58 प्रतिशत आरक्षण – SAMACHARPACHEESA.COM https://samacharpacheesa.com Mon, 07 Aug 2023 10:28:18 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.3 भूपेश कैबिनेट का अहम फैसला: शैक्षणिक संस्थाओं में एडमिशन के लिए लागू होगा 58 प्रतिशत आरक्षण https://samacharpacheesa.com/?p=7730 Mon, 07 Aug 2023 10:28:17 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=7730 रायपुर। सीएम भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज सोमवार को उनके निवास कार्यालय मुख्यमंत्री आवास में कैबिनेट की अहम बैठक हुई। इसमें राज्य सरकार ने शैक्षणिक संस्थाओं में पहले की तरह आरक्षण व्यवस्था के तहत प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। इसके मुताबिक, शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश के लिए 58 फीसदी आरक्षण लागू होगा। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 58 प्रतिशत आरक्षण लागू रहेगा।
इस संबंध में भूपेश कैबिनेट ने आरक्षण पर मुहर लगा दी है। शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश के लिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को 58 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। सीएम भूपेश बघेल ने ट्वीट कर इस संबंध में जानकारी दी है। उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली की ओर से राज्य शासन की ओर से दायर एसएलपी में पारित अंतरिम आदेश एक मई 2023 के अंतर्गत राज्य में पूर्व प्रचलित आरक्षण व्यवस्था अनुसार नियुक्ति / चयन प्रक्रियाओं को जारी रखने के लिए अंतरिम राहत प्रदान की गई है। इस अंतरिम आदेश के अनुरूप ही अंतरिम तौर पर, मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य की शैक्षणिक संस्थाओं में भी प्रवेश प्रक्रिया पूर्व प्रचलित आरक्षण व्यवस्था अंतर्गत करने का निर्णय लिया गया है।
डिप्टी सीएम सिंहदेव और अन्य मत्री वर्चुअली जुड़े
मुख्यमंत्री निवास में आयोजित बैठक में डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव, मंत्री कवासी लखमा और जयसिंह अग्रवाल वर्चुअली वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। वहीं मंत्री रविंद्र चौबे, मोहम्मद अकबर, ताम्रध्वज साहू, अनिला भेंडिया, मोहन मरकाम और कई अधिकारी बैठक में मौजूद रहे।
58 प्रतिशत आरक्षण पर शैक्षणिक संस्थाओं में होंगे एडमिशन
पूर्ववर्ती रमन सरकार के समय आरक्षण नीति में बदलाव करते हुए 18 जनवरी 2012 को अधिसूचना जारी की गई थी। इसके तहत लोकसेवा (अजा, अजजा एवं पिछड़ा वर्ग का आरक्षण) अधिनियम 1994 की धारा-4 में संशोधन किया गया था। इसमें अजजा वर्ग को 32 फीसदी, अजा वर्ग को 12 फीसदी और पिछड़ा वर्ग को 14 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। पिछले साल नवंबर में हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए 58 प्रतिशत आरक्षण पर रोक लगा दी थी। इस पर राज्य सरकार की ओर से मामला सुप्रीम कोर्ट में गया था। 1 मई 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की ओर से 58 प्रतिशत आरक्षण पर लगी रोक को हटा दिया था। अब इसी आरक्षण रोस्टर के मुबातिक प्रदेश में भर्ती हो रही है। वहीं अब शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश इसी रोस्टर के मुताबिक होंगे।
सीएम 15 अगस्त को कर सकते हैं बड़ा ऐलान
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 15 अगस्त को बड़ा ऐलान कर सकते हैं। कैबिनेट की बैठक में इस पर भी चर्चा की गई है। इसके अलावा मानसून, कृषि, पीएससी नियमों में भर्ती संशोधन और आरक्षण जैसे मामले पर चर्चा की गई है। बैठक में अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण पर भी चर्चा की गई है। हाल ही में सीएम भूपेश बघेल के आश्वासन पर अनियमित कर्मचारियों ने हड़ताल को खत्म किया था।

]]>
