स्वागत – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Wed, 01 Mar 2023 05:50:38 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 ‘बीरन माला में उलझी राजनैतिक सोने की गुत्थी https://samacharpacheesa.com/?p=6484 Wed, 01 Mar 2023 05:50:38 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6484 कांग्रेस का तीन दिवसीय राष्ट्रीय महाधिवेशन सम्पन्न हो गया। अनेक अड़चनों के बाद भी कांग्रेस के लिहाज से अधिवेशन उम्मीद से अधिक सफल रहा। छतीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति से जुड़ी व बैगा आदिवासी महिलाओं द्वारा बांस व घास से निकाले महीन रेशों से बनाई गई बीरन माला। इसी बीरन माला को पहना कर देश भर से आये अतिथियों का मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व अन्य नेताओं ने स्वागत किया। पके बांस व सुखी घास के धागे सुनहरे रंग के होते हैं तो माला भी सुनहरे रंग थी। प्रदेश में विपक्षी दल भाजपा ने दूर की कौड़ी खोजते हुए आरोप हवा में तैरा दिया कि कांग्रेस का भ्रष्टाचार इतना बढ़ गया है। जनता के पैसे की लूट से अतिथियों का स्वागत स्वर्ण की माला से किया गया , यानी 20000 मेहमान तो उतनी ही स्वर्ण माला। कह दिया गया कि कांग्रेस का भ्रष्टाचार उजागर हो गया। पूरे देश में फैलाने के साथ आनन फानन में भाजपा के आईटी सेल ने प्रचार का दायरा बढ़ाकर इसे अंतरराष्ट्रीय तक पहुंचा दिया। एक दिन के कुछ घंटों में ही बात फैल गई चर्चा शुरू हो गई। भाजपा आईटी सेल अच्छी तरह जानता था कि बात अगर जाएगी तो दूर तलक जाएगी। वाकई चली भी गई। कांग्रेस की छतीसगढ़ सरकार इस बेवजह झूठे हमले से भौंचक रह गई। कांग्रेस भी तत्काल सक्रिय हुई और जवाब एक बैगा आदिवासी किसान के वीडियो वायरल होने के साथ आया। वीडियो में बैगा आदिवासी बीरन माला कैसे गूंथा जाता है उसकी पूरी प्रक्रिया समझा रहा है, और एक आदिवासी महिला माला गूंथ रही है। उसमें दिखाया गया कि बांस की कमची के तार कैसे अलग किये जाते है और एक खास प्रकार की घास के रेशों को तार की तरह कैसे निकाला जाता है। माला कैसे गुंथी जाती है। यह वीडियो भी बहुत से लोगों ने देखा जरूर पर पहले उड़ाए गये आरोपों के असर पर भारी नही पड़ पाए। इसे इन मायनों में देखें कि पहला झूठ तब तक लोगों के दिमाग में सच का रूप ले चुका था। देश के लोग इसकी चर्चा करने लगे थे। बात बहुत आगे बढ़ चुकी थी। सोने की नहीं छतीसगढ़ के घास की माला थी। ये समझ में सबके आ गया हो ऐसा वीडियो देख कर लगा नहीं। कलयुग की वतर्मान राजनीति में झूठ प्रतिष्ठा पा गया। विपक्षी झूठ बोलकर भी खुश थे। राजनैतिक फायदा मिल रहा था इसलिए सच सामने आने के बाद भी अपने इस झूठ में संशोधन नहीं किया, ना मैसेज हटाया। राजनीतिक सुचिता का पालन नहीं किया। आज भी उनका यह झूठ देश की जनचर्चा में तैरता रहा। छतीसगढ़ के लोगों के बीच जरूर यह स्पष्ट हो गया कि भाजपा ने यह झूठ बोलकर हमारी प्रदेश के आदिवासियों की संस्कृति व कला का लगभग अपमान ही किया है। जनता क्या जवाब देगी यह कहा नही जा सकता क्योंकि भगवान की लाठी की तरह जनता की लाठी में भी आवाज नहीं होती। जिनकी समझ में सच आ गया वे लोग कह रहे हैं , प्रदेश भाजपा को ये हो क्या गया है ? घास की माला उन्हें सोने की माला किसे दिखाई देने लगी है। भूपेश बघेल ने इसी पर तंज कसते हुए कहा है कि अडाणी के दोस्तों को घास भी सोना दिखाई देने लगा है। कांग्रेसजनों के अनुसार महाधिवेशन के दौर में इस आयोजन को पहले तो ईडी के माध्यम से असफल करने के प्रयास किये गए। भूपेश बघेल ने साफ कहा कि हम अंग्रेजों से नहीं डरे तो ईडी से और भाजपा से क्या डरेंगे। हुंकार भरते हुए कहा कि हमारा अधिवेशन पूरी तरह से सफल