक्षण को लेकर पिछले 6-8 महीनों से केवल राजनीति हो रही, जिसका खामियाजा पढऩे वाले बेरोजगार युवाओं को भुगतना पड़ रहा है। प्रदेश में आरक्षण का मामला छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के फैसले से पेचीदा हुआ जब प्रदेश में 2012 से लागू 58 प्रतिशत आरक्षण को असंवैधानिक करार दे दिया गया। इसके बाद प्रदेश में वापस 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू हो गई। इस निर्णय से सबसे अधिक नुकसान जनजातीय समाज को हुआ क्योंकि 2012 में जनजातीय वर्ग के आरक्षण का कोटा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 32 प्रतिशत किया गया था वहीं अनुसूचित जाति की आबादी के अनुसार आरक्षण को 16 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत किया गया था। इस निर्णय से नाराज अनुसूचित जाति समाज के प्रतिनिधि उच्च न्यायालय गए थे। इधर प्रदेश सरकार ने जनजाति समाज के विरोध को देखता हुए विधानसभा में आरक्षण कोट में संशोधन करने एक और विधायक ले जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इसके अनुसार प्रदेश में 76 प्रतिशत आरक्षण कोटा दिया गया है जिसमें आदिवासियों को 32 प्रतिशत के साथ पिछड़े वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया। इस विधेयक को राजभवन में लंबित रखा गया है क्योंकि उच्च न्यायालय के फैसले को शासन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी हुई है। अब सवाल यह है कि जब 58 प्रतिशत आरक्षण कोटा असंवैधानिक है तो फिर 76 प्रतिशत कैसे स्वीकृत होगा? मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चलती रही और आरक्षण की व्यवस्था के भ्रम में प्रदेश की भर्ती परीक्षाओं और शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश की परीक्षाएं लटक गई। इस कारण छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से भर्ती के लिए अनुमति मांगने के प्रयास किए। इसी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दी लेकिन उसमें कोई स्पष्टता नहीं है।

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शिवसेना विवाद पर 21 फरवरी को फिर सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई https://samacharpacheesa.com/?p=6318 Fri, 17 Feb 2023 10:18:01 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6318 नईदिल्ली। महाराष्ट्र विधानसभा से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट में आज यानी शुक्रवार को सुनवाई हुई। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि इसे फिलहाल 7 जजों की पीठ के पास भेजने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने इस मामले में अगली तारीख देते हुए कहा कि अब फरवरी में इस बात पर गुणदोष के आधार पर विचार किया जाएगा। 21 फरवरी को कोर्ट इसपर विचार करेगा कि क्या विधायकों को अयोग्य ठहराने संबंधी विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों पर 2016 के फैसले में संदर्भ की आवश्यकता है।
समीक्षा याचिकाओं को वृहद पीठ को भेजने से इनकार
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने अयोग्यता याचिकाओं से निपटने के लिए विधानसभा अध्यक्षों की शक्तियों पर 2016 के नबाम रेबिया के फैसले पर पुनर्विचार के लिए महाराष्ट्र राजनीतिक संकट से संबंधित मामलों को फिलहाल सात-न्यायाधीशों की एक बड़ी बेंच के पास भेजने से इनकार कर दिया।
गुण दोष के आधार पर किया जाएगा फैसला
सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि 21 फरवरी को इस बात पर गुण-दोष के आधार पर विचार किया जाएगा कि विधायकों को अयोग्य ठहराने संबंधी विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों पर 2016 के फैसले में संदर्भ की आवश्यकता है या नहीं।
न्यायपालिका पर पूरा भरोसा- एकनाथ शिंदे
वहीं, महाराष्ट्र विधानसभा के राजनीतिक संकट मामले में महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा है कि हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। लोकतंत्र में बहुमत के साथ सत्ता में आना बहुत मायने रखता है। हम लोगों की बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं। इसलिए हम चाहते हैं कि न्यायपालिका योग्यता के आधार पर फैसला करे।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे और एनके कौल ने इसे वृहद पीठ को भेजे जाने का विरोध किया था। महाराष्ट्र के राज्यपाल की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी इसका विरोध किया था। पांच सदस्यीय एक संविधान पीठ ने 2016 में अरुणाचल प्रदेश के नबाम रेबिया के मामले पर फैसला दिया था कि यदि विधानसभा अध्यक्ष को हटाने के लिए नोटिस सदन में पहले से लंबित हो, तो वह विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए दी गई अर्जी पर कार्यवाही नहीं कर सकता।

