रावतपुरा सरकार के नाम से प्रसिद्ध रविशंकर का साम्राज्य व उसकी धोखाघड़ी व गड़बड़ी देख कर भी श्रद्धालुओं की आंखें नहीं खुल रही हैं। इसके पहले एक नहीँ अनेक बाबाओं की पोल पट्टी खुल चुकी है। अनुयायियों में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं दिखाई देती। आखिर यह मायाजाल है क्या? करोड़ों अरबों की सम्पति के मालिक ये यूं ही नहीं बन रहे,कोई तो इसके पीछे राज मौजूद है। कुछ बाबा अच्छे भी हो सकते हैं। हम सभी पर प्रश्न नहीं उठा रहे हैं। लेकिन अधिकांश को हम देख रहे हैं कि देखते ही देखते देश भर में इनकी जमीन जायदाद की सीमा बढ़ती ही जा रही है। लगभग सभी राज्यों की सरकारें मिट्टी के मोल इनके आश्रम,अस्पताल,स्कूल, कालेज के लिए जमीन न्योछावर कर, अपने को धन्य समझ रहीं है। कई मुख्य मंत्री,मंत्री,और उनसे ऊंचे ओहदे वाले पदाधिकारी भी इनकी शरण में देखे जाते हैं। इसी कारण आम जनता सोचती है कि पहुंचे हुए बाबा है। जनता भी इसी भ्रम में चरणों में ढेर हो जाती है। बड़े लोगों का इन बाबाओं से रिश्ता क्या है और क्या कहलाएगा? यह तो नहीं कहा जा सकता लेकिन कुछ चर्चा प्रबुद्ध बुद्धिजीवियों के बीच जरूर सुनी जाती है कि इन बाबाओं के साम्राज्य की बढ़ोतरी में कुछ बड़े लोगों के काले धन का भी हिस्सा है। सच झूठ तो बहुत बड़ी हिम्मती जांच से ही पता चल सकता है। रामरहीम डेरा सच्चा सौदा,आशाराम बापू, जैसे अनेक नाम सामने आ चुके उसके बाद भी अनुयायियों को समझ नहीं आ रही है कि उनके इस अंधी दौड़ के कारण देश के लोगों का क्या क्या लूटा जा रहा है। कोई नहीं सोच रहा है कि आखिर ये बाबा, सन्त,महात्मा, युग पुरुष के रूप में पूजे जाने वाले सामान्य लोग इतना बड़ा साम्राज्य कैसे और किसकी मदद से खड़ा कर लेते हैं। हर क्षेत्र के बड़े बड़े उद्योगपतियों, हर दल के बड़े बड़े नेताओं को इनका अनुयायी बनते व उनके सामने शीश झुकाते देखा जाता है। यही कारण भी बन जाता है कि लोग सोचते हैं कि इतने बड़े बड़े लोग जब इनके अनुयायी हैं तो कोई खास बात ही होगी। एक कथाकार हैं जो एक स्वामी से अपने गलत प्रवचन के लिए नाक रगड़ कर माफी भी मांग चुके हैं। उन्हें देखने -जानने वालों को अच्छी तरह मालूम है कि वे कल क्या थे,और आज क्या हैं। उनको बुलाने वाले आयोजक उनके सहारे अब राजनीति के माहिर नेता बन चुके हैं। कभी आसपास फटकने को तरसता यह आयोजक आज प्रदेश के बड़े बड़े नेताओं व मंत्रियों की करीबी हासिल कर चुका है। लालच नेता को यह हुआ कि आयोजक ने हजारों की भीड़ के बीच इन बड़े लोगों की महाराज से भेंट करवा कर उनके मुखार बिंद से इन नेताओं की प्रसंशा करवा दी। कुछ दल विशेष को राम राम करवा दिया। बात तो कई हैं पर अभी हाल रविशंकर महाराज जो अपने को सरकार कहलाना पसंद करते हैं (राउतपुरा सरकार) के बड़े कारनामे का खुलासा हुआ है। अखबारों के सारे रंग राउतपुरा के कारनामों के रंग से रंगे हुए हैं। आये दिन नए खुलासे हो रहे हैं। महाराज ने धर्म के नाम पर कई संस्थान खड़े कर लिए। आश्रम बन गया। कॉलेज ,और मेडिकल कॉलेज भी खुल गया। मेडिकल कॉलेज खोलने जरूरी प्रमाणों के लिए क्या क्या नहीं किया। कॉलेज के निरीक्षण को अपने तरीके से सेटिंग करवा लिया। बड़े बड़े सरकारी संस्थानों के डॉक्टर, विशेषज्ञों के साथ केंद्रीय स्वास्थय मंत्रालय से आये लोगों को भी सेटिंग में शामिल कर लिया। टीम के सामने गबरू जवानों के साथ बुजुर्ग नकली मरीजों की नगद भुगतान कर भरती करवा कर निरीक्षण की खाना पूर्ति करवा ली। अब जनता सोचे कि ये महाराज या बाबा जिस नाम से भी पुकार लो, असल में क्या कर रहे हैं। इनके असली काम प्रवचन करना या अपने भक्तों को संकट से उभारना है या जनता के समर्थन व बड़े बड़े लोगों तक पैठ बना कर अपना उल्लू सीधा करना है। अखबार ने रविशंकर महाराज के नाम के साथ सभी केंद्रीय मंत्रालय के अधिकारियों व सभी संलग्न अधिकारियों व डॉक्टरों के संस्थानों सहित आज ही सूची भी प्रकाशित की है। जनता के सामने बाबाओं-महाराजों की सच्चाई को उजागर कर दिया है,करते आ रहे हैं। अब जनता जागे तब कुछ बात बने। और एक बात कि देश भर के मंदिरों में गरीब-अमीर जनता अपनी श्रद्धा के अनुसार चढ़ावा चढ़ाती है। यह राशि अरबों-खरबों तक पहुंच गई होगी,उनका सदुपयोग जनहित की योजनाएं बना कर भारत की गरीब जनता के बीच किया जाए। केंद्र की सरकार को इस पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए। बाकि जो है वो तो हैइये है।