आरक्षण पर सर्वोच्च न्यायालय का आदेश https://samacharpacheesa.com/?p=6822 Wed, 03 May 2023 08:50:00 +0000 https://samacharpacheesa.com/?p=6822 प्रदेश में आरक्षण को लेकर भ्रम का वातावरण है, उस पर सुप्रीम कोर्ट के एक ऑर्डर को लेकर मीडिया से राजनीति तक जिस प्रकार से प्रचारित किया गया, उससे भ्रम और बढ़ गया है। सोमवार को इस तरह की खबर आई कि प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट ने 58 प्रतिशत आरक्षण को जारी रखने का फैसला दे दिया है। मतलब उच्च न्यायालय ने सितंबर में प्रदेश में लागू 58 प्रतिशत आरक्षण को खारिज कर दिया था उसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस खबर के बाद सरकार ने भी बैठक कर भर्ती परीक्षा कराने का निर्णय लिया ऐसी खबर आई। आज जब सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर की कॉपी मिली तो पता चला कि सुप्रीम कोर्ट ने 58 प्रतिशत को लेकर कोई आदेश नहीं दिया है। कोर्ट ने केवल प्रदेश में भर्ती और पदोन्नति की प्रक्रिया को जारी रखने के लिए कहा है। इस आदेश में न तो उच्च न्यायालय के निर्णय का उल्लेख है और न ही आरक्षण कोटा को लेकर कोई आंकड़ा। ऑर्डर में तो यह भी लिखा है कि प्रदेश में जो भी निर्णय लिया जाएगा वह कोर्ट के अंतिम निर्णय से प्रभावित होगा। अब सवाल यह भाई कि जब सुप्रीम कोर्ट ने 58 प्रतिशत के बारे में कुछ कहा ही नहीं तो मीडिया से लेकर सरकार तक में इसकी चर्चा कैसे हुई? इसका दोषी कौन है? पहली बात तो सरकार के पक्ष रखने वाले वकीलों ने मीडिया और सरकार को जो बताया होगा वही बात सार्वजनिक हुई होगी, इसका मतलब इस भ्रम को फैलाने के दोषी वकील हैं? या मीडिया ने बिना जानकारी लिए आधे अधूरे तथ्य के आधार पर समाचार परोस दिया? अगर ऐसा है भी तो सरकार को तो आदेश की कॉपी मिलने तक इंतजार कर लेना था, इसका श्रेय लेने की हड़बड़ी में शासन ने भी लापरवाही की। कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संकट और गहरा गया है। हालांकि सरकार की जिद है कि 76 प्रतिशत पर ही भार्ती करनी है वरना देश भर में 50 प्रतिशत आरक्षण कोटा के आधार पर भर्ती परीक्षाओं के परिणाम घोषित कर सकती है और नई परीक्षाएं भी ले सकती है। जब निर्णय आएगा तब नई व्यवस्था लागू की जा सकती है। सरकार को विषय की गंभीरता समझनी चाहिए, छात्र परेशान हैं, महाविद्यालयों में प्रवेश बाधित होंगी। पीढ़ी का नुकसान है, ऐसे में सरकार को युवाओं को समझते हुए आगे बढऩा चाहिए। लेकिन चुनाव करीब है और वोटबैंक का सवाल है इसलिए कुछ निर्णय होगा इसकी संभावना कम है। वैसे भी आरक्षण को लेकर पिछले 6-8 महीनों से केवल राजनीति हो रही, जिसका खामियाजा पढऩे वाले बेरोजगार युवाओं को भुगतना पड़ रहा है। प्रदेश में आरक्षण का मामला छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के फैसले से पेचीदा हुआ जब प्रदेश में 2012 से लागू 58 प्रतिशत आरक्षण को असंवैधानिक करार दे दिया गया। इसके बाद प्रदेश में वापस 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू हो गई। इस निर्णय से सबसे अधिक नुकसान जनजातीय समाज को हुआ क्योंकि 2012 में जनजातीय वर्ग के आरक्षण का कोटा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 32 प्रतिशत किया गया था वहीं अनुसूचित जाति की आबादी के अनुसार आरक्षण को 16 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत किया गया था। इस निर्णय से नाराज अनुसूचित जाति समाज के प्रतिनिधि उच्च न्यायालय गए थे। इधर प्रदेश सरकार ने जनजाति समाज के विरोध को देखता हुए विधानसभा में आरक्षण कोट में संशोधन करने एक और विधायक ले जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इसके अनुसार प्रदेश में 76 प्रतिशत आरक्षण कोटा दिया गया है जिसमें आदिवासियों को 32 प्रतिशत के साथ पिछड़े वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया। इस विधेयक को राजभवन में लंबित रखा गया है क्योंकि उच्च न्यायालय के फैसले को शासन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी हुई है। अब सवाल यह है कि जब 58 प्रतिशत आरक्षण कोटा असंवैधानिक है तो फिर 76 प्रतिशत कैसे स्वीकृत होगा? मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चलती रही और आरक्षण की व्यवस्था के भ्रम में प्रदेश की भर्ती परीक्षाओं और शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश की परीक्षाएं लटक गई। इस कारण छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से भर्ती के लिए अनुमति मांगने के प्रयास किए। इसी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दी लेकिन उसमें कोई स्पष्टता नहीं है।

]]>