हिंदुत्व – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Wed, 14 Jun 2023 08:13:24 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 छत्तीसगढ़-मप्र में हिंदुत्व की राह पर कांग्रेस https://samacharpacheesa.com/?p=7080 Wed, 14 Jun 2023 08:13:23 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7080 अविभाजित मध्य प्रदेश को आमतौर पर भाजपा के हिंदुत्व की काट के रूप में अब इसी मध्य प्रदेश और इससे अलग होकर बने छत्तीसगढ़ को कांग्रेस अपने सॉफ्ट हिंदुत्व की प्रयोगशाला बनाने का प्रयास कर रही है। 2018 में कांग्रेस के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद गांधी परिवार के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने भूपेश बघेल ने बहुत जल्द ही यह भांप लिया कि अगर छत्तीसगढ़ में निर्बाध रूप से सरकार चलानी है तो हिंदुत्व के रास्ते पर चलना होगा और उसके बाद लोगों ने देखा किस तरह से बघेल ने एक-एक कर राज्य भाजपा से हिंदुत्व से जुड़े मुद्दों को छीनना शुरू कर दिया। छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव 2023 के लिए भाजपा और कांग्रेस में हिंदुत्ववादी राजनीति करने की होड़ लगी हुई है। इस बार दोनों पार्टियां हिंदुत्व को मुद्दा बनाकर चुनावी प्रचार कर रही है। दोनों पार्टियों में होड़ लगी है कि कौन-सी पार्टी हिंदुत्व की राजनीति में आगे निकलती है। गोबर योजना से लेकर, राम वन गमन परिपथ, रामायण प्रतियोगिता, हनुमान चालीसा का पाठ और गोधन न्याय योजना जैसी परियोजनाओं को अपना कर, घोषणाएं करके छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार राज्य के हिंदू मतदाताओं को पुरजोर तरीके से और लगातार लुभाने का प्रयास कर रही है। मध्य प्रदेश में 2018 में चुनाव जीतकर गांधी परिवार के आशीर्वाद से मुख्यमंत्री बनने वाले कमलनाथ को जल्द ही भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत की मदद से कुर्सी से हटा कर अपने शिवराज सिंह चौहान को फिर से राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया लेकिन इसके बाद पूरे प्रदेश में भ्रमण कर रहे कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की जोड़ी को जल्द ही हिंदुत्व की राजनीति की अहमियत का भी अहसास हो गया और इसके बाद कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में भी हिंदुत्व की राजनीति पर ही चलने का फैसला कर लिया। इसके बाद ही कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के फिलहाल सबसे बड़े और एकमात्र दावेदार नजर आ रहे कमलनाथ ने अपनी पूजा करती तस्वीरों को सार्वजनिक रूप से शेयर करना शुरू कर दिया, बजरंग सेना का कांग्रेस में विलय कराया और सबसे खास बात यह है कि किसानों, बेरोजगारों, हड़तालों और आदिवासियों सहित तमाम मुद्दों पर शिवराज सरकार को घेरने वाले कमलनाथ बहुत ही जोर-शोर से और प्रमुखता से उज्जैन के महाकाल में गिरी देव प्रतिमाओं का भी मुद्दा उठाकर हिंदू मतदाताओं को खास संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं। यहां तक कि राज्य में चुनावी अभियान का श्रीगणेश करने के लिए मध्य प्रदेश पहुंची प्रियंका गांधी ने भी पहले मां नर्मदा की पूजा अर्चना और आरती कर अपने इरादों को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया। प्रियंका गांधी ने आरोप लगाते हुए यहां तक कह डाला कि भाजपा की सरकार ने तो घोटालों के मामले में मां नर्मदा और महादेव के महाकाल कॉरिडोर तक नहीं छोड़ा। साफ-साफ दिखाई दे रहा है कि भाजपा से लगातार चुनाव हारने वाली कांग्रेस ने अब भाजपा की हिंदुत्व वाली पिच पर ही खेलकर उसे हराने का मंसूबा बना लिया है और इस साल का विधानसभा चुनाव कांग्रेस की रणनीति का एक टेस्ट केस माना जा सकता है।

