छतीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अंतत: अपने मंत्री मंडल का पूर्ण गठन कर ही लिया। ना सिर्फ मंत्री मंडल का पूर्ण गठन किया बल्कि प्रदेश को एक मंत्री हरियाणा की तर्ज पर बोनस में दे दिया। अब मुख्यमंत्री सहित ये सभी 14 मंत्री प्रदेश के विकास में अपना योगदान देंगें। अभी हाल कल ही तीन मंत्रियों ने पद की गोपनीयता की शपथ ली। तीनों ही पहली बार के विधायक हैं। पहली बार में ही सत्ता का भागीदार बना दिया गया। अभी तक शासन का अनुभव नहीं है ,लेकिन अब लेंगें। इन तीन मंत्रियों को मिला कर अब मंत्रिमंडल में 7 मंत्री पहली बार के मंत्री हो गए। पूरी टीम में अगर हम प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री को नया माने तो 11 अन्यथा 10 मंत्री नए लोगों को बनाया गया है। शेष में सिर्फ रामविचार नेताम,केदार कश्यप,दयालदास बघेल पुराने नेता हैं, जिनके पास मंत्री परिषद का अनुभव है। बाकी सभी नए हैं। अनेक मंत्रियों ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर अपनी प्रतिष्ठा बनाई है। अजय चंद्राकर सहित मंत्री पद की योग्यता में परखे जा चुके लगभग 9 क्षमता वान पुराने मंत्री रहे सदस्य भी विधानसभा में बैठते हैं। उनको भी इस बात की प्रतीक्षा थी कि कब उनके मोबाइल की घंटी बजेगी। कुछ ने तो शपथ के लिए जरूरी तैयारियां भी कर ली थी। मोबाइल की घंटी ने धोखा दे दिया। घंटी बजी भी तो अब तक प्रशाशन -शासन के अनुभवहीन तीन सदस्यों के मोबाइल की बज गई। विपक्ष ने इसे बेवजह बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना की तर्ज पर कह दिया कि अनुभवी लोगों को छोड़ दिया गया। पुराने अनुभवी सदस्यों का अपमान कर दिया। यही भाजपा का असली चरित्र है। शायद सोचा हो कि रूठे लोगों को साध लिया जाएगा, तो कुछ रास्ता निकले। कुछ हंगामा बरपा हो जाए। पर कुछ खुल कर सामने अब तक नहीं आया। इतनी जल्दी आएगा भी नहीं। क्योंकि ये भाजपा है। इसमें विद्रोह बहुत सोच समझ कर ही किया जा सकता है। विपक्ष ने यह भी कहा नए लोग आखिर क्या कर पाएंगें। यह नहीं समझा गया कि जो यह बयान दे रहे हैं ,एक दिन वे भी राजनीति में नए रहे हैं। सबकी अपनी क्षमता होती है,ऊर्जा होती है मौका मिलने पर ही वह क्षमता उभर कर सामने दिखाई देती है। पहले भी मंत्री मंडल में 7 मंत्री नए और पहली बार के विधायक थे। सबने अपनी क्षमता का ठीक ठीक प्रदर्शन किया है। हां यह जरूर है कि कुछ मंत्री कुछ मायनों में असफल भी रहे हैं। बदनामी भी हुई है। लेकिन अधिकांश सदस्यों ने अच्छा प्रदर्शन भी किया है। वित्त मंत्री के रूप में ओ.पी.चौधरी ,विजय शर्मा,अरुण साव ने अपनी क्षमता का भरपूर व बेहतर प्रदर्शन किया है। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक अच्छा मंत्री मंडल देने का प्रयास किया है,जिसमें जातिगत समीकरण व संतुलन दिखाई देता है। पूरे 14 मंत्रियों में 7 यानि 50त्न ओबीसी वर्ग से हैं इसमें भी सातों अलग अलग जाति से चुने गए हैं। दो कुर्मी जाति से तो एक एक साहू,यादव,देवांगन,,राजवाड़े,जायसवाल जाति के सदस्यों को शामिल करके पूर्ण संतुलन बैठाया गया है। 2 अनु.जाति, 3 अनु.जनजाति, 2 सामान्य वर्ग को मंत्रिमंडल में शामिल कर सभी वर्ग को साधने का पूरा आधार बनाया गया है। मंत्री मंडल का सारा सस्पेंस अब खत्म हो गया है। अब तक विरोध खुल कर सामने नहीं आया है। लेकिन कल शपथ ग्रहण समारोह में कुछ नेताओं ने अनुपस्थित रह कर और कुछ लोगों ने थोड़ी देर रुक कर वापस जाकर अपना अप्रत्यक्ष विरोध प्रदर्शित जरूर किया है। जिसकी चर्चा भी हुई है। अजय चंद्राकर,अमर अग्रवाल, लता उसेंडी,रेणुका सिंह,राजेश मूणत,धरमलाल कौशिक,पुन्नूलाल मोहिले,और कुछ हद तक कांग्रेस से जोगी कांग्रेस के रास्ते भाजपा में शामिल हुए धर्मजीत सिंह भी मंत्री परिषद में अपना महत्व चाहते थे। सपना सबका टूट गया है। अब उनका अगला कदम क्या होगा यह देखने वाली बात होगी। जानकर लोगों का कहना है कि भाजपा में खुल कर विरोध या विद्रोह करने की स्थिति नहीं बन सकेगी। यह जरूर है कि विधानसभा के अगले सत्र में भाजपा सरकार को दो -दो विपक्ष का सामना करना पड़ सकता है ,इसकी संभावना है। कुल मिला कर भाजपा हाई कमान ने यह निर्णय लेकर प्रदेश वासियों व अपने कार्यकर्ताओं को साफ साफ संकेत दे दिए हैं। अगला चुनाव वोट बैंक के सबसे बड़े ओबीसी वर्ग को लक्ष्य बना कर ही लड़ा जाएगा। नए लोगों को महत्व देकर यह भी संकेत दे दिया है कि भाजपा अब पीढ़ी परिवर्तन की दिशा में बढ़ रही है। इसे कोई रोक नहीं सकता। जहां जिसकी उपयोगिता होगी वैसे ही उसका उपयोग किया जाएगा।