
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के किसान जोधन केंवट की सफलता इस नीति की जीती-जागती मिसाल है। उन्होंने अपनी लगभग ५ एकड़ भूमि पर उगाए धान को दो चरणों में कुल ९९ क्विंटल उपार्जन केंद्र पेंड्रा में बेचा। जोधन ने खुशी से बताया कि पहले की तुलना में अब खरीदी प्रक्रिया कहीं अधिक बेहतर और आसान हो गई है। समिति के माध्यम से टोकन कटवाकर बिना किसी झंझट के धान बेच पाया।
राज्य सरकार की पहल से धान खरीदी में क्रांति आ गई है। ऑनलाइन और समिति आधारित टोकन प्रणाली ने लंबी कतारों व अव्यवस्था का अंत कर दिया है। किसानों को अब न तो इंतजार करना पड़ता है और न ही कोई बिचौलिया हस्तक्षेप होता है। पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से निगरानी में रहती है, जो पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करती है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा घोषित ३१०० रुपये प्रति क्विंटल की दर और प्रति एकड़ २१ क्विंटल धान खरीदने की सीमा ने किसानों की चिंताओं को दूर कर दिया। जोधन केवट जैसे हजारों किसान अब अपनी उपज का पूरा मूल्य समय पर प्राप्त कर रहे हैं, जिससे उनके परिवारों में खुशहाली लौट आई है। यह व्यवस्था न केवल आर्थिक लाभ दे रही है, बल्कि किसानों में आत्मविश्वास भी भर रही है।