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कांग्रेस ने फिर भाजपा को दे दिया मुद्दा https://samacharpacheesa.com/?p=6835 Fri, 05 May 2023 06:46:44 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6835 कर्नाटक में चुनाव के कुछ रोज ही बाकी है और कांग्रेस ने भाजपा को ऐसा सियासी मुद्दा दे दिया, जिसमें वह न चाहते हुए भी हिंदुत्व की राह पर चल पड़ा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि दरअसल बीते चुनावों में भी भाजपा को कांग्रेस ने ऐसे ही बैठे-बिठाए हिंदुत्व के मुद्दे दे दिए, जिसमें कांग्रेस को हमेशा मात ही खानी पड़ी। फिलहाल कर्नाटक में हनुमान और सांप को भाजपा ने सियासी मैदान में हिंदुत्व की राह पर आगे बढ़ा दिया है। सियासी गलियारों में चर्चा इसी बात की भी हो रही है कि क्या 10 मई को होने वाले चुनाव में बजरंगबली और सांप से सियासी रंग गाढ़ा होगा। यह भाजपा की अपनी रणनीति है और उनकी अपनी विचारधारा है। लेकिन उनके इसी विचारधारा को कांग्रेस के नेता किसी न किसी बहाने से ऐसी धार दे देते हैं, जो कांग्रेस के लिए उल्टा पड़ जाती है। जब कर्नाटक में कांग्रेस ने बजरंग दल की तुलना पीएफआई से करते हुए उस पर सख्ती बरतने की बात कही, तो भाजपा के लिए कांग्रेस के मेनिफेस्टो से सियासी लड़ाई लडऩे की एक नई राह निकल आई। बजरंग दल पर सख्ती बरतने वाला मेनिफेस्टो जारी कर कांग्रेस ने भाजपा को बैठे-बिठाए ऐसा मुद्दा दे दिया, जिसे भाजपा ने हनुमानजी से जोड़कर अपनी सियासी पार्टी में उसका जमकर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। इस पूरे मामले में अब चर्चा इस बात की शुरू हो गई है कि क्या बजरंग दल पर सख्ती किए जाने और भाजपा को इस पूरे मामले में हनुमानजी से जोडऩे का सियासी फायदा किसे होने वाला है। इसमें कोई शक नहीं है कि कर्नाटक में सत्तारूढ़ भाजपा को कांग्रेस से मजबूत चुनौती मिल रही है। इस चुनौती के पीछे कई कारण है, जिसकी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से लेकर राज्य स्तरीय नेतृत्व को बखूबी जानकारी है। कर्नाटक के चुनाव में एक तो पहले से ही हनुमानजी की एंट्री हो चुकी थी। हनुमान और भगवान राम के अयोध्या और कर्नाटक के आपसी कनेक्शन को चुनावी रैलियों में भाजपा के नेताओं की ओर से लगातार जिक्र भी किया जा रहा था। ऐसे मौके पर कांग्रेस ने अपने मेनिफेस्टो में बजरंग दल का जिक्र करके भाजपा को हिंदुत्व के मुद्दे को और आगे बढ़ाने का मौका दे दिया। बजरंग दल के मुद्दे पर हनुमानजी को आगे करके भाजपा जिस तरीके से अपने हिंदुत्व के मुद्दे को आगे बढ़ा रही है, उसका बहुत व्यापक स्तर पर तो असर नहीं होगा। कांग्रेस ऐसा पहले भी कर चुकी है। वह कहते हैं 2017 में गुजरात में हुए विधानसभा के चुनावों में भी जैसे ही राहुल गांधी ने मंदिरों में जाकर दर्शन करने शुरू किए वैसे ही भाजपा के शासन के दौरान की नाराजगी और चुनाव के असली मुद्दे किनारे हो गए। जब हिंदुत्व और हिंदुत्व की पार्टी की आती है, तो भाजपा हमेशा बाजी मारती है। इसलिए भाजपा के पास बजरंग दल के नाम से हिंदुत्व के मुद्दे को आगे रखकर अपना सियासी दांव और तेजी से बढ़ाना