होगा। सफल हो भी गया। भाजपा को सूझ नहीं रहा था , कि कैसे अधिवेशन में अड़ंगा लगाएं। इसलिए कुछ भी आरोप लगा रही है। इसका एक और उदाहरण बताया गया कि अब ये लोग माला के बाद छाता पर भी घटिया राजनीति में उतर गए। यह उनकी छोटी मानसिकता का प्रतीक है। सभी जानते हैं कि सोनिया गांधी अस्वस्थ होने के बाद भी रायपुर अधिवेशन के राजनीतिक व इतिहासिक अहमियत को समझते हुए इसका हिस्सा बनने यहां आई। इसी कारण उन्हें धूप से बचाने उन के सर पर छाता लगाया गया। इस संवेदन शील विषय को भी राजनैतिक आरोप का हथियार बनाया गया। जिसका राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष खरगे ने माकूल जवाब दे दिया। छोटी छोटी बातों को मुद्दा बनाने वाली इस पार्टी के पास कोई भी बड़ा मुद्दा प्रदेश सरकार के खिलाफ है ही नहीं। इसीलिए यह इस घटिया राजनीति पर उतर गई है।
आरोपों व प्रत्यारोपों के दौर में एक बात महत्वपूर्ण है। बुद्धिजीवियों का कथन है कि भाजपा जानते बुझते भी यह कर सकती है, क्योंकि वो जानती है कि छतीसगढ़ में भले ही इस चर्चा का शमन बीरन माला की सच्चाई सामने आने के बाद हो जाये। देश की अवाम के बीच वे कांग्रेस के शीर्ष पर पहुंच रहे स्टार प्रचारक भूपेश बघेल की छवि को सोना बांटने वाला मुख्यमंत्री के रूप में प्रतिष्ठा दिलाने का काम तो कर ही लेंगें। इसी को कहते हैं कि झूठ को सच की तरह फैलाने की कला। कांग्रेस को इस छोटे से आरोप के भीतर उभरे बड़े आयतन को समझ देश स्तर पर कैसे इसका बचाव किया जाए इस पर सोचना पड़ रहा है। भले ही सारी कवायदे हुईं लेकिन यह तो चर्चा में है कि कांग्रेस का यह राष्ट्रीय महाधिवेशन अनेक मायनों में बेहद सफल व ऐतिहासिक रहा है।

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महबूबा मुफ्ती ने भारत जोड़ो यात्रा का किया स्वागत https://samacharpacheesa.com/?p=5786 Wed, 18 Jan 2023 11:13:45 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5786 श्रीनगर। कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा फिलहाल हिमाचल प्रदेश में है। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में यह यात्रा जम्मू कश्मीर में प्रवेश करेगी। जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में 30 जनवरी को इस यात्रा का समापन होगा। 30 जनवरी को राहुल गांधी श्रीनगर में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। इसको लेकर जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने राहुल गांधी के भारत जोड़ो यात्रा का जम्मू कश्मीर में स्वागत किया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि सांप्रदायिक राजनीति का सबसे ज्यादा खामियाजा जम्मू-कश्मीर को ही भुगतना पड़ा है।
अपने बयान में महबूबा मुफ्ती ने कहा कि सांप्रदायिक राजनीति का सबसे ज्यादा खामियाजा जम्मू-कश्मीर को भुगतना पड़ा। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि कांग्रेस के पास अपनी विरासत, भारत के विचार, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक भारत को पुनः प्राप्त करने के लिए भारत जोड़ो यात्रा के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं था। इसलिए, हम भारत जोड़ो यात्रा का स्वागत करते हैं और हम इसमें भाग लेंगे। पूर्व मंत्री लाल सिंह के भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होने पर महबूबा मुफ्ती ने कहा कि राहुल गांधी सड़कों पर हैं, हजारों लोग उनके साथ जुड़ रहे हैं और वह देश का ताना-बाना बुनने की कोशिश कर रहे हैं। मेरे लिए इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन उनके साथ शामिल हो रहा है, क्या मकसद है।