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दिल्ली में आम आदमी पार्टी की मेयर उम्मीदवार की याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार https://samacharpacheesa.com/?p=5928 Fri, 27 Jan 2023 07:28:45 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5928 नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में मेयर पद के लिए आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार शैली ओबेरॉय की याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। कोर्ट मामले में तीन फरवरी को सुनवाई करेगी। डॉ. शैली ओबरॉय ने याचिका दाखिल करते हुए समयबद्ध तरीके से मेयर का चुनाव कराने की मांग की थी।
प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के महापौर पद का चुनाव जल्द कराने के संबंध में ओबेरॉय की दलीलों पर संज्ञान लिया। सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि इसे तीन फरवरी को सूचीबद्ध किया जाएगा।
दरअसल, दिल्ली में आम आदमी पार्टी की मेयर उम्मीदवार डॉ. शैली ओबरॉय ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दिसंबर में दिल्ली नगरपालिका के चुनाव हुए थे और तभी परिणाम भी आ गए थे। उसके बाद से अब तक मेयर के चुनाव नहीं हो सके हैं। जनवरी में दो बार 9 जनवरी और 24 जनवरी को मेयर चुनाव की तारीख तय की गई, लेकिन दोनों ही बार सदन हंगामे की भेंट चढ़ गया और चुनाव टल गए।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बोले चिदंबरम, केंद्र की कलाई पर स्वागत योग्य तमाचा https://samacharpacheesa.com/?p=5590 Mon, 02 Jan 2023 10:29:45 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5590  नईदिल्ली। पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने नोटबंदी के फैसले की बुद्धिमत्ता को बरकरार नहीं रखा है और न ही बहुमत ने यह निष्कर्ष निकाला है कि घोषित उद्देश्यों को प्राप्त किया गया था। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 4:1 के फैसले में केंद्र के 2016 के विमुद्रीकरण के कदम को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया और कहा कि 500 ​​रुपये और 1000 रुपये के मूल्यवर्ग के करेंसी नोटों के विमुद्रीकरण की कवायद को आनुपातिकता के आधार पर नहीं माना जा सकता है।
चिदंबरम ने एक ट्वीट में कहा कि हालांकि, यह इंगित करना आवश्यक है कि बहुमत ने निर्णय के ज्ञान को बरकरार नहीं रखा है और न ही बहुमत ने यह निष्कर्ष निकाला है कि घोषित उद्देश्यों को प्राप्त किया गया था। वास्तव में, बहुमत ने स्पष्ट कदम उठाए हैं। सवाल है कि क्या उद्देश्यों को हासिल किया गया था। एक बार माननीय उच्चतम न्यायालय ने कानून घोषित कर दिया तो हम इसे स्वीकार करने के लिए बाध्य हैं।” इस मामले में दो अलग-अलग निर्णय थे, जो जस्टिस बीआर गवई और वी नागरत्ना द्वारा सुनाए गए थे।
जस्टिस बीवी नागरत्ना की राय बाकी जजों से अलग रही। उन्होंने नोटबंदी के फैसले को गलत और गैरकानूनी बताते हुए कहा कि इसके लिए कानून बनना चाहिए था। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना ने नोटबंदी को “गैरकानूनी” कहा और कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के केंद्रीय बोर्ड को स्वतंत्र रूप से नोटबंदी की सिफारिश करनी चाहिए थी। न्यायाधीश ने कहा कि यह सरकार की सलाह से नहीं किया जाना चाहिए था।