शुरू कर दिया। इसी तरह जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सांप कहा, तो नरेंद्र मोदी ने अपनी रैली में पलटवार करते हुए सांप को शिव का आभूषण बताया। वह कहते हैं कि कांग्रेस के इस दांव को भी भाजपा ने हिंदुत्व के रास्ते से ही आगे बढ़ाया। कर्नाटक कांग्रेस पार्टी के नेता एन सथीशन कहते हैं कि कर्नाटक राज्य में पुलिस के रजिस्टर में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के खिलाफ कई मामले दर्ज हुए। जिस तरीके की कार्यप्रणाली बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की ओर से की जाती रही है, उसी के आधार पर उनकी पार्टी ऐसे सभी संगठनों के खिलाफ सख्ती से निपटने की बात मेनिफेस्टो में लेकर आई। लेकिन भाजपा ने बजरंग दल को हनुमानजी से जोड़ते हुए अपने हिंदुत्व के मुद्दे से जोड़कर स्थानीय लोगों को बहकाने का काम शुरू कर दिया। सथिशन कहते हैं कि भाजपा को तो हिंदुत्व के मुद्दे पर किसी भी तरीके के नाम का बस बहाना चाहिए। वह कहते हैं उनकी पार्टी ने कर्नाटक के सभी ग्राम देवियों के लिए बीस हजार रुपये और राज्य के पौने दो लाख मंदिरों के लिए विशेष पूजा निधि जारी करने की भी घोषणा की है। इसे लेकर भाजपा में कोई मुद्दा नहीं बनाया, लेकिन जैसे ही बात बजरंग दल की आई, तो वह हनुमानजी का नाम लेकर लोगों को दिग्भ्रमित करने लगे।

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क्या हिंदुत्व-विरासत बन पायेगा चुनाव का विजयी नारा https://samacharpacheesa.com/?p=5773 Wed, 18 Jan 2023 05:45:33 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5773 लोग पहले ही कह रहे थे। कांग्रेस तो इस बात को खुल कर कह चुकी है। भाजपा छतीसगढ़ में भी हिन्दू-मुस्लिम के बीच खाई खोदकर साम्प्रदायिक राजनीति की ओर ध्यान केंद्रित करेगी। सात राज्यों के अगले चुनावों में भाजपा के प्रचार के दौरान हिन्दू अचानक फिर खतरे में आ जायेगा। छतीसगढ़ व अन्य राज्यों में अपने इसी एजेंडे पर भाजपा ने अपना काम भी शुरू भी कर दिया है। छतीसगढ़ से इसकी शुरुवात नारायणपुर जिले से हो चुकी है। धर्मांतरण के मुद्दे को फिर एक बार हवा दी गई है। वहां लगी चिंगारी को चुनाव के पहले तक धीरे धीरे हवा देते हुए आग के रूप में तब्दील करने की तैयारी होगी। नेताओं के आरोप प्रत्यारोपों से तो यही प्रतीत होता है। प्रदेश सरकार को भी खुफिया विभाग ने इसी मुद्दे पर सतर्क किया है। कहीं भी कुछ भी घट सकता है। इस दल के अनुसांगिक संगठन के लोग टिड्डी दल की भांति फैल कर ,खास कर आदिवासी क्षेत्रों में अपने हिन्दू इतिहास व परम्पराओं को जीवित करने में जुट गए हैं। अभी इस मामले में कबीर के धाम के बाद नारायण की पुरी में मिली सफलता ने उत्साह दोगुना कर दिया है।आग भड़का दी गई है। विस्तार होगा यह पूरी संभावना है। यही रिपोर्ट प्रदेश खुफिया विभाग ने सरकार को दी है। सरकार ने ज्यादा देरी न करते हुए 1987 से बोतल में कैद रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के जिन्न को फिर से बाहर निकाल कर जिलों के मुखियाओं के पास खुला छोड़ दिया है। जिन्न के लिए आदेश है कि जिसे भडकाते देखे, उसे अपने घेरे में ले लिया जाए। एक अजूबा जो किसी को समझ नहीं आ रहा है। शायद कभी समझ आएगा भी नहीं। धर्मांतरण तो मध्यप्रदेश शासन काल से आज तक निरंतर जारी है। देश में भी जारी है। कभी कम कभी ज्यादा यह शुरू ही रहता है। संविधान के अनुच्छेद 24-25 के द्वारा धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है। उसमें लिखा गया है कि अंत:करण की और धर्म के अबाध रूप से मानने ,आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता- लोक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ तथा इस भाग के अन्य उपबंधों के रहते हुए,सभी व्यक्तियों को अंत:करण की स्वतंत्रता का और धर्म के अबाध रूप से मानने ,आचरण करने,प्रचार करने का सामान हक होगा। एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह दलील दी गई थी कि प्रचार करने के अंतर्गत धर्म परिवर्तन का अधिकार है। न्यायलय ने इस दलील को अस्वीकार कर दिया। तब मध्यप्रदेश व उड़ीसा राज्य ने विधान पारित करके किसी व्यक्ति का बलपूर्वक ,कपटपूर्वक,या लालच देकर धर्म परिवर्तन करना दंडनीय अपराध बना दिया गया। इस अधिनियम को बाद में अरुणाचल प्रदेश ने भी अपनाया। दरअसल के .सी .नियोगी की अध्यक्षता में गठित समिति ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। कहा गया था कि ईसाई मिशनरी बल व कपट द्वारा धर्म परिवर्तन करने में लगे हुए हैं। इसी नियोगी कमेटी के रिपोर्ट को आधार बना कर राज्यों ने यह अधिनियम बनाए थे। वास्तव में देखा जाए तो धर्मांतरण राष्ट्रीय समस्या है और इस पर केंद्रीय कानून बनाना चाहिए। ऐसा भी नहीं है कि केंद्र स्तर पर इसके प्रयास नहीं हुए। ओम प्रकाश त्यागी ने 1977 में इन अवांछित गतिविधियों को रोकने के लिए एक विधेयक लोक सभा में प्रस्तुत किया था। यदि यह विधेयक पारित हो जाता तो सम्पूर्ण भारत में लागू हो जाता। कुछ तत्वों ने इस विधेयक के विरुद्ध बहुत शोर मचाया। ऐसा लगा मानों ईसाई धर्म पर प्रतिबंध लगाया जा रहा हो। लोक सभा के विघटन के साथ ही यह विधेयक व्यपगत हो कर ठंडे बस्ते में चला गया। तब से आज तक यह मुद्दा हिंदुत्व जगाने के राजनैतिक साधन के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। लगता तो यही है कि कोई इस समस्या का स्थायी हल नहीं करना चाहता। हमारे छतीसगढ़ के निर्माण के बाद स्व.अजीत जोगी पर धर्मांतरण के मामले में सर्वाधिक हमले किये गए। भाजपा को फायदा भी हुआ। उसकी ऐसी सरकार बनी की 15 साल तक बनी रही। धर्मांतरण तो तब भी चलता रहा लेकिन 15 साल उसकी चर्चा से भाजपा ने पूरी तरह परहेज किया। क्यों किया ? 2018 में फिर कांग्रेस की सरकार आई है। बोतल से जिन्न रूपी मुद्दा बाहर निकाल लिया गया है। चर्चाएं फिर शुरू हो गईं हैं। तेजी से हवा में फैलाया जा रहा है। आश्चर्य तो इस बात का है कि भाजपा की 15 साल सरकार रही लेकिन किसी ने नहीं सोचा कि मध्यप्रदेश – उड़ीसा-अरुणाचल की तरह अपना इस पर कानून बना लिया जाए। केंद्र में अपनी सरकार है, केंद्रीय कानून बनवा लिया जाए। कांग्रेस व भाजपा दोनों ने ध्यान नहीं दिया। कांग्रेस कह सकती है कि यह उनका एजेंडा ही नहीं है। कुल मिला कर जनता को यह समझ में आने लगा है कि धर्मांतरण का निदान कोई नहीं चाहता। लगता है कि सभी इस समस्या को जिंदा रखना चाहते हैं। समस्या रहेगी तो भाजपा को ही ज्यादा होगा। वर्ग भेद से हिदुत्व जागता है और भाजपा इसे जगा कर रखना भी चाहती है, हिदुत्व जागेगा, हिन्दू एक होगा। यही ध्रुवीकरण उसे सत्ता पर बनाए रखेगा। अब तो केंद्र ने भी कह दिया कि सात राज्यों के चुनाव जीतना जरूरी है। इसके लिए हिदुत्व व अपनी विरासत को बताना जरूरी है। चुनाव के केंद्र में यही मुद्दे होंगें। देखिए आगे आगे होता है क्या ?

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