इससे पहले जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के प्रमुख फारुख अब्दुल्ला भी भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हो चुके हैं। भारत जोड़ो यात्रा जब उत्तर प्रदेश में थी तब फारूक अब्दुल्ला इसमें शामिल हुए थे। यह पदयात्रा अभी तक तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब से होकर गुजर चुकी है। राहुल गांधी ने दावा किया है कि भाजपा ने बेरोजगारी और महंगाई जैसे दो महत्वपूर्ण मुद्दे दरकिनार कर दिए हैं। हमने चार महीने पहले कन्याकुमारी से यह यात्रा शुरू की थी, ताकि लोगों को एकजुट किया जाए, उन्हें साथ लाया जाए और ये मुद्दे उठाए जाएं।

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हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर का भाजपा कार्यालय में तिलक लगाकर स्वागत https://samacharpacheesa.com/?p=5143 Sat, 10 Dec 2022 07:31:27 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5143 अहमदाबाद। गुजरात में भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल की है जिसके बाद सरकार बनाने को लेकर कवायत तेज हो चली है। इस बीच शनिवार को नवनिर्वाचित भाजपा विधायक बैठक के लिए गांधीनगर स्थित पार्टी कार्यालय पहुंचे। यहां भाजपा के नवनिर्वाचित विधायकों का तिलक लगाकर और मिठाई खिलाकर स्वागत किया गया।
नवनिर्वाचित भाजपा विधायकों का गांधीनगर स्थित भाजपा पार्टी कार्यालय कमलम में स्वागत किया गया। पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी कार्यालय पहुंचे हैं। नवनिर्वाचित विधायक हार्दिक पटेल ने भाजपा कार्यालय पहुंचने के बाद कहा कि ये सभी गुजरातियों के लिए बड़ा दिन है कि एक बार फिर भाजपा की सरकार बनी है। विधायक दल की बैठक में पार्टी का जो भी फैसला होगा उसे सभी 157 विधायक स्वीकार करेंगे। हम सब ये ही मानते हैं कि पार्टी का नेतृत्व ही गुजरात को और मजबूती देगा।
अल्पेश ठाकोर भी पहुंचे बैठक में
भाजपा विधायक अल्पेश ठाकोर भी बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे। उन्होंने भाजपा कार्यालय में पहुंचने के बाद कहा कि मैं नरेंद्र मोदी और अमित शाह के साथ-साथ भूपेंद्र पटेल और सीआर पाटिल को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने मुझे गांधीनगर दक्षिण से उम्मीदवार के रूप में खड़ा किया। मुझे शानदार जीत दिलाने के लिए मैं लोगों का भी शुक्रिया अदा करता हूं। लोग विकास की राजनीति के लिए नरेंद्र मोदी पर भरोसा करते हैं, मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं।
भूपेंद्र पटेल होंगे मुख्यमंत्री
आपको बता दें कि भाजपा ने पहले ही कह दिया था कि यदि वह सत्ता में आती है तो भूपेंद्र पटेल ही मुख्यमंत्री बनेंगे। इससे साफ है कि पटेल ही सूबे के सीएम हो सकते हैं जो 12 दिसंबर को शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत बीजेपी के कई दिग्गज नेता शामिल होंगे।
गुजरात कैबिनेट में किसे मिल सकती है जगह
भूपेंद्र पटेल के संभावित मंत्रिमंडल में सभी जातियों और सभी क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को जगह देने के कयास लगाये जा रहे हैं। मंत्रिमंडल में नौजवान चेहरे भी देखने को मिल सकते हैं। वहीं कुछ पुराने अनुभवी लोगों को भी इसमें जगह मिल सकती है। मीडिया में जो खबरें चल रहीं हैं उसके अनुसार अल्पेश ठाकोर, हार्दिक पटेल, हर्ष संघवी, जीतू वाघानी, और पूर्णेश मोदी सहित कुल 10 से 11 कैबिनेट मंत्री बनाये जा सकते हैं। वहीं 12 से 14 लोगों को राज्य मंत्री का दर्जा मंत्रिमंडल में दिया जा सकता है। यहां चर्चा कर दें कि नियम के मुताबिक गुजरात में ज्यादा से ज्यादा 27 मंत्री ही हो सकते हैं।

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