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सुप्रीम कोर्ट ने नोटबंदी को बताया सही, कांग्रेस बेवजह कर रही थी हंगामा : रविशंकर प्रसाद https://samacharpacheesa.com/?p=5587 Mon, 02 Jan 2023 10:25:45 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5587  नईदिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने केंद्र सरकार के 2016 में 500 और 1000 रुपये की श्रृंखला वाले नोटों को बंद करने के फैसले को सोमवार को 4:1 के बहुमत के साथ सही ठहराया। हालंकि, कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही आधार बनाकर भाजपा पर निशाना साध रही है। इस सब के बीच भाजपा की ओर से विपक्षी दल पर पलटवार किया गया है। भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आज एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला आया है। उन्होंने कहा कि 2016 में मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसले, जिसमें 500 और 1,000 के नोटों को जो डिमोनेटाइज किया था, उसकी वैधानिकता को चुनौती देने वाली सारी याचिकाओं को कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया है।
भाजपा सांसद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने नोटबंदी को वैधानिकता को चुनौती देने वाली 58 याचिकाओं को अस्वीकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने भी इस पर हंगामा खड़ा किया था। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि नोटबंदी के अगले साल ही टैक्स कलेक्शन में 18% की वृद्धि हुई थी और 2.38 लाख शेल कंपनियां भी पकड़ी गई थीं। भाजपा नेता ने कहा कि ये पूरी नीति टेरर फंडिंग, फेक करेंसी और मनी लॉन्ड्रिंग आदि को रोकने के लिए की गई थी। उन्होंने कहा कि टेररिज्म की रीढ़ को तोड़ने में डिमोनेटाइज ने महत्वपूर्ण काम किया। यह फैसला देशहित में किया गया था और आज कोर्ट ने इस निर्णय को सही पाया है। जबकि कांग्रेस ने इसे लेकर काफी हंगामा किया था।
कांग्रेस का वार
पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय के फैसले के तुरंत बाद कहा कि “अल्पमत” के फैसले ने नोटबंदी में ‘अवैधता’ और ‘अनियमितताओं’ की ओर इशारा किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने एक ट्वीट में कहा कि एक बार माननीय उच्चतम न्यायालय ने कानून घोषित कर दिया है, तो हमें इसे स्वीकार करना ही होता है। हालांकि, यह इंगित करना आवश्यक है कि बहुमत ने निर्णय की बुद्धिमता को बरकरार नहीं रखा है, और न ही बहुमत ने यह निष्कर्ष निकाला है कि बताए गए उद्देश्य हासिल किए गए। उन्होंने कहा कि वास्तव में बहुमत ने इस सवाल को स्पष्ट कर दिया है कि क्या उद्देश्यों को हासिल किया गया या नहीं?

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नोटबंदी को सुप्रीम कोर्ट ने ‘सही फैसला’ बताकर मोदी सरकार को दी बड़ी राहत https://samacharpacheesa.com/?p=5585 Mon, 02 Jan 2023 10:21:33 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5585  नईदिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने साल 2016 में 1,000 रुपये और 500 रुपये के नोटों को बंद करने संबंधी सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली 58 याचिकाओं को खारिज करते हुए नोटबंदी के फैसले को सही ठहराया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के 2016 में 500 रुपए और 1000 रुपए के नोटों को बंद करने के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा है कि सरकार का फैसला एकदम सही था। सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति एस.ए. नजीर की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि नोटबंदी के दौरान सभी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया गया। सुप्रीम कोर्ट इस बात से भी संतुष्ट नजर आया कि नोटबंदी को लेकर सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच छह महीने तक बातचीत हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नोटबंदी से पहले केंद्र और आरबीआई के बीच सलाह-मशविरा हुआ था और इस तरह के फैसले को लाने के लिए एक उचित प्रक्रिया का पालन किया गया।
देखा जाये तो सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को नोटबंदी मामले में पूरी तरह क्लीन चिट देते हुए बड़ी राहत प्रदान की है। अभी तक विपक्ष की ओर से नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार को घेरा जाता था और आरोप लगाया जाता था कि नोटबंदी कर मोदी सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस बात से सहमत हुआ कि आतंकवाद के वित्त पोषण पर रोक लगाने और काले धन पर कुठाराघात के लिए सरकार का नोटबंदी का फैसला सही था।
