हिमाचल प्रदेश – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Sat, 10 Dec 2022 07:08:41 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 कौन होगा हिमाचल प्रदेश का नया मुख्यमंत्री, पार्टी अध्यक्ष लगाएंगे मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर https://samacharpacheesa.com/?p=5137 Sat, 10 Dec 2022 07:08:41 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5137 शिमला। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के नवनिर्वाचित विधायकों की शुक्रवार को यहां बैठक हुई और उन्होंने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर पार्टी अध्यक्ष को उनका नेता चुनने के लिए अधिकृत किया। कांग्रेस विधायक दल की बैठक से पहले मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल प्रतिभा सिंह, मुकेश अग्निहोत्री और सुखविंदर सिंह सुक्खू अपने समर्थकों के साथ राज्य की राजधानी शिमला में पार्टी कार्यालय पहुंचे। उनके समर्थकों ने उनके पक्ष में नारे लगाए। कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश की 68 सदस्यीय विधानसभा में 40 सीट जीती है। विधानसभा चुनाव के लिए 12 नवंबर को मतदान हुआ था और बृहस्पतिवार को परिणाम घोषित हुए।
बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के हिमाचल प्रदेश से जुड़े मामलों के प्रभारी राजीव शुक्ला ने कहा कि एक पंक्ति का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया और अब पार्टी के पर्यवेक्षक छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा शनिवार को पार्टी आलाकमान को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। कांग्रेस पार्टी के भीतर गुटबाजी का खंडन करते हुए, शुक्ला ने कहा कि विधायक दल के नेता के पद के लिए कोई नाम सामने नहीं आया और विधायकों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि पार्टी नेतृत्व इस पर निर्णय करे। शुक्ला ने कहा कि विधायक दल के नेता के पद के लिए कोई नाम सामने नहीं आया और विधायकों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि पार्टी नेतृत्व इस पर निर्णय करे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस राज्य में सरकार बनाने के अवसर को लेकर खुश है और लोगों को दी गई 10 गारंटियों को पूरा करने और बेहतर शासन प्रदान करने के लिए वह सब कुछ करेगी। इससे पहले बघेल और हुड्डा के साथ राजीव शुक्ला ने राज्यपाल से मुलाकात की थी और उन्हें पार्टी के विजयी उम्मीदवारों की सूची सौंपी थी। राज्यपाल से मिले कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में शामिल हरियाणा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता करण सिंह दलाल ने बताया कि उन्होंने सूची देते हुए कहा, हम राज्य में सरकार बनाने को लेकर दावा पेश करने के लिए समय मांगने आए हैं। पार्टी ने बहुमत से विधानसभा चुनाव जीता है।
बताया कि उन्होंने सूची देते हुए कहा, हम राज्य में सरकार बनाने को लेकर दावा पेश करने के लिए समय मांगने आए हैं। पार्टी ने बहुमत से विधानसभा चुनाव जीता है। पर्यवेक्षकों के राज्यपाल से मिलने जाने से पहले प्रदेश कांग्रेस प्रमुख प्रतिभा सिंह के समर्थकों ने एक होटल के पास उनके वाहन को घेर लिया। उन्होंने नारेबाजी करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के परिवार से होना चाहिए। इसी तरह की नारेबाजी कांग्रेस कार्यालय के बाहर भी हुई। यह घटना तब हुई जब केंद्रीय पर्यवेक्षक शुक्ला के साथ राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मिलने जा रहे थे। इस बीच दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में नवनिर्वाचित विधायकों की राय जानने की कोशिश की जा रही है ताकि इस बात पर आम सहमति बने कि उनका नेता कौन होगा। उन्होंने कहा कि राज्य में भेजे गए पर्यवेक्षक पार्टी के सभी विधायकों के व्यक्तिगत विचार जान रहे हैं और वे उन्हें अपनी राय बताएंगे, जिसके आधार पर पार्टी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पर फैसला करेगी।
कांग्रेस विधायक दल की बैठक अपराह्न तीन बजे शुरू होने वाली थी, लेकिन इसमें देरी हुई क्योंकि कई विधायक पहले दूर-दराज के इलाकों से शिमला नहीं पहुंच पाए थे। विधायक दल की बैठक से पहले कांग्रेस नेता सुक्खू ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं हूं। मैं सिर्फ एक कांग्रेस कार्यकर्ता हूं और आलाकमान जो भी फैसला लेगा, उसे स्वीकार किया जाएगा। कांग्रेस सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह (66) ने संकेत दिया है कि वह मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं।
उनके बेटे एवं शिमला ग्रामीण क्षेत्र से कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह ने कहा था कि मैं शीर्ष पद की दौड़ में नहीं हूं, लेकिन मेरी मां मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में से एक हैं। उन्होंने कहा था कि सभी विजयी विधायकों की बैठक बुलाई गई है और अंतिम निर्णय आलाकमान द्वारा लिया जाएगा, जो सभी को स्वीकार्य होगा। सिंह ने यहां संवाददाताओं से कहा कि विधायकों की सामूहिक इच्छा को ध्यान में रखा जाएगा और फिर पर्यवेक्षक इसे आलाकमान तक पहुंचाएंगे।” एक सवाल के जवाब में सिंह ने कहा कि आलाकमान जो भी फैसला करेगा, वह हम सबको मंजूर होगा। उन्होंने कहा कि हमारे लिए पद महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि हमने लोगों से जो वादे किए हैं, उन्हें हमें पूरा करना है और हम उसके लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि दो-तीन दिन में सरकार का गठन कर लिया जाएगा।

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विधानसभा चुनाव में जीत-हार के मायने https://samacharpacheesa.com/?p=5083 Fri, 09 Dec 2022 06:14:21 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=5083 दो राज्यों में विधानसभा चुनाव के साथ छत्तीसगढ़ में भानुप्रतापपुर विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव के परिणाम घोषित हो गए। गुजरात में भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। हिमाचल प्रदेश में मतदाता हर पांच साल में सरकार बदल देती है। यह मानसिकता गुरुवार को घोषित परिणाम में देखने को मिली जब कांग्रेस पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला है। चुनाव में हार जीत राजनीतिक प्रक्रिया के दो पहलु है। यह न तो स्थायी है और न ही अनुमान लगाया जा सकता है। जनता ने अपना मत किस उम्मीदवार या किस पार्टी के नाम कर दिया है। यह तो इवीएम की पेटी खुलने के बाद ही पता चलता है। लेकिन चुनाव की घोषणा के बाद से मतदान होने तक राजनीतिक पार्टियां जिस तरह एक-एक सीट को जीतने के लिए अपना दमखम लगाती है, बहुमत प्राप्त करने के लिए योजनाएं और रणनीति बनायी जाती है। उसका लाभ भी चुनाव के परिणाम में मिलता है। अब गुजरात की बात करें तो 2017 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी के बीच एक कड़ी टक्कर देखी गई थी। भाजपा 100 का आंकड़ा भी नहीं छू पायी थी और कांग्रेस पार्टी ने 77 सीटों पर जीत हासिल की थी। भले ही भाजपा जीत गई, उसकी सरकार बन गई लेकिन कांग्रेस पार्टी ने जिस ताकत से चुनाव लड़ा उससे पूरे देश में एक संदेश गया। इसका मतलब है कि चुनाव में राजनीतिक पार्टियों के मेहनत और उसका परिणाम देश भर में एक संदेश देता है। इस बार गुजरात में कांग्रेस पार्टी ने चुनाव को गंभीरता से नहीं लिया। शायद आम आदमी पार्टी की सक्रियता के कारण पार्टी के नेताओं को लगा हो कि ज्यादा कुछ हासिल होने वाला नहीं है, इसलिए पूरी ताकत हिमाचल प्रदेश में क्यों न लगाई जाए? अगर यह रणनीति थी तो वह सही साबित हुए। हिमाचल प्रदेश में 68 में से 40 सीटें जीत कर कांग्रेस सफल हो गई। लेकिन गुजरात में 282 में से कांग्रेस केवल 17 सीटें ही जीत पायी। देश की सबसे पुरानी पार्टी का किसी बड़े राज्य में ऐसा प्रदर्शन पूरी राजनीति को प्रभावित करती है। लोकतंत्र में 2 मजबूत पार्टियों का होना आवश्यक है। एक तीसरा विकल्प भी होना चाहिए कि दोनों पार्टियों से जनता का मोह भंग हो जाए तो वह तीसरी को मौका दे। लोकतंत्र में अगर केवल सत्ता पक्ष ही मजबूत रहा और विपक्ष लगातार कमजोर होती जाए तो स्वस्थ लोकतंत्र की कल्पना नहीं की जा सकती। इसलिए कांग्रेस पार्टी के आला नेता के विचार जो भी हो लेकिन छोटे से छोटे चुनाव को भी पूरे दमखम के साथ लडऩा चाहिए। यह बात भारतीय जनता पार्टी से सीखी जा सकती है। नगर निगम के चुनाव भी पार्टी लोकसभा और विधानसभा के चुनाव की तरह लड़ती है। एक चुनाव खत्म होता है और दूसरे चुनाव की तैयारी शुरु हो जाती है। हार-जीत अपनी जगह है, लेकिन यह संदेश तो जाता है कि पार्टी हर चुनाव को गंभीरता से लेती है। हिमाचल प्रदेश में भाजपा भले ही हार गई हो लेकिन 25 सीटों पर जीत हासिल करके एक मजबूत विपक्ष के रुप में खड़ी हो गयी। इधर छत्तीसगढ़ के भानुप्रतापपुर सीट पर कांग्रेस पार्टी को जीत मिली है। पिछले 4 वर्षों में यह पांचवां उपचुनाव है और सभी में कांग्रेस पार्टी जीत कर आई है। 15 साल लगातार सत्ता में रहने के बाद 2018 में भाजपा को कांग्रेस के हाथों करारी हार मिली थी तब भाजपा के मात्र 15 विधायक चुनकर आए थे। भानुप्रतापपुर के उपचुनाव का अपना महत्व है। एक तो इस चुनाव के बाद केवल एक साल का समय है, जब विधानसभा के आम चुनाव होंगे। भाजपा लगातार संगठन को मजबूत और सक्रिय करने पार्टी के कार्यकर्ताओं में उत्साह जगाने के लिए कोशिश कर रही है। अगर यह उपचुनाव भाजपा के पक्ष में जाता तो पार्टी को संजीवनी मिल जाती है, लेकिन ऐसा हो सका। कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार सावित्री मंडावी ने भाजपा के उम्मीदवार ब्रह्मानंद नेताम को 21 हजार से अधिक मतों से पराजित कर दिया। इस चुनाव में सर्व आदिवासी समाज के उम्मीदवार अकबर कोर्राम ने भी 23 हजार से अधिक मत प्राप्त किए। स्वाभाविक है भाजपा खेमे में निराशा होगी और कांग्रेस का उत्साह चरम पर होगा। चुनाव घोषणा होने के बाद जिस तरह यह चुनाव संपन्न हुआ उससे कई सवाल उठते है। जिसकी चर्चा बाद में होगी।

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