हम आपको बता दें कि उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक को सात दिसंबर को निर्देश दिया था कि वे सरकार के 2016 में 1000 रुपये और 500 रुपये के नोट को बंद करने के फैसले से संबंधित प्रासंगिक रिकॉर्ड पेश करें। पीठ ने केंद्र के 2016 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, आरबीआई के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता पी चिदम्बरम तथा श्याम दीवान समेत याचिकाकर्ताओं के वकीलों की दलीलें सुनी थीं और अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
एक हजार और 500 रुपये के नोटों को बंद करने के फैसले को ‘गंभीर रूप से दोषपूर्ण’ बताते हुए चिदंबरम ने दलील दी थी कि केंद्र सरकार कानूनी निविदा से संबंधित किसी भी प्रस्ताव को अपने दम पर शुरू नहीं कर सकती है और यह केवल आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश पर किया जा सकता है। वहीं, वर्ष 2016 की नोटबंदी की कवायद पर फिर से विचार करने के सर्वोच्च न्यायालय के प्रयास का विरोध करते हुए सरकार ने कहा था कि अदालत ऐसे मामले का फैसला नहीं कर सकती है, जब ‘बीते वक्त में लौट कर’ कोई ठोस राहत नहीं दी जा सकती है।
हम आपको बता दें कि नोटबंदी और जीएसटी लागू करना मोदी सरकार के बड़े आर्थिक फैसलों में शुमार किये जाते हैं। जब नोटबंदी लागू की गयी थी तब स्वर्गीय अरुण जेटली वित्त मंत्री थे और आरबीआई गवर्नर के रूप में उर्जित पटेल काम संभाल रहे थे। नोटबंदी के बाद सभी बैंकों के बाहर लाइनें लग गयी थीं क्योंकि लोग पुराने नोट जमा कराने और 2000 तथा 500 रुपए के नये नोट निकालना चाहते थे। उस समय से भारत में डिजिटल पेमेंट को जो बढ़ावा मिला यह उसी का परिणाम है कि डिजिटल भुगतान के मामले में आज भारत कई विकसित देशों को भी पीछे छोड़ चुका है।

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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा बिहार की जहरीली शराब का मामला, एसआईटी से जांच कराने की मांग https://samacharpacheesa.com/?p=5263 Fri, 16 Dec 2022 07:56:06 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5263 नई दिल्ली। बिहार में सारण के मशरक के आधा दर्जन गांवों में जहरीली शराब की वजह से मचे हाहाकार के बीच सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लगाई गई है। याचिका में मामले की जांच एसआईटी से करवाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि मामले की स्वतंत्र जांच की जाए।
इसके साथ ही याचिका में अवैध शराब के निर्माण, व्यापार और बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए एक्शन प्लान तैयार करने की मांग की गई है। जनहित याचिका में पीडि़तों के परिवार को मुआवजा देने की भी मांग की गई है।
क्या है मामला?
दरअसल, सारण के मशरक के आधा दर्जन गांवों में मंगलवार से शुरू हुआ मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार सुबह तक यहां जान गंवाने वालों का आंकड़ा 60 तक पहुंच गया है। इस बीच खबर है कि सीवान में भगवानपुर प्रखंड के सोधनी और ब्रह्मा स्थान गांव में जहरीली शराब पीने से चार लोगों की मौत हो गई है।
नीतीश कुमार ने कही थी यह बात
इससे पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जहरीली शराब से मौतों पर प्रतिक्रिया देते हुए गुरुवार को कहा था कि जो पीएगा वो मरेगा। बिहार में शराब के सेवन पर रोक है। लोगों को समझाने की जरूरत है। उन्होंने कहा था कि जो गड़बड़ कर रहा, उसे पकडि़ए। उसे अच्छा काम करने के लिए प्रेरित करिए। हम तो बापू और बिहार की महिलाओं की इच्छा से शराबबंदी लागू किए हैं।
भाजपा ने मांगा इस्तीफा
वहीं, केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने नीतीश पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से आज बिहार में जहरीली शराब से मौतें हो रही हैं, ये चिंता का विषय है। हमारे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आपा खो कर जनता पर बरस रहे हैं और कह रहे हैं कि जो पिएगा वो तो मरेगा ही। ऐसे लोगों पर स्नढ्ढक्र होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की सरकार बेअसरदार है। कोई पीछे से सरकार चला रहा है। नीतीश कुमार का अब साया समाप्त हो गया। नीतीश बाबू आप इस्तीफा दो। शराबबंदी के पीछे पूरा भ्रष्टाचार का बाजार गर्म है। आपके आसपास शराबियों की भरमार है।

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